पहले तल्खी, अब गुपचुप बैठकें, BJP के करीब कैसे आ रहे सुखबीर बादल? इनसाइड स्टोरी
शिरोमणि अकाली दल एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन पर विचार करता नजर आ रहा है। अटकलें क्यों लगी हैं, सुखबीर बादल ने पीएम से मुलाकात क्यों की, पढ़ें जवाब।

नायब सिंह सैनी और सुखबीर सिंह बादल। AI इमेज। Photo Credit: ChatGPT
शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
ने शुक्रवार दोपहर संसद भवन में करीब 10 मिनट तक मुलाकात की। अब इस मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि पुरानी दोस्ती, नई दुश्मनी के बाद फिर से बहाल हो सकती है। यह बैठक दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई और दोनों नेताओं के बीच माहौल सौहार्दपूर्ण रहा। सुखबीर बादल के कार्यालय ने बैठक का एजेंडा नहीं बताया, लेकिन अटकलें सियासी गठजोड़ की लगाई जा रही हैं।
शिरोमणि अकाली खेमे का कहना है कि मुलाकात गठबंधन पर न होकर पंजाब के मुद्दों पर आधारित थी। दावा किया जा रहा है कि राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति लचर है। आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर भ्रष्टाचार किया है। यह मुलाकात कुछ दिन पहले सुखबीर बादल की हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हुई बैठक के बाद हुई है।
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नायब सैनी कैसे सूत्रधार हैं?
नायब सैनी हाल के दिनों में पंजाब की राजनीति को लेकर ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। वही इस बैठक के सूत्रधार कहे जा रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल के कई नेताओं को इस बैठक की जानकारी नहीं थी। सीनियर अकाली नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि जब सुखबीर बादल, प्रधानमंत्री से मिल रहे थे तो AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तुरंत तंज कसा। इससे साफ है कि AAP और कांग्रेस इस बैठक को लेकर कितने असुरक्षित हैं। कोई पार्टी अध्यक्ष राज्य के मुद्दों पर प्रधानमंत्री से क्यों नहीं मिल सकता?
क्या मिलकर दोनों दल चुनाव लड़ेंगे?
यह बैठक 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच पुरानी गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अटकलों को नया बल दे रही है। दोनों पार्टियां सार्वजनिक रूप से कहती रही हैं कि वे चुनाव अकेले लड़ेंगी। दोनों का गठबंधन सितंबर 2020 में टूटा था, जब अकालियों ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग होने का फैसला लिया था। उन कानूनों को बाद में वापस ले लिया गया।
बिना गठबंधन, सत्ता मिलनी मुश्किल है?
कई राज्य भारतीय जनता पार्टी नेता पुराने गठबंधन को फिर से बनाने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि अकाली दल के पंथिक और ग्रामीण वोटर्स और भारतीय जनता पार्टी के शहरी समर्थन को मिलाकर AAP सरकार के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाया जा सकता है। लेकिन समीकरण पहले जैसा नहीं रहेगा।
पहले अकाली दल बड़ी पार्टी होती थी और भारतीय जनता पार्टी छोटी सहयोगी। अब भारतीय जनता पार्टी की बड़ी भूमिका रहेगी। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा है कि पार्टी 117 सीटों पर अकेले लड़ने की तैयारी कर रही है, लेकिन भविष्य में क्या होगा, यह नहीं कहा जा सकता। वह न तो गठबंधन के पक्ष में हैं और न विरोध में।
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कांग्रेस और AAP क्यों भड़के हैं?
कांग्रेस और AAP दोनों धुर विरोधी दलों को यह मुलाकात रास नहीं आई है। अरविंद केजरीवाल ने इस बैठक पर सवाल किया है कि क्या ‘चंदा चोर पार्टी’ और ‘बेअदबी पार्टी’ का गठबंधन बनने जा रहा है।
अरविंद केजरीवाल, AAP संयोजक:-
ना ना करते प्यार तुम्ही से कर बैठे तो क्या चन्दा चोर पार्टी और बेअदबी पार्टी का गठबंधन हो रहा है?
कांग्रेस के विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, 'दोनों फिर से साथ आने वाले हैं। बीजेपी ने अकेले कोशिश की, अकालियों की आलोचना की और अब दो बड़े जीरो एक साथ होंगे। इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा।'
पहले तल्खी फिर करीब आने की सुगबुगाहट?
जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान उन्होंने अकाली दल पर व्यक्तिगत हितों का आरोप लगाया था। सुखबीर बादल ने जवाब में कहा था कि नरेंद्र मोदी उनकी पार्टी की नहीं, बल्कि अलग हुए अकाली फिरकों की बात कर रहे थे। अकाली दल बीजेपी नेतृत्व से संवाद खुला रखना चाहता है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे की आलोचना तो करती हैं, लेकिन आलोचना नियंत्रित रहती है। यह छोटी सी बैठक पंजाब में 2027 के चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चा खड़ी कर रही है। क्या पुराना गठबंधन फिर बनेगा या दोनों अकेले ही मैदान में उतरेंगे, अभी इसकी तस्वीर साफ नहीं है।
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कैसे पीएम से नाराज सुखबीर बादल, बैठक के लिए राजी हुए?
पीएम मोदी और सुखबीर बादल के बीच हुई मुलाकात के सूत्रधार नायब सैनी हैं। पीएम से मिलने से पहले सुखबीर बादल और नायब सिंह सैनी ने 2 घंटे तक मुलाकात की थी। बलविंदर सिंह भूंदड़ और दलजीत सिंह चीमा भी इस बैठक में शामिल रहे हैं। साल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन, लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर समर्थन के साथ-साथ सजा पूरी कर चुके बंदी सिखों की रिहाई जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। नायब सैनी ने प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क किया था। PMO से हरी झंडी मिलने के बाद गुरुवार रात करीब 11 बजे सुखबीर बादल के पास फोन आया। वह शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंचकर संसद भवन में पीएम मोदी से 40-45 मिनट तक बातचीत की।
क्यों अकाली-BJP एक-दूसरे के लिए जरूरी हैं?
अकाली दल ने हाल में ही एक सर्वे कराया था। अकाली अपने दम पर बिना बीजेपी के सहयोग से सत्ता में नहीं आ सकते। पंजाब में कांग्रेस और AAP दोनों दल, बेहद मजबूत स्थिति में है। बीजेपी प्रचंड मोदी लहर में भी हाशिए पर रही है, आज भी हाशिए पर है। अकाली दल की ओर से कराए गए सर्वे में यह सामने आया था कि बीजेपी गठबंधन होने पर सरकार में वापसी संभव है, जबकि अकेले जीत मुश्किल है। बैठक के बाद खुलकर न तो बीजेपी के लोग कुछ कह रहे हैं, न ही अकाली के। दलजीत चीमा ने कहा कि नायब सैनी से मुलाकात हुई है, लेकिन विवरण सार्वजनिक नहीं कर सकते हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने यह आदेश दिया है कि गठबंधन के बारे में कोई बयानबाजी न की जाए।
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