एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से अपने रास्ते अलग किए थे और मूल शिवसेना हथिया ली थी। अब उद्धव ठाकरे के पास बची शिवसेना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) में एक और टूट होने की कगार पर है। इसका पहला कारण तो यह माना जा कहा है कि नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (NDA) अपने सांसदों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसका एक और कारण है कि खुद एकनाथ शिंदे भी अपना और अपना पार्टी का वजन मुंबई से लेकर दिल्ली तक बढ़ाना चाहते हैं। यही वजह है कि वह लंबे समय से शिवसेना (UBT) के सांसदों और विधायकों के संपर्क में हैं। अब चर्चा है कि लोकसभा सांसदों के साथ-साथ शिवसेना (UBT) के विधायक भी एकनाथ शिंदे के साथ आ सकते हैं।
हुआ कुछ यूं कि 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री थे। उन्हीं की अगुवाई में चुनाव भी लड़ा गया लेकिन बीजेपी की सीटें ज्यादा आने का नतीजा हुआ कि देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री बन गए। बहुत कोशिश के बावजूद एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए और उनको मनचाहे विभाग भी नहीं मिले। तब से ही एकनाथ शिंदे की कोशिश अपना वजन बढ़ाने की रही है। इसी क्रम में वह शिवसेना (UBT) के कई नेताओं को अपनी शिवसेना में शामिल करवा चुके हैं। संगठन के स्तर पर वह शिवसेना को लगातार मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
महाराष्ट्र के लोकसभा चुनाव के नतीजों से समझिए
महाराष्ट्र में लोकसभा की कुल 48 सीटे हैं। 2024 में सबसे ज्यादा 13 सीटें कांग्रेस की आईं। बीजेपी और शिवसेना (UBT) की 9-9, एनसीपी (शरद पवार) की 8 और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को सिर्फ 7 सीटों पर जीत मिली थी। इसके अलावा एनसीपी को एक सीट पर जीत मिली थी और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी।
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इस क्रम में देखें तो एकनाथ शिंदे की शिवसेना पांचवें नंबर पर है। अब दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के 6 से 7 सांसद एकनाथ शिंदे के साथ आ सकते हैं। अगर 6 सांसद आते हैं तो महाराष्ट्र में शिवसेना और कांग्रेस के सांसदों की संख्या बराबर हो जाएंगे। वहीं, अगर 7 सांसद आते हैं तो शिवसेना के 14 सांसद हो जाएंगे और वह एक झटके में महाराष्ट्र में लोकसभा सांसदों के हिसाब से सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी।
NDA में वजन बढ़ाने की कोशिश
मौजूदा केंद्र सरकार में सबसे बड़ी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) है लेकिन अब वह जनता दल यूनाइटेड (JDU), तेलुगू देशम पार्टी (TDP) और शिवसेना जैसे तमाम दलों के सहयोग से सरकार चला रही है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों के बीजेपी के साथ आ जाने से एकनाथ शिंदे की अहमियत एक झटके में कम होती दिखने लगी। राज्य में वह पहले ही मजबूत स्थिति में नहीं हैं। कहा जाता है कि अपनी छोटी-मोटी बात मनवाने के लिए भी एकनाथ शिंदे को दिल्ली तक जाना पड़ता है। ऐसे में अब उनका फोकस दिल्ली में अपना वजन बढ़ाने पर है।
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NDA के सांसदों की संख्या को देखें तो बीजेपी के 240 सांसदों के बाद सबसे ज्यादा 16 सांसद टीडीपी के पास और 12 सांसद जेडीयू के पास हैं। इनको मिलाकर संख्या 268 तक ही पहुंचती है। इसमें शिवसेना के 7 सांसद मिलाने के बाद ही एनडीए 272 के आंकड़े को पार करती है। अब टीएमसी के 20 सांसदों के आने के बाद एकनाथ शिंदे का दावा कमजोर हुआ है। ऐसे में उनकी पूरी कोशिश अपनी संख्या बढ़ाने पर है और इसी के दम पर वह अपने संगठन को भी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
अगर 6 से 7 सांसद उनके साथ आते हैं तो शिवसेना के सांसदों की संख्या 13 या 14 हो जाएगी। इस तरह एकनाथ शिंदे की पार्टी एनडीए में टीडीपी और टीएमसी के 20 सांसदों वाले धड़े के बाद चौथे नंबर की पार्टी हो जाएगी।
अगर एकनाथ शिंदे अपने इस मिशन में सफल होते हैं तो वह दिल्ली पर ज्यादा दबाव डाल सकेंगे और उसी के जरिए महाराष्ट्र में भी अपना वजन बढ़ा सकेंगे। इसके चलते उनकी कोशिश महाराष्ट्र में बीजेपी की बढ़ती ताकत को संतुलित करने की भी है ताकि बीजेपी को रोका जा सके। 2024 के बाद देखा गया है कि बीजेपी अब उन इलाकों में भी अपना विस्तार कर रही है जहां अभी तक शिवसेना और एनसीपी मजबूत रही हैं।