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कब शुरू हुआ था आमलकी एकादशी व्रत? यहां जानिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा

फाल्गुन महीने में भगवान विष्णु की उपासना के लिए आमलकी व्रत को बहुत ही महत्व दिया जाता है। आइए जानते हैं, क्या है इस व्रत के पीछे की पौराणिक कथा।

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भगवान विष्णु।(Photo Credit: Creative Image)

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सनातन धर्म में भगवान विष्णु की उपासना के लिए आमलकी एकादशी हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह व्रत हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान है और साथ ही यह दिन आंवला यानी आमलकी वृक्ष की पूजा से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

क्यों रखा जाता है आमलकी एकादशी व्रत?

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक राजा था, जिसका नाम चित्ररथ था। वह भगवान विष्णु का परम भक्त थे। उनके राज्य में सभी लोग धार्मिक थे और विष्णु भक्ति में लीन रहते थे। एक बार फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन राजा ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में ब्राह्मण, ऋषि-मुनियों के साथ-साथ प्रजा ने आकर भगवान विष्णु की पूजा की।

 

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उस दिन सभी लोगों ने आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान विष्णु की आराधना की, क्योंकि आंवला भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। तभी वहां एक दुष्ट और अधर्मी राक्षस आ गया। वह यज्ञ को बाधित करने लगा और वहां मौजूद लोगों को डराने लगा। राजा और उनकी सेना ने उस राक्षस को रोकने का प्रयास किया लेकिन वह बहुत शक्तिशाली था।

 

जब सभी प्रयास विफल हो गए, तब आंवले के वृक्ष के नीचे रखी भगवान विष्णु की मूर्ति से दिव्य प्रकाश प्रकट हुई। उस प्रकाश से भगवान स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने अपने सुदर्शन चक्र से उस राक्षस का संहार कर दिया। यह देखकर राजा और प्रजा ने भगवान विष्णु की श्रद्धा भाव से उनकी पूजा अर्चना की। तभी से आमलकी एकादशी का महत्व बढ़ गया और इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवला वृक्ष की पूजा भी की जाने लगी।

आमलकी एकादशी व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु की उपासना करने से व्यक्ति को समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। आंवला वृक्ष को हिंदू धर्म में पवित्र माना गया है और इसमें देवी लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर कथा सुनने और विष्णु जी की पूजा करने से विशेष पुण्य मिलता है।

 

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इस दिन व्रत करने से मनुष्य को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो भी भक्त सच्चे मन से उपवास रखता है और भगवान विष्णु का स्मरण करता है, उसे जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन आंवले से बने भोजन का प्रसाद ग्रहण करना भी शुभ माना जाता है।

 

Disclaimer- यहां दी गई सभी जानकारी सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं।


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