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उज्जैन में CM मोहन यादव के परिवार ने खरीदी 168 एकड़ जमीन, बवाल क्यों मचा?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का परिवार पहले भी रियल स्टेट के बिजनेस में रहा है। मुख्यमंत्री बनने से पहले ही उनके परिवार के पास 108 प्लॉट उज्जैन में थे।

Mohan Yadav

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव। Photo Credit: MohanYadav/FB

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों के सौदे पर सवाल उठ रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिसंबर 2023 के बाद से उज्जैन में कम से कम 137 प्लॉट्स खरीदे गए हैं। ये प्लॉट करीब 168 एकड़ जमीन में खरीदे गए हैं, जिनकी कीमत 45 करोड़ रुपये के आसपास है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये जमीनें ज्यादातर उन इलाकों में हैं, जहां सरकार ने नई सड़कें बनाई हैं या मास्टर प्लान 2035 के तहत कृषि भूमि को रिहायशी-कॉमर्शियल बनाने का फैसला किया है। मोहन यादव 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बने थे। उसके बाद उनके परिवार ने जमीन खरीदने का सिलसिला तेज कर दिया। 

 

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परिवार में कौन खरीद रहा जमीनें?

खरीदारों में मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव, बेटे वैभव की पत्नी शालिनी यादव, भाई नंदलाल और नारायण यादव, नारायण की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव और चचेरे भाई गोविंद और नीलेश यादव शामिल हैं। ये खरीदारी या तो सीधे उनके नाम पर हुई या परिवार की चार रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए हुई।

रिपोर्ट में क्या खुलासे हुए हैं?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन 168 एकड़ में से 111 एकड़ जमीन नई सड़क परियोजनाओं के पास है। इनमें गंगेड़ी, कराड़िया-नवखेड़ा, करोंदिया, जयवंतपुरा, चंदेसरा और उनहेल जैसे इलाके शामिल हैं।

कहां-कहां खरीदी गई हैं जमीनें?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गंगेड़ी में अप्रैल 2024 से 51 एकड़ जमीन 38 प्लॉट्स में खरीदी गई, जो उज्जैन-बड़नगर और उज्जैन-इंदौर हाइवे के जंक्शन के पास है। उज्जैन मास्टर प्लान 2035 में कई जगहों पर भूमि उपयोग बदलने का प्रावधान है। परिवार ने इनमें से कई इलाकों में भी जमीन खरीदी है। पांड्याखेड़ी में 18 एकड़ जमीन खरीदी गई, जिसे मास्टर प्लान में कमर्शियल जोन बनाया गया है। इससे पहले मार्च-अप्रैल 2023 में सावराखेड़ी में 30 एकड़ जमीन खरीदी गई थी।

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CM बनने से पहले भी परिवार के पास थे 108 प्लॉट

मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले भी परिवार के पास उज्जैन के आसपास 108 प्लॉट्स यानी 179 एकड़ जमीन थी। इसमें से 85 एकड़ 2021-2023 के बीच खरीदी गई थी, जब मोहन यादव शिक्षा मंत्री थे। 2025 में अकेले परिवार ने 62 प्लॉट्स यानी 92 एकड़ जमीन खरीदी। परिवार के कुछ प्लॉट्स बाद में बेचे भी गए। सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम पर मोहन और सीमा यादव के पास 39.5 एकड़ जमीन थी, जिसमें से 12 एकड़ सितंबर 2024 में चचेरे भाई नीलेश यादव को बेच दिए गए। 

क्या कह रहा है मोहन यादव का परिवार?

इंडियन एक्सप्रेस में दावा किया गया है कि जब मोहन यादव के कार्यालय से संपर्क किया गया तो उधर से कोई जवाब नहीं मिला। कुछ स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि मुख्यमंत्री के परिवार के कारोबार को उनके पद से जोड़ना उचित नहीं है। मोहन यादव का विस्तारित परिवार काफी समय से रियल एस्टेट के कारोबार में है।


मोहन यादव के चचेरे भाई गोविंद यादव के बेटे अनंत यादव ने कहा कि उनका परिवार 2010 से रियल एस्टेट में है। गंगेड़ी की जमीन 2020 में खरीदने के समझौते हुए थे, जबकि हाइवे का काम 2019 में मंजूर हुआ था। उनका कहना है कि देश का आम नागरिक होने की वजह से उन्हें जमीन खरीदने, विकसित करने या बेचने का पूरा अधिकार है।

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हाउसिंग प्रोजेक्ट भी बना रहा मोहन यादव का परिवार

मोहन यादव का परिवार अब इन जमीनों पर हाउसिंग प्रोजेक्ट भी विकसित कर रहा है। गोविंद यादव और उनके साथियों ने गंगेड़ी में 41 एकड़ जमीन खरीदकर इंदौर के शांति महालोक बिल्डर्स को विकास के लिए दिया। नीलेश यादव 'सावरिया' ब्रांड के तहत चार नए हाउसिंग प्रोजेक्ट चला रहे हैं, जिन्हें MP RERA में रजिस्टर किया गया है।

 

 

लोग क्या कह रहे हैं?

ज्यादातर लोगों ने लिखा है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर उनके परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाने का गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व से लोग, मोहन यादव का इस्तीफा मांग रहे हैं।

 


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