मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रोचक बना दिया है। बीजेपी ने अब तीसरी सीट के लिए भी अपना उम्मीदवार उतार दिया है। इसका मतलब यह है कि अब तक जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रही कांग्रेस के लिए मुश्किल होने वाली है। कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन अब मुश्किल में दिख रही हैं और अब जीत के लिए कांग्रेस को एक-एक वोट पर मशक्कत करनी पड़ रही है। बीजेपी ने मध्य प्रदेश से महेश केवट के साथ-साथ कर्नाटक से डॉ. एम नागराज को अपना उम्मीदवार बनाया है।
इसी के साथ बीजेपी ने कर्नाटक विधान परिषद की दो सीटों के लिए भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बीजेपी ने लिंगराज पाटिल और रघु कौटिल्य को अपना उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, कर्नाटक में कुल 4 सीटों पर चुनाव हैं। कांग्रेस ने 3 तो बीजेपी ने एक उम्मीदवार उतारा है, ऐसे में चारों उम्मीदवारों का चुना जाना तय है। कर्नाटक की सीटें एन कोरागप्पा, इरन्ना कडाडी, एचडी देवगौड़ा और मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल खत्म होने से खाली हो रही हैं। इसमें से मल्लिकार्जुन खड़गे एक बार फिर से राज्यसभा के उम्मीदवार हैं।
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मध्य प्रदेश का गणित
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कुल सीटों पर चुनाव होने हैं। ये सीटें जॉर्ज कुरियन, दिग्वजिय सिंह और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल खत्म होने के चलते खाली हो रही हैं। बीजेपी ने इससे पहले तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को अपना उम्मीदवार बनाया था और कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उतारा था। मीनाक्षी नटराजन के नाम का एलान होते ही विरोध शुरू हो गया था और तभी यह लगने लगा था कि अब बीजेपी इस फूट का फायदा उठाएगी और वह अपना तीसरा उम्मीदवार भी उतार सकती है।
मध्य प्रदेश में कुल विधानसभा सीटों की संख्या 230 है। फिलहाल दो विधायक वोट नहीं डाल सकते इसलिए एक राज्यसभा सीट के लिए कुल 58 वोट चाहिए। बीजेपी के पास कुल 164 विधायक हैं। कांग्रेस के पास 64 और एक विधायक अन्य पार्टी का है। इस संख्या के हिसाब से तो दो सीट बीजेपी को और एक कांग्रेस को मिल सकती है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से क्रॉस वोटिंग की चर्चा है।
बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार को अगर जीतने है तो उसे कम से कम 10 कांग्रेसी विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी ने संभवत: ऐसा ही भरोसा मिलने के बाद ही अपना तीसरा उम्मीदवार उतारा है। अब यह देखना रोचक होगा
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महेश केवट और मीनाक्षी नटराजन कौन हैं?
लंबे समय से कांग्रेस में काम कर रही मीनाक्षी नटराजन मध्य प्रदेश की ही मंदसौर लोकसभा सीट से एक बार सांसद रह चुकी हैं। वह कांग्रेस के संगठन में काम करने वाली प्रमुख नेताओं में से एक हैं और राहुल गांधी की करीबी नेताओं में गिनी जाती हैं।
वहीं, मेहश केवट मध्य प्रदेश प्रदेश राज्य मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड के अध्यक्ष हैं। इस बोर्ड के अध्यक्ष का दर्जा कैबिनेट मंत्री के बराबर का है। साल 2022 के नगर परिषद अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग करने के चलते उन्हें बीजेपी से निकाल भी दिया गया था। हालांकि, बाद में वह फिर से बीजेपी में आ गए।