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यूपी बीजेपी में बाहरी ब्राह्मण नेताओं का बोलबाला, साइडलाइन हैं कोर नेता

उत्तर प्रदेश बीजेपी में एक आम धारणा बनती जा रही है कि पार्टी में बाहरी ब्राह्मण नेताओं का बोलबाला है, जबकि बीजेपी के कोर नेता जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं वह साइडलाइन हैं।

UP BJP Brahmin leaders

मनोज पांडेय, ब्रजेश पाठक और जितिन प्रसाद।

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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां लगभग शुरू हो चुकी हैं। यहां वर्तमान की दोनों मुख्य पार्टियां बीजेपी और समाजवादी पार्टी विकास के मुद्दों के अलावा जातियों पर विशेष नजर गड़ाए हुए हैं। बीजेपी यूपी की सत्ता में तीसरी बार आने के लिए अपने कोर वोटर को मजबूती से पकड़कर रखना चाहती है। यही वजह है कि भगवा पार्टी झट-पट में नाराज ब्राह्मण और राजपूत नेताओं को मना ले रही है। साथ ही इन जातियों के नेताओं पर खासा ध्यान दे रही है क्योंकि इन्हीं दोनों जातियों पर समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव की नजर है। 

 

इसी महीने 10 मई को योगी आदित्यनाथ सरकार कैबिनेट का विस्तार किया गया। 6 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस कैबिनेट का विस्तार को आगामी चुनाव के मद्देनजर अहम माना जा रहा है। इन 6 विधायकों में जिसकी सबसे अधिक चर्चा रही वह सपा से बीजेपी में शामिल हुए मनोज पांडेय हैं। मनोज पांडेय को योगी सरकार में खाद्य, रसद और नागरिक आपूर्ति विभाग सौंपा गया है। उनके नाम से तय हो गया कि बीजेपी यूपी सरकार में तमाम ब्राह्मण मंत्रियों के अलावा भी ब्राह्मण समाज को तवज्जो देगी। योगी सरकार पर विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि बीजेपी सरकार में उन्हें उचित सम्मान नहीं मिलता।

 

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बाहरी ब्राह्मण नेताओं का बोलबाला 

मनोज पांडेय के योगी सरकार में मंत्री बनते ही एक चर्चा आम है कि यूपी बीजेपी में बाहरी ब्राह्मण नेताओं का बोलबाला है, जबकि बीजेपी के कोर नेता जो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं वह साइडलाइन हैं। बीजेपी के जो पुराने ब्राह्मण नेता हैं या तो विशुद्ध भाजपाई हैं वे नेता मुख्य धारा से साइडलाइन हैं। दरअसल, मनोज पांडेय कोई पहले नेता नहीं हैं जो दूसरी पार्टी से आकर सरकार में झट से बड़ा पद पा गए।

अंदर के ब्राह्मण नेताओं कहां?

इससे पहले यूपी के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक बहुजन समाज पार्टी से आकर सरकार में दूसरे नंबर के नेता हैं। वहीं, पीलीभीत से सांसद जितिन प्रसाद केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री हैं। जितिन प्रसाद इससे पहले योगी सरकार में मंत्री बनकर भारी भरकम मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे थे। जबकि, बीजेपी के ही चर्चित और बड़े नेता दिनेश शर्मा, रीता बहुगुणा जोशी, आशुतोष टंडन, सतीश द्विवेदी, उदयभान करवरिया, शलभमणि त्रिपाठी सोशल मीडिया तक ही चर्चा में रहते हैं, इनके पास कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं है। 

 

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ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने उड़ाई थी नींद

दरअसल, पिछले साल 23 दिसंबर 2025 को यूपी की राजधानी में बीजेपी के तीन दर्जनभर से ज्यादा ब्राह्मण विधायकों ने बैठक की थी। यह बैठक कुशीनगर के बीजेपी विधायक पंचानंद पाठक के लखनऊ वाले आवास पर हुई थी। इस बैठक में बीजेपी के लगभग 40 ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य (MLC) शामिल हुए, जिसमें ज्यादातर बुंदेलखंड और पूर्वांचल के थे। यही नहीं इस बैठक में अन्य दूसरे दलों के ब्राह्मण विधायक भी हिस्सा लेने आए थे।

 

ब्राह्मण विधायकों की इस बैठक में समाज की एकजुटता बढ़ाने की बात हुई थी, साथ ही एकजुटता का स्पष्ट संदेश देने पर चर्चा भी हुई। बैठक में पिछले कुछ समय से राजनीति दलों, उनके नेताओं, सरकार में ब्राह्मण समाज को निशाना बनाने का मुद्दा उठाया गया था। इसके अलावा पिछले दिनों हुई समाज से संबंधित घटनाओं पर बात हुई। यही नहीं बीजेपी सरकार होने और पार्टी की सफलता के पीछे ब्राह्मणों की बड़ी भूमिका होने के बावजूद पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक में उचित प्रतिनिधित्व और सम्मान न मिलने के मुद्दे पर भी चर्चा की गई।

पीछे की वजह क्या है?

यही वजहें है कि बीजेपी अपने कोर वोटर ब्राह्मणों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती। पार्टी को लगता है कि उसके कोर नेता तो उसके साथ हैं कि लेकिन बाहरी नेता पार्टी में आता है तो उसे पद या जिम्मेदारी देकर उसे अपना बना लिया जाए। साथ ही विरक्षी दल को झटका दिया जाए। हालांकि, समाजवादी पार्टी ब्राह्मण जाति, उसके नेता या फिर उनके मुद्दे हाथ से जाने नहीं देना चाहती है इसलिए पार्टी इस मुद्दे पर सक्रिय रहती है। ब्राह्मण मुद्दों पर सपा लगातार बीजेपी को घरती भी रहती है। 


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