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क्या हिमाचल-हरियाणा में फिर से खेल कर पाएगी BJP? कांग्रेस की मुश्किलें समझिए

चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनावों की घोषणा कर दी है। इन चुनावों में हरियाणा की दो और हिमाचल की एक सीट पर भी मतदान होगा। कांग्रेस पार्टी मजबूत स्थिति में होने के बावजूद असहज है।

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सांकेतिक तस्वीर, Photo Credit: SORA

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चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा कर दी है। 5 मार्च तक उम्मीदवारों को नामांकन करना है और 16 मार्च को वोटिंग होगी। इन 37 सीटों में 2 सीटें हरियाणा और 1 सीट हिमाचल की भी खाली हो रही है। इन दोनों राज्यों में संख्याबल के हिसाब से देखें तो हरियाणा में कांग्रेस और बीजेपी को 1-1 सीट और हिमाचल की सीट कांग्रेस को मिलेगी लेकिन कांग्रेस की राह आसान नहीं होने वाली है। भारतीय जनता पार्टी दोनों राज्यों में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकती है। हिमाचल प्रदेश में इससे पहले हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बीजेपी के हाथों हार मिली और नौबत सरकार गिरने तक आ गई थी। 

 

कांग्रेस पार्टी के लिए हिमाचल और हरियाणा दोनों जगहों से एक-एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। संख्याबल के हिसाब से हिमाचल और हरियाणा दोनों राज्यों में कांग्रेस आसानी से एक-एक सीट जीत सकती है लेकिन कांग्रेस के नेता फिर भी परेशान हैं। कांग्रेस पार्टी इससे पहले 2024 में जरूरी विधायकों की संख्या होने के बावजूद राज्यसभा की सीट हार गई थी और बीजेपी ने बड़ी चालाकी से अपने उम्मीदवार को जीत दिलाई थी। कांग्रेस पार्टी अब इस तरह का जोखिम नहीं उठा सकती। 

 

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2024 में क्या हुआ था?

कांग्रेस पार्टी 2024 में हुए राज्यसभा चुनाव में करारी हार का सामना कर चुकी है। पार्टी के उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी बहुमत के बावजूद राज्यसभा चुनाव नहीं जीत पाए थे। कांग्रेस के 40 विधायकों में से 6 विधायकों ने बीजेपी उम्मीदवार हर्ष महाजन को वोट दे दिया था और दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले थे। 

 

इसके बाद लॉटरी सिस्टम के जरिए हर्ष महाजन को विजेता घोषित किया गया। पार्टी ने 6 विधायकों पर कार्रवाई की और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद उपचुनाव हुए और कांग्रेस पार्टी फिर से 40 विधायकों तक पहुंची। सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी सरकार बचाने में कामयाब रहे थे। 

हिमाचल में कांग्रेस की मुश्किलें

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के पास 40 और बीजेपी के पास 28 विधायक हैं। बहुमत के लिए 35 विधायकों के वोट चाहिए और कांग्रेस के पास बहुमत से 5 ज्यादा हैं और बीजेपी के पास 7 विधायक कम हैं। कांग्रेस की आसान राह को बीजेपी मुश्किल बनाने का प्लान कर रही है। बीजेपी बहुमत ना होने के बावजूद भी उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर कांग्रेस किसी बाहरी नेता को टिकट देती है तो बीजेपी भी अपने किसी लोकल उम्मीदवार को मैदान में उतार सकती है।

 

हिमाचल में कांग्रेस की ओर से प्रतिभा पाटिल, आनंद शर्मा और महाराष्ट्र से सांसद रजनी पाटिल का नाम टिकट की रेस में है। ऐसे में अगर पार्टी रजनी पाटिल या दिल्ली से किसी अन्य नेता को हिमाचल के रास्ते राज्यसभा भेजना चाहेगी तो बीजेपी राह मुश्किल करेगी। 2024 में बीजेपी ने सिर्फ 25 विधायक होने के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार को हरा दिया था। 

 

बजट सत्र से पहले हुई बीजेपी विधायकों की बैठक में राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने को लेकर चर्चा हुई। अधिकांश विधायकों ने प्रत्याशी उतारने की बात कही। अगर बीजेपी उम्मीदवार उतारती है तो मौजूदा सासंद इंदू गोस्वामी को फिर से मौका दे सकती है। इसके अलावा भी कई स्थानीय नाम चर्चा में हैं। बीजेपी एक बार फिर बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा इस चुनाव में उठा सकती है। 

हरियाणा में 50-50

हरियाणा में दो सीटों पर चुनाव होने हैं। विधायकों की संख्या देखी जाए तो मामला फिफ्टी-फिफ्टी नजर आता है। एक सीट बीजेपी और एक सीट विपक्षी कांग्रेस के खाते में जा सकती है। हालांकि, बीजेपी आखिरी समय में समीकरण बदल सकती है। खाली होने वाली दोनों सीटें बीजेपी के पास हैं और बीजेपी इन दोनों सीटों पर फिर से जीत दर्ज करने की संभावना तलाश रही है। 

 

हरियाणा विधानसभा की कुल संख्या 90 है। एक सीट पर जीत के लिए 31 विधायकों के वोट की जरूरत होगी। कांग्रेस के पास 37 और बीजेपी के पास 47 विधायक हैं। इसके अलावा 3 निर्दलिय उम्मीदवारों का समर्थन भी बीजेपी को मिला है। अगर बीजेपी को दोनों सीटों पर जीत दर्ज करनी है तो कम से कम 7 कांग्रेस के विधायकों से क्रॉस वोटिंग करवानी होगी। हालांकि, यह टास्क बीजेपी के लिए बहुत मुश्किल है लेकिन हिमाचल में बीजेपी पहले यह करवा चुकी है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस की राह मुश्किल हो सकती है। 

 

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कांग्रेस क्यों परेशान?

कांग्रेस पार्टी हरियाणा में इसलिए परेशान है क्योंकि पार्टी के अंदर गुटबाजी बहुत ज्यादा है। 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के करीब एक साल बाद तक पार्टी किसी को नेता विपक्ष नहीं बना पाई थी। अंत में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को ही चुनना पड़ा। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखना होगी। कांग्रेस पार्टी प्रभारी बीके हरिप्रसाद, जयराम रमेश और पवन खेड़ा के अलावा उदयभान और राव दान सिंह जैसे चेहरों पर दांव लगा सकती है लेकिन किसी एक नाम पर सहमति बनाना पार्टी के लिए बहुत मुश्किल होगा। 

 

कांग्रेस की परेशानी का एक बड़ा कारण 2022 में हुए राज्यसभा चुनाव हैं। इस चुनाव में एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला था। कांग्रेस पार्टी ने अजय माकन को टिकट दिया था लेकिन कार्तिकेय शर्मा ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया और बीजेपी ने उनका समर्थन किया। मजदान के दौरान कांग्रेस पार्टी के कुछ विधायकों पर एजेंट को वोट दिखाने के आरोप लगे लेकिन कांग्रेस की आपत्ति के बावजूद वोट रद्द नहीं हुए और कार्तिकेय शर्मा चुनाव जीत गए। 2024 में हिमाचल में बीजेपी ने अभिषेक मनु सिंघवी को हरा दिया। ऐसे में बहुमत होने के बावजूद भी कांग्रेस परेशान है। 


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