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केन-बेतवा लिंक परियोजना का हजारों आदिवासी विरोध क्यों कर रहे हैं?

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना भारत की सबसे महत्वपूर्ण और पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसका मकसद पानी की कमी वाले क्षेत्रों को राहत देना है। मगर, इसका विरोध शुरू हो गया है।

ken betwa river linking Project

केन-बेतवा लिंक परियोजना। Photo Credit- AI Sora

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केन और बेतवा दोनों मध्य प्रदेश की बड़ी नदियों में शुमार हैं। यह दोनों ही यमुना की सहायक नदियां हैं। केन बांदा तो बेतवा हमीरपुर जिले में आकर यमुना में मिलती है। दोनों मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड संभाग की पानी की जरूरतों को पूरा करती हैं। इस बड़े और शुष्क इलाके में इन दोनों नदियों की इतनी अहमियत है कि यहां की खेती, बिजली और पीने के पानी की जरूरत पूरी होती है। इसके लिए दोनों नदियों पर बांध बनाया जा रहा है। 427 किलोमीटर लंबी केन और 590 किलोमीटर बेतवा नदी को जोड़ने के लिए परियोजना चलाई जा रही है, जिससे दोनों नदियों को जोड़कर  मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों की जरूरतें पूरी की जा सकें। 

 

केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना भारत की सबसे महत्वपूर्ण और पहली नदी जोड़ो परियोजना है। इसका मकसद पानी की कमी वाले क्षेत्रों को राहत देना है। इसे खास तौर पर बुंदेलखंड क्षेत्र के विकास के लिए बनाया जा रहा है। परियोजना के तहत केन नदी से अतिरिक्त पानी लेकर बेतवा नदी में पहुंचाना है। 

 

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत प्रस्तावित दौधन बांध बनाया जा रहा है। प्रस्तावित दौधन बांध का निर्माण कार्य शुरू हो गया है, लेकिन यह निर्माण कार्य अधर में अटक गया है। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व में बन रहे इस बांध को लेकर बड़े स्तर पर विरोध हो रहा है। ऐसे में आइए इस परियोजना का विरोध क्यों हो रहा है और इलाके के लाखों आदिवासी इसके खिलाफ क्यों खड़े हो गए हैं... 

 

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बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना का आदिवासी समाज बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन कर रहा है। यही वजह है कि महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत प्रस्तावित दौधन बांध का निर्माण कार्य लगातार शुक्रवार को छठवें दिन भी बंद रहा। ग्रामीण आदिवासी सरकार से उचित मुआवजे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कुछ ग्रामीणों ने जमीन पर लेटकर शवों की तरह प्रतीकात्मक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया। 

 

यह प्रदर्शन स्थानीय नेता अमित भटनागर के नेतृत्व में हो रहा है। प्रदर्शन में मझगांव, विशरनगंज-नेगवा, दौधन, पलकोन्हा, खरयानी, सुकवाहा और मैनारी सहित 40 से अधिक गांवों के लोग हिस्सा ले रहे हैं। बांध के निर्माण स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने शिविर लगा लिया है। उन्होंने विस्थापित परिवारों के लिए 12.5 लाख रुपये के मुआवजे के पैकेज की मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने सागर संभाग के कमिश्नर के साथ बातचीत करने पर जोर दिया है। बिजावर और राजनगर के उप-संभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ने घटनास्थल का दौरा किया, लेकिन प्रदर्शनकारी कमिश्नर से बात करने पर अड़े हुए हैं। 

प्रदर्शनकारियों ने लगाया गंभीर आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि पन्ना जिले में पहले की बांध परियोजनाओं से विस्थापित हुए लोगों को भी पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने राहत और पुनर्वास लाभ में समानता की मांग की। प्रदर्शनकारी कर रहे हैं कि पहले के वादे पूरे नहीं किए गए हैं। इसमें सरकार ने हमसे अधिक मुआवजे देने का वादा किया था, लेकिन वह नहीं दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि केन-बेतवा परियोजना के लिए शुरुआती समर्थन के बावजूद, प्रभावित परिवारों को अभी तक पर्याप्त भुगतान नहीं मिला है।

भुसोर नाका के पास सुरक्षा कड़ी

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि लाभार्थियों के केवल एक छोटे हिस्से को मुआवजा मिला है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी इसका इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन ने बाहरी लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए पन्ना टाइगर रिजर्व के भुसोर नाका के पास सुरक्षा कड़ी कर दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी वैकल्पिक रास्तों से प्रदर्शन स्थल पर पहुंच गए। हालांकि, अधिकारी बातचीत के जरिए इस स्थिति को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

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परिजोयना से पैदा होने वाला खतरा

इस परिजोयना को लेकर आदिवासी और पर्यावरणविद पर्यावरणीय चिंता भी जता रहे हैं। इस परियोजना में यह बड़ी रुकावट है। दरअसल, दोनों नदियों के पानी पर बनने वाले बांध से पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़े हिस्से के डूब क्षेत्र में आ जाएगा। इससे यहां के जंगल और वन्यजीवों पर खतरा पैदा हो जाएगा। इसके अलावा ग्रामीणों के सामने विस्थापन का खतरा है। यहां रहने वाले लोग सदियों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, जिसमें हजारों लोगों को यहां से हटाना पड़ेगा। इसमें 24 गांवों का सीधा विस्थापन हो रहा है और 8 गांव सीधे तौर पर डूब जाएंगे।

केन-बेतवा लिंक कैसे होगी?

केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मध्य प्रदेश से निकलने वाली केन और बेतवा नदी को नहर के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इसके तहत केन नदी का पानी बेतवा नदी में बहाया जाएगा, जिससे न सिर्फ जल स्तर में बढोतरी होगी, बल्कि सिंचाई और पेयजल के लिए भरपूर पानी की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो सकेगी। इस परियोजना के पहले चरण के तहत वर्तमान में दौधन बांध पर काम शुरू हुआ है। इस चरण में केन नदी पर 77 मीटर ऊंचा एक बांध प्रस्तावित है। 

 

इस परियोजना में बिजली उत्पादन के लिए दो पावर हाउस, एक बांध के निचले स्तर में और दूसरा निचले स्तर की सुरंग के आउटलेट पर भी प्रस्तावित है। लिंक नहर की कुल लंबाई 221 किलोमीटर होगी जिसमें 2 किलोमीटर सुरंग भी शामिल है।

परियोजना का मुख्य उद्देश्य

केन-बेतवा लिंक परियोजना के मुख्य लक्ष्य किसानों के खेतों की प्यास बुझाना है। इससे एमपी-यूपी के लगभग 10 लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी। दोनों राज्यों में तकरीबन 62 लाख लोगों को पीने का पानी दिया जा सकेगा। इस परियोजना से लगभग 100 से ज्यादा मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। वहीं, इससे सूखाग्रस्त बुंदेलखंड के विकास में कृषि और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

किन क्षेत्रों को मिलेगा फायदा?

उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, महोबा और ललितपुर जिलों के लोगों को फायदा पहुंचाएगी। वहीं, मध्य प्रदेश के पन्ना, छतरपुर और टीकमगढ़ जिलों को फायदा मिलेगा। यह सभी जिले बुंदेलखंड क्षेत्र में आते हैं, जो लंबे समय से सूखे की समस्या की मार झेल रहा है। इस सूखे क्षेत्र पानी की उपलब्ध होने से जल संकट का समाधान हो सकेगा। अगर इस परियोजना के लागत की बात की जाए तो इसपर कुल लागत लगभग 45,000 करोड़ रुपये आ सकती है। वहीं, इसके पूरा होने में लगभग 8 साल का समय लग सकता है।


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