कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा है कि वह ना तो अपने हिंदू धर्म को त्याग सकते हैं और ना ही अपनी पहचान को दरकिनार कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करना राजनीति से प्रेरित नहीं बल्कि उनकी व्यक्तिगत आस्था का प्रतीक था।
3 जून को अपने शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हिंदू परंपराओं और रीति-रिवाजों का पालन करने पर कुछ लोगों ने सवाल उठाए थे। लोगों का कहना था कि कांग्रेस, सेक्युलर राजनीति का दावा करती है, फिर क्यों डीके शिवकुमार ने अपने शपथ ग्रहण में धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया। यह सवाल जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने दिलचस्प जवाब दिया।
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डीके शिवकुमार, मुख्यमंत्री, कर्नाटक:-
राजनीति मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। मेरे लिए महत्वपूर्ण है व्यक्ति और ईश्वर के बीच का संबंध। मंदिर और आस्था इसी संबंध से जुड़े हैं। मैं सभी धर्मों की संस्थाओं का आदर करता हूं, चाहे वे ईसाई हों, सिख हों, बौद्ध हों या हिंदू।
धार्मिक रीति-रिवाजों पर क्या कहा?
डीके शिवकुमार, मुख्यमंत्री, कर्नाटक:-
क्या मैं इस राज्य में किसी भी धर्म को छोड़ सकता हूं? क्या मैं अपना नाम बदलकर अपना धर्म त्याग सकता हूं? कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, यूं ही अपना धर्म नहीं छोड़ सकता।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा, 'हर धर्म के लोग धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं और महत्वपूर्ण अवसरों पर आशीर्वाद मांगते हैं। राज्य की जिम्मेदारी संभालने से पहले मैंने भी इसी तरह सभी धार्मिक नेताओं से आशीर्वाद लिया था।'
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कांग्रेस से अलग राजनीति करेंगे डीके शिवकुमार?
कांग्रेस की राजनीति सेक्युलर रही है। सार्वजनिक आयोजनों में धार्मिकता दिखाने से कांग्रेस अरसे से बचती रही है। डीके शिवकुमार, अपनी हिंदू पहचान को लेकर मुखर हैं। वह पहले भी धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेते रहे हैं। साल 2025 में प्रयागराज में लगे महाकुंभ में उन्होंने डुबकी लगाई थी, जिसकी कांग्रेसी खेमें में आलोचना हुई थी। लोगों ने इसे बगावत से जोड़कर देखा था।