बहुजन समाज पार्टी के नेता आकाश आनंद ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिलेश यादव
को 'अंकल' कहा है। अखिलेश यादव, मायावती को बुआ बुला चुके हैं। अपने कार्यकर्ताओं के बीच 'अखिलेश भैया' के तौर पर मशहूर अखिलेश यादव के लिए नया संबोधन चौंकाने वाला है। कई लोग आकाश आनंद से कह भी रहे हैं कि उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए। आकाश आनंद के 'अकल' वाले बयान में भविष्य की राजनीति छिपी है, जिसे वह बाखूबी भुना ले गए है।
आकाश आनंद के निशाने पर सिर्फ अखिलेश यादव नहीं थे, उन्होंने उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर भी हमला बोला है। उन्होंने रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। आकाश आनंद ने कांग्रेस नेता
राहुल गांधी
और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को भी निशाना बनाया और दोनों को अंकल कहकर पुकारा। आकाश आनंद हाथरस के सादाबाद विधानसभा में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
आकाश आनंद बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक रह चुके हैं और पार्टी प्रमुख मायावती के भतीजे हैं। अब पार्टी अगले साल के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में उतर गई है। ऐसा लग रहा है कि आकाश आनंद को चेहरा बनाकर ही बहुजन समाज पार्टी चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार है। मायावती खुद जनसभाओं में कम सक्रिय नजर आ रहीं हैं। ़
आकाश आनंद अचानक चर्चा में क्यों आए?
आकाश आनंद ने हाथरस में जो भाषण दिया, उसकी चर्चा खूब हो रही है। उन्होंने कहा, 'पिछले 10 साल में सरकार ने अपनी खामियां छिपाने के लिए विज्ञापनों पर 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए। राज्य में 4 लाख से ज्यादा सरकारी पद खाली पड़े हैं और कई परीक्षाओं में पेपर लीक हुए हैं। अगर यह पैसा परीक्षाओं और रोजगार पर खर्च होता तो बहुत से युवाओं को नौकरी मिल जाती। राज्य में 25,000 से ज्यादा स्कूल बंद हो चुके हैं।'
आकाश आनंद। Photo Credit: AkashAnand/X
आकाश आनंद, BSP नेता:- सप्ताह में एक बार नाश्ता बेचने वाले या रेहड़ी लगाने वाले को भी रोजगार में गिना जा रहा है।
अखिलेश यादव को आकाश आनंद ने कहा 'अंकल'
समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को बदलता हुआ बताया। आकाश आनंद ने कहा कि पल-पल PDA की परिभाषा बदल जा रही है।
आकाश आनंद, नेता, बहुजन समाज पार्टी:- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिलेश अंकल जी, मैं पूरी इज्जत और सम्मान से उनका नाम ले रहा हूं, उनकी उम्र अब हो गई है। मैं 30 साल का लड़का अब अगर 50 साल के आदमी को अंकल नहीं कहूंगा तो क्या कहूंगा।
बहुजन समाज पार्टी की चीफ मायावती। Photo Credit: BSP
अखिलेश को 'अंकल' बुलाने की मंशा क्या है?
समाजवादी पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि आकाश आनंद खुद को युवाओं का ठेकेदार समझ रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी साल 2012 के बाद से अपना अस्तित्व ही खो चुकी है, मायावती की पार्टी, अब अपने अस्तित्व को बचाने की कवायद कर रही है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता तारिक खान ने कहा, 'यह मायावती की राजनीति नहीं है। हम उन्हें हम बहन जी ही कहेंगे। उम्र से किसी को बुलाना, राजनीतिक परंपरा तो नहीं है। ऐसे तो प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी
दादा की उम्र में हैं, उन्हें दादा बुलाएं। गृहमंत्री अमित शाह को चाचा बुलाएं। राजनीति का उम्र से क्या लेना-देना है। यह बचपना है। मायावती का जनाधार था, आकाश आनंद अभी नौसिखिया हैं। जमीन पर शून्य पकड़ है। ऐसी बाते ओछी हैं, राजनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाती हैं। पहले संघर्ष करें, फिर नेता बनें और नेताओं जैसी बातें करें।'
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आकाश आनंद, अखिलेश यादव को अंकल कहकर खुद को 'जेन जी' जनरेशन का नेता साबित करना चाह रहे हैं।
समाजवादी पार्टी की विचारधारा पुराने ढर्रे पर है। अखिलेश यादव अब पुराने हो रहे हैं, इसलिए युवाओं से कनेक्ट नहीं कर पा रहे है। बहुजन समाज पार्टी के नेता बेदी कुमार ने कहा, 'आकाश आनंद बहुजन समाज पार्टी को उन युवाओं की पार्टी बनाना चाहते हैं, जो रोजगार, शिक्षा और परीक्षा घोटालों से नाराज हैं और पुराने चेहरों से ऊब चुके हैं।'
किसके साथ जाएंगे आकाश आनंद?
बहुजन समाज पार्टी की तेवर अभी समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी, तीनों के खिलाफ हैं। पार्टी 2027 में होने वाले चुनावों में स्वतंत्र उतर सकती है। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव, दोनों को अंकल कहकर दूरी बना ली है।
आकाश आनंद, BSP नेता:- सिर्फ भाषण देने और प्रदर्शन करने से सरकार नहीं बदलती। एक व्यक्ति को बदलने से न नीति बदलती है, न प्रक्रिया और न अधिकारी। अगर सिस्टम ठीक करना है तो सरकार और लोगों को बदलना पड़ेगा।
आकाश आनंद अपनी जनसभाओं में साफ कह रहे हैं कि बीएसपी न तो समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले में फंसेगी और न कांग्रेस के साथ। मायावती के भतीजे के रूप में वह पार्टी की अपनी विरासत मजबूत करते हुए विपक्षी दलों को एक साथ निशाना बना रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी, युवाओं और बहुजन राजनीति को साधते हुए अब अपनी दिशा तय करेगी।