उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठन में अब क्षेत्रीय प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर मंथन अंतिम दौर में पहुंच गया है। पार्टी छह संगठनात्मक क्षेत्रों में जातीय और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम में राजेश चौधरी, ब्रज में दिलीप पटेल और गीता शाक्य, अवध में गीता शाक्य या राम प्रताप सिंह, कानपुर में अभिजात मिश्रा, गोरखपुर में उपेंद्र रावत और शंकर लाल लोधी के नाम प्रमुखता से चर्चा में हैं।
बीजेपी जल्द ही इन नियुक्तियों पर अंतिम फैसला कर सकती है। बीजेपी इस बार क्षेत्रीय प्रभारियों की नियुक्ति केवल संगठनात्मक अनुभव के आधार पर नहीं, बल्कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर करना चाहती है। समाजवादी पार्टी के पीडीए अभियान का जवाब देने के लिए पार्टी हर क्षेत्र में अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम कर रही है।
कौन हैं मजबूत दावेदार?
71 विधानसभा सीटों वाले पश्चिम क्षेत्र में गुर्जर क्षेत्रीय अध्यक्ष के साथ जाट समीकरण साधने के लिए प्रदेश महामंत्री राजेश चौधरी का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। इसके अलावा राम प्रताप सिंह और अभिजात मिश्रा के नाम भी चर्चा में हैं।
65 विधानसभा सीटों वाले ब्रज क्षेत्र में इस बार दिलीप पटेल और गीता शाक्य के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। पार्टी यहां ओबीसी और अनुसूचित जाति के सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश कर रही है। 82 विधानसभा सीटों वाले अवध क्षेत्र के लिए गीता शाक्य और राम प्रताप सिंह के नाम प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं। संगठन यहां सामाजिक संतुलन के साथ मजबूत चुनावी प्रबंधन को प्राथमिकता देना चाहता है।
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कानपुर में ब्राह्मण चेहरे पर दांव
52 विधानसभा सीटों वाले कानपुर क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं को साधने के लिए अभिजात मिश्रा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। पार्टी संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका को भी अहम माना जा रहा है।
62 विधानसभा सीटों वाले गोरखपुर क्षेत्र में अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के समीकरण को देखते हुए पूर्व सांसद उपेंद्र रावत और प्रदेश महामंत्री शंकर लाल लोधी के नाम सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
71 विधानसभा सीटों वाले काशी क्षेत्र में क्षेत्रीय अध्यक्ष ओबीसी वर्ग से होने के कारण बीजेपी सवर्ण चेहरे को क्षेत्रीय प्रभारी बनाने पर विचार कर रही है। हालांकि इस क्षेत्र के लिए अभी किसी एक नाम पर अंतिम सहमति नहीं बनी है।
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चुनावी रणनीति में अहम होती है क्षेत्रीय प्रभारी की भूमिका
बीजेपी ने उत्तर प्रदेश को काशी, गोरखपुर, अवध, कानपुर, ब्रज और पश्चिम—इन छह संगठनात्मक क्षेत्रों में बांट रखा है, जिनके अंतर्गत 98 संगठनात्मक जिले आते हैं। सभी क्षेत्रों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है और अब क्षेत्रीय प्रभारियों के नामों का एलान संगठन की अगली बड़ी कवायद माना जा रहा है। क्षेत्रीय प्रभारी संगठन और चुनाव के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। बूथ प्रबंधन, जिला इकाइयों के समन्वय, चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी इन्हीं के पास होती है। यही वजह है कि बीजेपी इन नियुक्तियों को विधानसभा चुनाव से पहले सबसे अहम संगठनात्मक फैसलों में शामिल मान रही है।