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चुनाव कैसे जीतेंगे? अस्तित्व में नहीं रही INDIA गठबंधन की समन्वय समिति

विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के मकसद से तीन साल पहले इंडिया गठबंधन का गठन हुआ और इस गठबंध को आगे बढ़ाने के लिए समन्वय समिति बनाई गई थी।

India alliance Coordination Committee

इंडिया गठबंधन समन्वय समिति। Photo Credit- PTI

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इंडिया गठबंधन की स्थापना 18 जुलाई 2023 को कर्नाटक की राजधानी बैंगलुरु में हुई थी। यह गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को केंद्र की सत्ता में आने से रोकने के लिए बनाया गया था। दो साल पहले हुए चुनाव में यह गठबंधन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए सरकार को आने देने से तो नहीं रोक पाया लेकिन, बीजेपी को कमजोर जरूर किया। जो बीजेपी 400 पार सीटें जीतने का दावे किया करती थी, उस नारे की हवा निकालते हुए गठबंधन से उसे 240 पर लाकर रोक दिया। इसी के साथ बीजेपी अकेले दम पर बहुमत के आंकड़े से दूर रही।

 

यही इंडिया गठबंधन की कामयाबी के तौर पर देखा गया। मगर, इंडिया गठबंधन बनने के बाद इसके सर्वोच्च इकाई बनाई गई, जो 'समन्वय समिति' के नाम से अस्तित्व में आई। इंडिया गठबंधन में जो भी बड़े फैसले लिए जाते वह सभी इसी समन्वय समिति में पास किए जाते थे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इंडिया गठबंधन की यह समन्वय समिति अब कहां हैं?

गठबंधन ने बनाई समन्वय समिति 

दरअसल, विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने के मकसद से तीन साल पहले इंडिया गठबंधन का गठन हुआ और इस गठबंध को आगे बढ़ाने के लिए समन्वय समिति बनाई गई थी। अब यही समन्वय समिति निष्क्रिय हो चुकी है। हालांकि यह इंडिया गठबंधन राजनीतिक बिखराव और टकराव के बावजूद वजूद में है।

 

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पहली बैठक 13 सितंबर, 2023 को

गठबंधन की 14 सदस्यों वाली समन्वय समिति की पहली बैठक 13 सितंबर, 2023 को हुई थी। उस समय इसे गठबंधन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था के रूप में देखा गया था। हालांकि, वह समिति की आखिरी बैठक भी साबित हुई। तीन साल बाद समन्वय समिति अस्तित्व में नहीं है और इसके मूल सदस्यों में से दो अब बीजेपी के खेमे में हैं। जेडीयू और आरएलडी। इस साल राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय बहाल करने का प्रयास जरूर किया गया।

 

बीते आठ जून को इस गठबंधन के घटक दलों के नेताओं ने दो साल से ज्यादा समय में पहली बड़ी औपचारिक बैठक की थी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने घोषणा की थी कि अब गठबंधन के दल हर दो महीने में बैठक करेंगे। इस साल, अगस्त में हैदराबाद में बैठक का सुझाव दिया गया था, लेकिन वह बैठक अभी तक नहीं हो सकी है। विपक्ष के कई दलों और नेताओं को कांग्रेस द्वारा बैठक की तारीख तय करने का इंतजार है। हालांकि, हैदराबाद में प्रस्तावित बैठक क्यों नहीं हो सकी, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। 

दलों के आपसी संबंधों में बदलाव

इस बीच गठबंधन बनाने वाले दलों के आपसी संबंधों में भी बदलाव देखने को मिला है। इंडिया गठबंधन में शामिल दलों में समन्वय की कमी लगातार कम होती जा रही है। इसकी वजह से अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इन राज्यों में कहीं दल सहयोगी हैं, कहीं प्रतिद्वंद्वी और कहीं संभावित साझेदार।

 

पिछले साल गठबंधन से अलग हुई आम आदमी पार्टी (आप) की पंजाब में कांग्रेस के साथ लड़ाई लगातार तीखी होती जा रही है। बीते रविवार को आम आदमी पार्टी ने गोवा में गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेस विकल्प पेश करने के लिए गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ गठबंधन कर लिया है। पार्टी गुजरात में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है। जहां राज्यवार रणनीति ने चुनावी तौर पर काम किया है, वहां भी मतभेद उभर आए हैं।

 

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कहीं अच्छे को कहीं खराब हुए रिश्ते

झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस-राष्ट्रीय जनता दल गठबंधन ने 2024 में आसानी से सत्ता बरकरार रखी, जबकि जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। झारखंड में कांग्रेस के नेता सरकार में प्रतिनिधित्व और JMM के साथ समन्वय को लेकर अक्सर शिकायत करते रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ कांग्रेस के रिश्ते खराब हुए हैं।

 

इस महीने दोनों दलों के मतभेद उस समय फिर खुलकर सामने आए जब कांग्रेस ने सरकार समर्थित एक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाए जाने पर आपत्ति जताई। इसके जवाब में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस पर पलटवार किया। तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) का गठबंधन इंडिया गठबंधन के सबसे टिकाऊ राज्य स्तरीय गठबंधनों में से एक था और 2024 के लोकसभा चुनाव में गठबंधन के प्रदर्शन में उसका महत्वपूर्ण योगदान रहा था। 

DMK से अलग होकर टीवीके का थामा हाथ

हालांकि, 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस DMK के नेतृत्व वाले मोर्चे से अलग हो गई और सत्तारूढ़ टीवीके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल हो गई। सितंबर 2023 में मुंबई में हुई बैठक में गठबंधन के 13 सदस्यों को 14 सदस्यीय समन्वय समिति में शामिल किया गया था। एक सीट माकपा के लिए रखी गई थी, लेकिन उसने अपना प्रतिनिधि नामित नहीं किया।

समन्वय समिति में कौन थे?

समन्वय समिति में कांग्रेस की ओर से केसी वेणुगोपाल, तत्कालीन अविभाजित NCP से शरद पवार, DMK से टीआर बालू, JMM से हेमंत सोरेन , शिवसेना (UBT) से संजय राउत, आरजेडी से तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस से अभिषेक बनर्जी, आप से राघव चड्ढा , जो बाद में बीजेपी में शामिल हो गए, समाजवादी पार्टी से जावेद अली खान, जनता दल (यूनाइटेड) से ललन सिंह, जो 2024 में बीजेपी नीत एनडीए में लौट गए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से डी राजा, नेशनल कॉन्फ्रेंस से उमर अब्दुल्ला और पीडीपी से महबूबा मुफ्ती शामिल थे। अब जद(यू), द्रमुक और आम आदमी पार्टी इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।


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