उत्तर प्रदेश विधान परिषद के वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का रिजल्ट जारी हो गया है। इस सीट के लिए मतगणना आज 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हुई और समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को हरा दिया है। कई दिनों तक चली मतगणना के बाद सामने आए इस परिणाम पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की निगाहें टिकी हुई थीं।
चुनाव आयोग की ओर से जारी अंतिम आंकड़ों के अनुसार, आशुतोष सिन्हा को कुल 55,046 मत मिले। उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी को 19,932 मतों के अंतर से हराया। यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि यह सीट पीएम मोदी के लोकसभा क्षेत्र में आती है और यहां पर बीजेपी की हार हुई है। इस जीत के बाद समाजवादी पार्टी के खेमे में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
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कौन हैं आशुतोष सिन्हा?
आशुतोष सिन्हा उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता हैं। वह पेशे से वकील हैं और लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय हैं। समाजवादी पार्टी ने उन्हें वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के लिए उम्मीदवार बनाया था और अब उन्होंने लगातार दूसरी बार इस सीट से जीत दर्ज की है। वर्ष 2020 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें वाराणसी स्नातक सीट से प्रत्याशी बनाया था, जिसके बाद उन्होंने चुनाव जीतकर विधान परिषद में जगह बनाई।
छात्र जीवन में राजनीति की शुरुआत
आशुतोष सिन्हा साल 2006 में हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में रिकॉर्ड वोटों से उपाध्यक्ष चुने गए थे। साल 2007 में उन्होंने ‘छात्र युवा सम्मेलन’ आयोजित किया था। इस सम्मेलन में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उस समय अखिलेश यादव पार्टी के राष्ट्रीय युवा प्रभारी और सांसद थे। उस समय पहली बार आशुतोष सिन्हा चर्चा में आए थे।
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चुनाव से पहले बीजेपी को झटका
वाराणसी में एमएलसी चुनाव के नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी को झटका दिया है। वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा की जीत को बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। यह सीट पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में आती है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है। समाजवादी पार्टी के लिए आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह जीत काफी अहम है।