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12 Jan 2026, (अपडेटेड 12 Jan 2026, 7:17 AM IST)
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन अपने चरम पर हैं। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों को सरकार गिरफ्तार कर रही है। प्रदर्शनकारी सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ कर रहे हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई। Photo Credit: PTI
ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में वहां की सरकार और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई बुरी तरह घिर गए हैं। सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। ये प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए थे और अब पूरे देश में फैल चुके हैं। लोग महंगाई, आर्थिक संकट और सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों के दमन पर लगी है, वहीं डोनाल्ड ट्रंप अब सैन्य कार्रवाई की योजना तैयार कर रहे हैं। वह खुद, कई बार सोशल मीडिया पर दोहरा चुके हैं।
ईरान सरकार ने इन विरोधों को दबाने के लिए बहुत सख्त कार्रवाई की है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिससे सैकड़ों लोग मारे गए हैं। मानवाधिकार संगठन HRANA ने दावा किया है कि ईरान में बीते 15 दिनों में कम से कम 490 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और 10,600 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिनमें 169 बच्चे भी शामिल हैं।
ईरान से आए ये आंकड़े और ज्यादा हो सकते हैं। ईरान में इंटरनेट और फोन सेवा लगभग पूरी तरह बंद कर दी गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों को मारना जारी रखती है, तो अमेरिका बहुत तगड़ी कार्रवाई करेगा।
ईरान में प्रदर्शन। Photo Credit: PTI
डोनाल्ड ट्रंप:- ईरान अब आजादी की तरफ देख रहा है, अमेरिका मदद के लिए तैयार है।
ईरान के लिए क्या सोच रहे हैं ट्रंप?
डोनाल्ड ट्रंप ने इशारा किया है कि इस संकट में अमेरिकी सैनिक ईरान में नहीं भेजे जाएंगे लेकिन जरूरत पड़ने पर ईरान को जहां दर्द होता है, वहां बहुत जोर से मारा जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी अधिकारी, हमले की योजना बता रहे हैं। CNN की एक रिपोर्ट बताती है कि बीते कुछ दिनों में ईरान के सुरक्षा बलों पर सैन्य हमले, हवाई और साइबर अटैक की रणनीति सुझाई जा रही है।
ईरान पर नए प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। ईरान के बैंक और तेल सेक्टर पर प्रतिंबध लगाए जाएंगे। अमेरिका यह भी सोच रहा है कि ईरान को स्टारलिंग इंटरनेट सेवा देकर प्रदर्शनकारियों को इंटरनेट ब्लैकआउट से बचाया जाएगा, जिससे वहां की असली तस्वीर सामने आ सके।
ईरान में रजा पहलवी की वापसी की मांग हो रही है। Photo Credit: PTI
ईरान से अमेरिका को क्या डर है?
अमेरिकी प्रशासन में कुछ लोग चिंतित हैं कि सैन्य हमले से उल्टा असर हो सकता है। ईरानी लोग सरकार के साथ एकजुट हो सकते हैं। ईरान की तरफ से भी सख्त जवाब आया है। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है, तो अमेरिकी सैन्य अड्डे, जहाज और इजरायल पर हमला किया जाएगा। उनका कहना है कि ईरान सिर्फ हमले के बाद ही जवाब नहीं देगा, कोई भी खतरा दिखा तो पहले ही एक्शन लिया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू दोनों पर भड़के हैं अयातुल्लाह खामेनेई। Photo Credit: PTI
इजरायल क्या कर रहा है?
इजरायल भी स्थिति पर नजर रख रहा है और अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है। अभी तक डोनाल्ड ट्रंप ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन अगले कुछ दिनों में और बैठकें होने वाली हैं। यह स्थिति बहुत नाजुक है। ईरान में लोग आजादी की मांग कर रहे हैं। सरकार इन विरोध प्रदर्शनों को दबा रही है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव फिर से बहुत बढ़ गया है।
क्या निकोलस मादुरो जैसा खामेनेई का हाल होगा?
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' में काराकास पर हमला कर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को अगवा किया। वे अब न्यूयॉर्क की जेल में हैं, जहां ड्रग्स तस्करी और नारको-टेररिज्म के आरोपों पर मुकदमा चल रहा है। उन्होंने दोषी न होने की दलील दी। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका वेनेजुएला का नियंत्रण अपने हाथ में लेगा, जब तक वहां नई सरकार नहीं बन जाती है।
अली खामेनेई अभी ईरान के सर्वोच्च नेता हैं। स्वास्थ्य अफवाहें हैं, लेकिन वह सक्रिय हैं। आर्थिक संकट की वजह से दिसंबर 2025 से ईरान बड़े विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अब ये प्रदर्शन इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ हो गए हैं। दर्जनों मौतें हुईं हैं, इंटरनेट ब्लैकआउट की स्थिति है।
अयातुल्ला खामेनेई ने 9 जनवरी के भाषण में प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान की गिरफ्तारी करना ट्रंप के लिए आसान नहीं है। वेनेजुएला की तुलना में ईरान ज्यादा ताकतवर देश है। वह ईरान पर हमला करेंगे, ईरान इजराय की राजधानी येरुशलम तक हमला करने की ताकत रखता है। ईरान की मजबूत सेना है, मिसाइलें हैं, प्रॉक्सी संगठन हैं। रूस और चीन का सीधा समर्थन है। अमेरिका हमला करने से डर भी रहा है। अब वहां बदलाव आंतरिक विद्रोह से ही हो सकते हैं, सीधे अमेरिकी हस्तक्षेप से सत्ता परिवर्तन मुश्किल लग रहा है।