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राज्यसभा में भी नई टीम बना रहे राहुल गांधी? नए चेहरों पर दांव के साथ बड़ी तैयारी

कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए जिन उम्मीदवारों को उतारा है उनमें ज्यादातर नेता ऐसे हैं जो लंबे समय से पार्टी के साथ काम कर रहे हैं और राहुल गांधी के करीबी भी हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

बीते कुछ समय में ही कांग्रेस की रणनीति काफी तेजी से बदलती दिखी है। धीरे-धीरे राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के भीतर ही 'अपनी कांग्रेस' बनाने में कामयाब होते दिख रहे हैं। कई राज्यों नेतृत्व का चुनाव हो, संगठन का विस्तार हो या फिर अब राज्यसभा जा रहे नेताओं का चयन हो। ये सब दिखा रहा है कि राहुल गांधी अब जमीनी नेताओं को तरजीह दे रहे हैं और संसद के उच्च सदन में भी समर्पित नेताओं को ही भेज रहे हैं। इसके जरिए वह अपनी टीम बनाते दिख रहे हैं। ऐसा करके वह पार्टी के 'ओल्ड गार्ड्स' को भी किनारे करने में कामयाब हो रहे हैं।

 

तमिलनाडु में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम और यहां तक कि मल्लिकार्जुन खड़गे तक चाहते थे कि द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ ही रहा जाए। इसके उलट, चुनाव के तुरंत बाद राहुल गांधी ने तमिलागा वेट्री कड़गम (TVK) से हाथ मिलाने में देरी नहीं की। केरल में भी राहुल गांधी ने अपने ही बेहद करीबी के सी वेणगोपाल को बजाय वी डी सतीशन को तरजीह दी। इसी तरह पुराने नेता सिद्धारमैया की जगह पर डी के शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर यह साफ कर दिया कि अब वह फैसले तुरंत लेंगे और करीबी रिश्तों के बजाय पार्टी के हित को प्राथमिकता देंगे।

 

राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट दे रही संकेत

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने कुल 7 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नीरज डांगी के अलावा बाकी के पांच नामों को लेकर खूब चर्चा हो रही है। नीरज डांगी और मल्लिकार्जुन अभी भी राज्यसभा सांसद हैं और इनका कार्यकाल खत्म हो रहा है और दोनों को फिर से राज्यसभा भेजा जा रहा है। कांग्रेस ने कर्नाटक से तीन और मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और झारखंड से एक-एक उम्मीदवार उतारे हैं।  

 

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कांग्रेस ने कर्नाटक से मल्लिकार्जुन खड़गे, पवन खेड़ा और मंसूर अली खान को उम्मीदवार बनाया है। मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन, राजस्थान से नीरज डांगी, तमिलनाडु के प्रवीण चक्रवर्ती और झारखंड से प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है।

मजबूत हो रही टीम राहुल?

पवन खेड़ा लंबे समय के कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता है। कई बार ऐसे मौके आए जब उन्हें राज्यसभा नहीं भी भेजा गया लेकिन वह पार्टी के मुद्दों, राहुल गांधी की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों और खुद से सत्ता पक्ष की कमियां खोजकर उजागर करने में मुखर रहे हैं। ऐसे में वह लंबे समय से राहुल गांधी के बेहद विश्वस्त लोगों में शामिल हैं। उनकी भी खूबी यह है कि वह किसी अन्य कैंप के नहीं बल्कि टीम राहुल का ही हिस्सा हैं।

 

कर्नाटक से आने वाले मंसूर अली खान शिक्षाविद हैं। वह 2024 में बेंगलुरु सेंट्रल सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे। सिर्फ 32 हजार वोटों के अंतर से हारे मंसूर लंबे समय से कांग्रेस के साथ काम कर रहे हैं। वह डेटा और सोशल मीडिया के माहिर खिलाड़ी है। केरल और लक्षद्वीप में वह AICC के सेक्रेटरी भी रहे हैं ऐसे में उनके पास संगठन का भी अनुभव है। साथ ही, वह राहुल गांधी के करीबियों में भी शुमार है।

 

लंबे समय से इंतजार हो रहा था कि आखिर मीनाक्षी नटराजन कब राज्यसभा जाएंगी। इस बार उन्हें मध्य प्रदेश से भेजा जा रहा है। वह उस सीट से राज्यसभा जा रही हैं जो दिग्विजय सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद खाली हो रही है। 2009 में मध्य प्रदेश की मंदसौर लोकसभा सीट पर बीजेपी का विजय रथ रोकने वाली मीनाक्षी नटराजन उन नेताओं में शामिल हैं जो राहुल गांधी के बिल्कुल करीबी हैं।

 

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NSUI से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली मीनाक्षी लंबे समय से संगठन में सक्रिय रही हैं। शिक्षा और अन्य सामाजिक मुद्दों पर मुखर मीनाक्षी के लिए संगठन में लंबे समय से आवाज उठ रही थी कि उन्हें राज्यसभा भेजा जाए।

 

नीरज डांगी को फिर से राज्यसभा भेजा जा रहा है। इसकी बड़ी वजह है कि वह मेहनती, लगातार संघर्ष करने वाले और दलितों के मुद्दे उठाने वाले नेता के तौर पर जाने जाते हैं। दो दशक से ज्यादा समय से कांग्रेस में सक्रिय नीरज लगातार तीन बार विधानसभा का चुनाव हारे थे लेकिन ना तो उन्होंने पार्टी को छोड़ा और ना ही पार्टी ने उन्हें।

 

तमिलनाडु में अगर जोसेफ विजय की पार्टी चाहती तो अपना उम्मीदवार उतारती लेकिन उसने यह मौका कांग्रेस को दे दिया। इसकी बड़ी वजह है कि प्रवीण चक्रवर्ती को राज्यसभा भेजा जाना है। BITS पिलानी से पढ़े प्रवीण मनमोहन सिंह सरकार में भी काम कर चुके हैं। कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक प्रवीण चक्रवर्ती ना सिर्फ राहुल गांधी के करीबी हैं बल्कि वह विजय के साथ जाने की वकालत करने वाले नेताओं में भी रहे हैं।

 

इकॉनमी के विशेषज्ञों में शुमार प्रवीण चक्रवर्ती चुनावी अभियान से लेकर कई नीतिगत मामलों में भी राहुल गांधी को सलाह देते रहे हैं। कांग्रेस में डेटा एनालटिक्स विभाग की अगुवाई कर चुके प्रवीण चुनावों में भी डेटा के दम पर अहम दखल रखते हैं। विजय के साथ उनकी करीबी के चलते ही टीवीके ने यह सीट कांग्रेस को दे दी।

 

आखिरी नाम प्रणव झा का है जिन्हें झारखंड से उम्मीदवार बनाया गया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि झारखंड में क्रॉस वोटिंग हो सकती है। फिर भी कांग्रेस ने ऐसे नेता को मैदान में उतारा है जो अब तक पर्दे के पीछे से रणनीति बनाने का काम करते रहे हैं। संगठन में लंबे समय से काम कर रहे प्रणव झा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हैं और वह मीडिया प्रबंधन और संगठन के समन्वय का काम बखूबी देख रहे हैं।

क्या संकेत दे रहे राहुल गांधी?

 

पार्टी के सातों उम्मीदवारों को देखें तो सभी लंबे समय से कांग्रेस के प्रति वफादार हैं। हार और जीत दोनों ही स्थिति में राहुल गांधी और कांग्रेस संगठन के साथ काम करते रहे हैं और मुश्किल वक्त में भी पार्टी के लिए भरोसेमंद साबित हुए हैं। ज्यादातर नेता अच्छे-खासे पढ़े-लिखे, पार्टी की विचारधारा के प्रति समर्पित, लगातार मेहनत करने वाले और फुल टाइम राजनीति करने वाले हैं। ऐसे में राहुल गांधी इन नेताओं के जरिए संसद में अपना अजेंडा और मजबूत करना चाहते हैं।


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