मध्य प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के कैंसर से पीड़ित होने का आरोप लगाया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है। अधिकारियों को सरकार और विधायकों के इशारे पर भ्रष्टाचार करना पड़ रहा है। एक लाख में बाल्टी और डस्टबिन खरीदे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार इतना फैल गया है कि निकाय चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस की ही सरकार होनी चाहिए।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया है कि सरकारी विभाग ने बाल्टी, फिनाइल और बल्ब की महंगी खरीद की है, जिससे ज्यादा से ज्यादा पैसों का सरकारी गबन किया जा सके। इन शिकायतों पर अपर मुख्य सचिव ने 392 अधिकारियों पर कार्रवाई की है।
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'36 हजार रुपये की फिनाइल, 11 हजार का बल्ब'
मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नगरीय निकायों की खरीद में गड़बड़ी को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक सभा में दावा किया कि एक लाख रुपये की बाल्टी, 36 हजार रुपये की फिनाइल की बोतल और 11 हजार रुपये का बल्ब खरीदा गया।
यह मामला ऐसे समय उठा है, जब अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने बताया कि खरीद में अनियमितता के मामलों में 392 अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। इनमें 135 मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) भी शामिल हैं।
नेताओं के कहे बिना कैसे होगा स्कैम?
जीतू पटवारी ने दावा किया है कि भ्रष्टाचार मध्य प्रदेश की जड़ों तक पहुंच गया है। उन्होंने अपर मुख्य सचिव के बयान का जिक्र करते हुए 365 लोगों पर कार्रवाई की बात कही। इस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या बिना नेताओं के कहे अधिकारी चोरी कर सकते हैं। जीतू पटवारी ने यह भी पूछा कि क्या बिना विधायक के कहे पुलिसकर्मी रेत का डंपर चला सकता है।
जीटू पटवारी ने लोगों से सरपंच, विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री के पद पर कांग्रेस के उम्मीदवारों को चुनने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री पद के लिए
राहुल गांधी
का नाम लिया। उन्होंने कहा कि अब सरकार इस कदर भ्रष्टाचार में लिप्त है कि निकाय चुनावों से लेकर संसद तक, सरकार कांग्रेस की होनी चाहिए।
सफाई में क्या कह रही है सरकार?
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने घोटाले पर कहा कि 7 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। 80 से ज्यादा ठेकेदारों और सप्लायरों पर भी कार्रवाई हुई है। अनियमित भुगतान के मामलों में अधिकारियों और कर्मचारियों से तीन से चार करोड़ रुपये की वसूली की गई है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई गड़बड़ी और लापरवाही की गंभीरता के हिसाब से की गई है। लोगों के खिलाफ कार्रवाई अभी जारी है।
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कैसे खुला यह घोटाला?
अपर मुख्य सचिव संजय दुबे विभागीय समीक्षा की बैठक कर रहे थे। उन्होंने नगर निगमों के अधिकारियों की ओर से खरीदे गए सामानों के भुगतान में भारी अंतर को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सवाल किया तो अधिकारी जवाब तक नहीं दे सके। कुछ दिन पहले इसका वीडियो सामने आया था। अपर मुख्य सचिव संजय दुबे अधिकारियों को चेतावनी देते नजर आ रहे थे कि खरीद में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अब विपक्ष ने इसे मुद्दा बना दिया है।
मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अंशुमान राज ने बैठक में प्रस्तुति दी। 374 नगरीय निकायों ने तीन साल में सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) से करीब 1,134 करोड़ रुपये की खरीद की। अनुमान है कि औसत दाम पर खरीद होती तो करीब 250 करोड़ रुपये बच सकते थे।
किन-किन मुश्किलों से जूझ रही है मोहन सरकार?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद कांग्रेस के निशाने पर है। कांग्रेस ने उनके खिलाफ उज्जैन में कथित जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। अक्सर इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सरकार घेरती रही है। कांग्रेस ने सरकार से व्हाइट पेपर जारी करने, सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में जांच कराने और जांच पूरी होने तक यादव के इस्तीफे की मांग की है।
कांग्रेस इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट को लेकर मोहन यादव सरकार को घेरती रहती है। रिपोर्ट में दावा किया गया है था कि मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और रियल एस्टेट कंपनियों ने दो साल में उज्जैन में करीब 137 प्लॉट करीब 45 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।
ज्यादातर नई सड़क परियोजनाओं और मास्टर प्लान में कृषि से आवासीय और व्यावसायिक लैंड यूज बदले गए इलाकों के पास हैं। बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट में है। नगर निगम में हुए भ्रष्टाचार की वजह से मोहन सरकार अब विपक्ष के निशाने पर है।