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तुलसीपुर में दो बार सपा को मात, जेबा रिजवान से मिलने पर मजबूर क्यों हुए अखिलेश?

बलरामपुर की तुलसीपुर विधानसभा सीट पर जेबा रिजवान की पकड़ पिछले दो विधानसभा चुनावों में बेहद मजबूत रही है, जिसकी वजह से वह यहां से एक प्रमुख चेहरा बनी हुई हैं।

Zeba rizwan tulsipur seat

सपा प्रमुख के साथ जेबा रिजवान और जहीर रिजवान, Photo Credit: Social Media

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव किसी भी गड़बड़ी और हड़बड़ी से बचने के लिए तैयारी शुरू कर चुके हैं। वह इस बार के चुनाव में हर वह समीकरण को धरातल पर उतारना चाहते हैं, जिससे 2027 में उनकी यूपी में सरकार बन सके। वह पिछले दो बार से बीजेपी और सीएम योगी आदित्यनाथ के हाथों चुनाव हार रहे हैं। इन्हीं दोनों हार से सबक लेते हुए सपा लगातार अपने सफल नारे PDA को बड़ा करने में जुटी हुई है। समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव एक तरफ बीजेपी और योगी सरकार पर लगातार हमले करते उन्हें घेर रहे हैं तो दूसरी तरफ विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों को खड़ा करने के लिए हरी झंड़ी दे रहे हैं।

 

इसी कड़ी में अखिलेश यादव ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में दो नेताओं से मुलाकात की। यह दोनों नेता बलरामपुर से हैं। एक बलरामपुर के पूर्व सांसद हाजी रिजवान जहीर और उनकी बेटी जेबा रिजवान। यह मुलाकार कोई ऐसी ही नहीं थी बल्कि इसमें सपा ने लगभग एक विधानसभा सीट पर अपना प्रत्याशी फाइनल कर लिया।

 

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बात तुलसीपुर विधानसभा सीट की

दरअसल, यह बात बलरामपुर की तुलसीपुर विधानसभा सीट की वजह से सामने आई है। तुलसीपुर सीट ऐसी सीट है जहां से भारतीय जनता पार्टी लगातार दो बार से चुनाव जीत रही है। बीजेपी के कैलाश नाथ शुक्ला यहां से दो बार से विधायक हैं। समाजवादी पार्टी इस सीट पर 2022 और 2017 के चुनावों में हर बार तीसरे नंबर पर रही है और उसे यहां हार का मुंह देखना पड़ा है।

तुलसीपुर में जेबा रिजवान की पकड़

दिलचस्प बात यह है कि तुलसीपुर विधानसभा सीट पर जेबा रिजवान दोनों ही चुनावों में समाजवादी पार्टी से आगे रहते हुए दूसरे नंबर पर रही हैं। यानी कि जेबा को दोनों ही चुनावों में सपा से अधिक वोट मिले हैं। वह सपा की हार में प्रमुख कारक रही हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में तो जेबा रिजवान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरे पायदान पर रहीं, जबकि 2022 के चुनाव में वह निर्दलीय ही दूसरे पायदान पर रही थीं।

 

 

 

2022 का विधानसभा चुनाव

यूपी का 2022 का चुनाव दिलचस्प था। इस चुनाव में पहली बार बीजेपी ने लगातार बंपर जीत हासिल करके दूसरी बार सरकार बनाई। बीजेपी को 403 विधानसभा सीटों में से 255 सीटें मिलीं, जबकि समाजवादी पार्टी 111 सीटे ही जीत सकी। तुलसीपुर विधानसभा सीट की बात करें तो यहां से बीजेपी के कैलाश नाथ शुक्ला ने 35,781 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्हें कुल 87,032 वोट मिले थे और वोट प्रतिशत 42.92 फीसदी थी। दूसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार जेबा रिजवान थीं। जेबा ने 25.27 फीसदी वोट मत हासिल करते हुए 51,251 लोगों का वोट अपने पाले में कर लिया था।

 

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वहीं, समाजवादी पार्टी ने तुलसीपुर से अपने पूर्व विधायक (2012 में जीते) अब्दुल मशूद खान को उम्मीदवार बनाया था। अब्दुल मशूद को 42,815 मिले थे और वह तीसरे नंबर रहे थे। उन्हें 21.11 फीसदी वोट मत मिले थे। इसके अलावा यहां से बीएसपी उम्मीदवार को महज 8,118 और कांग्रेस के उम्मीदवार को 4,171 वोट ही मिले।

2017 का विधानसभा चुनाव

यूपी के 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कैलाश नाथ शुक्ला को 62,296 वोट मिले थे, जबकि उनका मत प्रतिशत लगभग 32 फीसदी रहा थी। कैलाश तुलसीपुर से पहली बार विधायक चुने गए थे। कांग्रेस ने यहां से जेबा रिजवान को अपना उम्मीदवार बनाया था। जेबा ने सपा उम्मीदवार अब्दुल मशूद खान के सामने शानदार चुनाव लड़ते हुए 43,637 वोट हासिल किए थे। जबकि अब्दुल मशूद को इस बार 36,549 वोट मिले। बीएसपी के उम्मीदवार को 23,273 वोट मिले थे।

 

इस तरह से पिछले दो विधानसभा चुनावों में जेबा रिजवान तुलसीपुर सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को पीछे करके दूसरे नंबर पर रही हैं। अगर सपा ने जेबा को अपना उम्मीदवार बनाया होता या उनका समर्थन लिया होता तो यह सीट सपा के पास होती। मंगलवार को सपा प्रमुख से जेबा रिजवान और उनके पिता और सपा के पूर्व सांसद रिजवान जहीर की मुलाकात बताती है कि तुलसीपुर सीट पर अखिलेश यादव ने हरी झंडी दे दी है।


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