परिसीमन बिल को एक बार फिर से संसद में पेश करने की चर्चाएं चल रही हैं। बिल पर समर्थन के लिए मोदी सरकार जरूरी सांसदों का आंकड़ा जुटाने में जुटी हुई है। जरूरी सांसदों का आंकड़ा मिलते ही इसी मानसून सत्र में मोदी सरकार एक बार फिर से परिसीमन बिल को संसद के दोनों सदनों में पेश कर सकती है। ऐसे में तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी दल डीएमके के एनडीए के साथ जाने की अटकलों के बीच कांग्रेस का बड़ा बयान सामने आया है।
शुक्रवार को कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि डीएमके कभी बीजेपी के साथ नहीं जाएगी। इसके पीछे उन्होंने कारण बताते हुए कहा कि डीएमके का बीजेपी के साथ वैचारिक मतभेद है, ऐसे में उसका बीजेपी के साथ जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
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ऐसे स्थितियां बनी क्यों?
दरअसल, यह स्थितियां इसलिए बनी हैं क्योंकि इसी साल आए तमिलनाडु विधानसभा के नतीजों के बाद डीएमके के साथ सालों पुराना गठबंधन छोड़कर कांग्रेस ने
जोसेफ विजय
की नई पार्टी टीवीके का दामन थाम लिया था। साथ ही मुख्यमंत्री विजय की सरकार में भागीदार बन गई थी।
बीजेपी और डीएमके कभी साथ नहीं आ सकते- कांग्रेस
डीएमके-इंडिया गठबंधन के बीच चल रहे इस विवाद के बीच कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, 'बीजेपी और डीएमके कभी साथ नहीं आ सकते क्योंकि उनकी विचारधारा अलग हैं। यह सच है कि डीएमके 8 तारीख को इंडिया गठबंधन की बैठक में मौजूद नहीं थी। आगे देखिए क्या होता है।'
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'हां, हम टीवीके का समर्थन कर रहे हैं'
उन्होंने कहा, 'हां, हम टीवीके का समर्थन कर रहे हैं। विजय सरकार में हमारे दो कैबिनेट मंत्री भी हैं। हम डीएमके सांसदों के संपर्क में हैं और हमारी उनसे बातचीत चल रही है। डीएमके अभी भी एक विपक्षी पार्टी है। वह सत्ताधारी एनडीए का घटक दल नहीं है। मैंने स्टालिन के बयान पढ़े हैं और यह साफ है कि बीजेपी और डीएमके के बीच कोई समझौता नहीं है। मुझे भरोसा है कि जब समय आएगा तो डीएमके परिसीमन बिल के खिलाफ खड़ी होगी।'