जमीनों के अधिकारों को लेकर सरकार को चुनौती देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता प्रणब डोले की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई है। कांग्रेस ने कहा है कि प्रणब डोले को जमानत मिलने के बावजूद नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत उन्हें हिरासत में लिया जाना गलत है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसे रोकथाम वाले कानूनों का साफ दुरुपयोग बताया है। प्रणब डोले काजीरंगा नेशनल पार्क के पास प्रस्तावित लग्जरी होटल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने ग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन कमिटी के संयोजक के रूप में स्थानीय लोगों के हक की आवाज उठाई।
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जमानत के बाद भी हिरासत में हैं प्रणब डोले
प्रणब डोले 12 जुलाई को गिरफ्तार हुए थे। 29 जुलाई को गोलाघाट सेशंस कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, लेकिन अगले ही दिन 30 जुलाई को NSA लगाकर फिर हिरासत में ले लिया गया। जयराम रमेश ने कहा कि स्थानीय आदिवासी लोग 2022 से इस होटल प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं।
कांग्रेस की चिंता क्या है?
जयराम रमेश ने कहा है कि उनकी जमीन जबरन ली गई। कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा था कि पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी लोगों की आजीविका के मामले में आपराधिक कानून का इस्तेमाल उनकी चिंताओं को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए।
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प्रणब डोले पर क्या-क्या आरोप लगे हैं?
NSA आदेश में प्रणब डोले पर विदेशी फंडिंग लेने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। इसमें उनके स्पेन, इटली, थाईलैंड, नॉर्वे समेत कई देशों के दौरे भी बताए गए हैं। जयराम रमेश ने इसे मोदी सरकार की पुराना स्क्रिप्ट बताई है और कहा है कि बीजेपी सरकारें असहमति की आवाज को दबाने के लिए ऐसे सख्त कानूनों का इस्तेमाल कर रही हैं।
कांग्रेस क्यों घेर रही है?
कांग्रेस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहले भी कह चुके हैं कि जमानत मिलने के बाद NSA जैसे कानूनों का इस्तेमाल करके किसी को ज्यादा समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। पार्टी का आरोप है कि असम सरकार नियम कानून की अवहेलना कर रही है।