उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठन विस्तार को लेकर सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद अब सभी की निगाहें नई प्रदेश टीम पर टिकी हैं लेकिन दिल्ली और लखनऊ में पांच दौर की बैठकों के बावजूद संगठन के करीब 45 पदाधिकारियों के नामों पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। पार्टी के अंदर चल रहे मंथन से साफ है कि बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के गठन में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहती।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश संगठन को लेकर दिल्ली में राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। वहीं लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी विस्तृत चर्चा हुई है। संगठन विस्तार के मुद्दे पर दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की राय भी ली गई है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान दोनों नेताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों को लेकर फीडबैक दिया है।
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पूर्वांचल और पश्चिम के नेताओं पर अटका मामला
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय संतुलन की है। पार्टी नेतृत्व पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, अवध, ब्रज और बुंदेलखंड के नेताओं को उचित प्रतिनिधित्व देना चाहता है। हालांकि, कुछ प्रमुख चेहरों को लेकर अभी तक पूरी सहमति नहीं बन पाई है। सूत्रों का कहना है कि पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कुछ नेताओं के नामों पर प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के बीच अलग-अलग राय सामने आई है। यही वजह है कि संगठन विस्तार की घोषणा लगातार टल रही है। पार्टी किसी भी क्षेत्र में उपेक्षा का संदेश नहीं देना चाहती क्योंकि 2027 के चुनाव में क्षेत्रीय समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
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संघ से जुड़े नेताओं को मिल सकती है अहम जिम्मेदारी
संगठन विस्तार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि संघ पृष्ठभूमि से जुड़े और लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को इस बार बड़ी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि चुनावी वर्ष के करीब पहुंचते समय ऐसे नेताओं की जरूरत है जिनकी पकड़ बूथ स्तर तक हो और जो संगठनात्मक ढांचे को मजबूत कर सकें। इसी कारण कई नामों पर संघ और बीजेपी नेतृत्व के बीच लगातार विचार-विमर्श चल रहा है।
सामाजिक समीकरण भी बना चुनौती
केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन भी संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभा रहा है। बीजेपी नई टीम में ब्राह्मण, ठाकुर, ओबीसी, दलित, महिला और युवा चेहरों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना चाहती है। पार्टी की कोशिश है कि संगठन की नई टीम 2027 के चुनावी सामाजिक समीकरणों का भी संदेश दे।