सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों पर हुए हमले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने को लेकर सवाल किया है। बुधवार को प्रदर्शनों के दौरान दोपहर से लेकर रात तक, अधिकारियों को बंधक बनाए रखा, जब अधिकारियों को रिहा किया गया तो उनकी गाड़ियों पर पत्थरबाजी भी की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने मालदा के गांव में हुई इस घटना पर कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की ओर से भेजी गई चिट्ठी का भी जिक्र किया, जिसमें न्यायिक अधिकारी, काम करने पहुंचे थे, उन्हें प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया और रोके रखा।
चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिल विपुल पंचोली की अदालत ने स्वत: संज्ञान लेते हुए केस दर्ज किया है। पश्चिम बंगाल की तरफ से SIR से जुड़े मामलों पर पक्ष रखने के लिए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायणन, मेनका गुरुस्वामी पेश हुए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीनियर एडवोकेट दामा शेषाद्री भी चुनाव आयोग की तरफ से पेश हुए। कोर्ट ने तत्कालीन सुनवाई इस मामले पर बुलवाई थी।
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CJI ने क्यों नाराजगी जाहिर की?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि उन्हें तत्काल आदेश पारित करना होगा, जिससे काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा तय हो सके। उन्होंने कहा, '11 बज गए, आपके कलेक्टर तक नहीं आए। मुझे बहुत सख्त आदेश रात में मौखिक रूप से देने पड़े। 5 साल के बच्चे को खाना और पानी नहीं दिया गया।' कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्होंने 'द टेलीग्राफ' की एक रिपोर्ट मामले के विषय में पढ़ी है।
अधिकारियों को फटराक क्यों पड़ी?
मेनका गोस्वामी ने राज्य सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा कि यह प्रदर्शन, गैर राजनीतिक प्रदर्शन था। CJI ने कहा, 'अगर यह प्रदर्शन गैर राजनीतिक था तब नेता लोग क्या कर रहे थे? क्या यह उनका कर्तव्य नहीं था कि घटनास्थल पर जाकर देखें कि हो क्या रहा है? कुछ लोग कानून व्यवस्था अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहे थे। 5 बजे इन लोगों ने अधिकारियों का घेराव कर लिया। आपके कलेक्टर 11 बजे तक, वहां थे ही नहीं।'
अदालत ने क्या निर्देश दिए हैं?
कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों के सुरक्षा का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव आयोग अधिकारियों को सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल दे, जिससे अधिकारी अपना काम पूरा सकें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार सभी जरूरी कदम उठाएं, जिससे प्रक्रिया पूरी की जा सके। पुलिस अधिकारी यह तय करें कि 3 से 5 की संख्या से ज्यादा लोग, जहां काम चल रहा हो, न दाखिल होने पाएं। जिन्हें आपत्ति देनी है, वहां एक बार में 3 से 5 से ज्यादा लोग न जाने पाएं।
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'CBI या NIA को सौंप दें जांच'
सुप्रीम कोर्ट ने ECI को निर्देश दिया है कि CBI या NIA या कोई निष्पक्ष एजेंसी, इस प्रकरण की जांच करे। कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अपील की है कि आदेश से उस विवरण को हटा दिया जाए, जिसमें लिखा गया है, 'कंप्लीट ब्रेकडाउन ऑफ लॉ एंड ऑर्डर' वाला स्टेटमेंट हटा ले। इसके जवाब में सरकार के पक्ष ने कहा कि यह सच है। कपिल सिब्बल ने तर्क दिया है कि यह एक जगह की स्थिति थी, पूरे राज्य की नहीं।
पश्चिम बंगाल सरकार पर भी सख्त सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने कहा, 'ECI को विपक्षी पार्टी की तरह काम नहीं करना चाहिए।' जवाब में CJI ने कहा, 'आप हम पर दबाव दे रहे हैं। दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर कोई सियासी भाषा बोलता है। यही सबसे दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह के ध्रुवीकरण वाला राज्य हमने नहीं देखा था। आपको क्या लगता है कि हम जानते नहीं थे? मैं ही रात में 2 बजे तक, इन सब घठनाओं पर नजर रख रहा था।'