जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की मांग पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार को सम्मान देना ही है तो सिर्फ पद्म भूषण क्यों उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए या देश का राष्ट्रपति बना देना चाहिए। उमर ने यह टिप्पणी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (
SIR
) को लेकर चल रहे विवाद के बीच की है।
उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचित में कहा कि चुनाव आयोग को अपने कामकाज पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की ओर से चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों की वजह है। उमर ने इस दौरान द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट का भी जिक्र किया जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति जताने की बात कही गई थी।
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उमर अब्दुल्ला का पूरा बयान
मीडिया से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग (ECI) के खिलाफ हैं और ऐसा बिना किसी वजह के नहीं हो रहा है। किसी राजनीतिक दल ने सबूत पेश नहीं किए, बल्कि एक अखबार ने ये सबूत सामने रखे हैं।'
उमर अब्दुल्ला ने आगे कहा, 'पद्म भूषण तक ही क्यों रुकना? ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाना चाहिए या फिर देश का राष्ट्रपति बना देना चाहिए, राष्ट्रपति चुनाव में अब सिर्फ दो साल बचे हैं। उन्होंने BJP के लिए इतना कुछ किया है पूरा पश्चिम बंगाल ही BJP को सौंप दिया।'
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बंगाल BJP अध्यक्ष ने की थी पद्म भूषण की मांग
दरअसल, पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने 25 सितंबर को CEC ज्ञानेश कुमार को कम से कम पद्म भूषण दिए जाने की बात कही थी। उन्होंने पश्चिम बंगाल विदानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका की तारीफ की थी। भट्टाचार्य ने दावा किया था कि चुनाव के दौरान लोगों को बिना डर के वोट डालने का मौका मिला और मतदाता सूची में भी बदलाव किए गए। उन्होंने SIR के तहत मतदाता सूची से मृत, फर्जी और कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी मतदाताओं के नाम हटाने का भी श्रेय ज्ञानेश कुमार को दिया था।