झारखंड के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार की चर्चा खूब हो रही है। हर तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ही जीतती दिख रही है लेकिन कर्नाटक में बीजेपी को तगड़ा झटका लगा है। यह झटका हाल ही में मुख्यमंत्री बने डी के शिवकुमार ने विधान परिषद चुनाव में दिया है। कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस 4 ही जीत सकती थी लेकिन उसने पांचवी सीट जीतकर बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) के होश उड़ा दिए हैं। अब बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि वे क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। उधर कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदले जाने के बाद कई नेताओं ने बगावती सुर अलापने की शुरुआत कर दी थी। मुख्यमंत्री बदलने के साथ ही कांग्रेस ने कर्नाटक में प्रदेश अध्यक्ष भी बदला था। अभी तक यह पद डीके शिवकुमार के पास था लेकिन जब वह मुख्यमंत्री बन गए तो बी के हरिप्रसाद को कर्नाटक कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया। इस जोड़ी की पहली बड़ी परीक्षा यह विधान परिषद चुनाव ही था। क्राइसिस मैनेजमेंट के लिए मशहूर डीके शिवकुमार ने इस बार विपक्षी खेमे में क्राइसिस पैदा कर दिया और अपने पांचवे उम्मीदवार को भी आसानी से जिताने में कामयाब हो गए।
कहां हुआ खेल?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि कांग्रेस के 135 विधायक हैं लेकिन उसके उम्मीदवारों को 151 वोट मिले। वहीं, बीजेपी के उम्मीदवार को 7 वोट कम मिले और जनता दल (सेक्युलर)के उम्मीदवार को 18 के बजाय 14 वोट ही मिले। रणदीप सुरजेवाला का यह दावा और कांग्रेस की जीत यह दिखाती है कि जबरदस्त तरीके से क्रॉस वोटिंग हुई और डीके शिवकुमार की अगुवाई में कांग्रेस इसका फायदा उठाने में कामयाब रही।
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पूरा गणित ऐसे समझिए कि कर्नाटक विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या 224 है लेकिन मौजूदा समय में दो सीटें खाली हैं। एक विधायक का निधन हो चुका है और दूसरे को एक मामला में सजा हो जाने के चलते उनकी सदस्यता खत्म हो गई है। इस 224 में बीजेपी के 64 और उसकी सहयोगी JDS के 18 विधायक हैं। कांग्रेस के पास खुद के 135 विधायक हैं। तीन निर्दलीय विधायक और बीजेपी से निकाले जा चुके दो विधायक एस टी सोमशेखर और शिवराम हेब्बार भी कांग्रेस के साथ हैं। यानी कांग्रेस को मिलने थे कुल 140 वोट। अब कांग्रेस को मिले हैं 151 वोट। इसी ने खलबली मचा दी है।
MLC चुनाव का गणित
इस विधान परिषद चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 28 वोट की जरूरत थी। 7 सीटों पर उम्मीदवार 8 उतरे थे। कांग्रेस अपने दम पर 4 सीटें जीत सकती थी लेकिन उसने पाँचवाँ उम्मीदवार भी उतारा था। उधर बीजेपी ने दो और जेडीएस ने एक उम्मीदवार उतारा था। इसमें से कांग्रेस के 5 और बीजेपी के दो उम्मीदवारों की जीत हुई है जबकि जेडीएस के गोविंद राजू चुनाव हार गए हैं।
बीजेपी के दो उम्मीदवारों को 30-30 वोट आवंटित किए गए थे लेकिन एक उम्मीदवार को 29 और दूसरे को 27 वोट ही मिले। यानी 4 वोट तो यही कम हो गए। जेडीएस के उम्मीदवार को अपने 18 विधायकों को अलावा बीजेपी के 4 विधायकों के यानी कम से 22 वोट मिलने थे और उसे कुछ क्रॉस वोटिंग का भी सहारा था। हालांकि, यहीं मामला उल्टा पड़ गया। जेडीएस के उम्मीदवार को सिर्फ 14 वोट मिले यानी अपने कुल विधायकों की संख्या से भी 4 कम। इसका मतलब है कि या तो जेडीएस उम्मीदवार को खुद उसके ही विधायकों ने वोट नहीं दिया या फिर बीजेपी के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी।
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यही इशारा रणदीप सुरजेवाला ने किया है। बीजेपी उम्मीदवारों को 4 वोट कम मिले हैं। जेडीएस उम्मीदवार को भी 4 वोट कम मिले जबकि दोनों को मिलाकर 7 और वोट मिलने चाहिए थे। वहीं, कांग्रेस को कुल 11 वोट ज्यादा मिले हैं। ऐसे में यह तय है कि क्रॉस वोटिंग हुई है। यही वजह है कि अब कर्नाटक बीजेपी के नेता यह कह रहे हैं कि अब क्रॉस वोटिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
क्या बोली बीजेपी?
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि क्रॉस वोटिंग तो हुई है और वह इसका पता भी लगाएंगे। उन्होंने कहा, 'हमने रघु कौटिल्य को 31 वोट आवंटित किए थे। उन्हें 27 ही मिले और एक वोट अमान्य हुआ। हमने लिंगराज पाटिल को 30 वोट आवंटित किए थे, उन्हें 29 ही मिले। हमने 4 वोट जेडीएस उम्मीदवार आवंटित किए थे।'
वहीं, कांग्रेस ने अपने 4 उम्मीदवारों को 28-28 वोट ही आवंटित किए थे। इसके बावजूद पी वी मोहन को 29 वोट मिले। वहीं, कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद, टी कुमकानूर और शिवन्ना मालवल्ली को 30-30 वोट मिले। इस तरह उसके 119 वोट तो इन्हीं 4 उम्मीदवारों पर खर्च हो गए। पांचवें उम्मीदवार विनय कार्तिक को मिले 32 वोटों ने हर किसी को हैरान कर दिया।
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इसे कर्नाटक में डीके शिवकुमार और बी के हरिप्रसाद की नई जोड़ी की कामयाबी माना जा रहा है। तमाम विधायकों और मंत्रियों की कथित नाराजगी के बावजूद डीके शिवकुमार और कांग्रेस ना सिर्फ अपने विधायकों को एकजुट रखने में कामयाब रहे बल्कि विपक्षी खेमे में भी जबरदस्त सेंध लगा दी। इस क्रॉस वोटिंग से बीजेपी हैरान है और जेडीएस को भी अपने कुनबे में झांकने की जरूरत महसूस हो रही है।