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सर्वपितृ अमावस्या पर होगी पितरों की विदाई, जानें श्राद्ध के शुभ मुहूर्त और विधि

आज सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी, जब व्यक्ति अपने पितरों को याद कर सकता है। इसके साथ ही जिन लोगों ने अब तक अपने पितरों के लिए तर्पण नहीं किया, वे आज के दिन अपने पूर्वजों के लिए तर्पण कर सकते हैं।

Sarvapitri Amavasya

सर्वपितृ अमावस्या, Photo Credit- AI Generated

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सनातन धर्म में पितृ पक्ष को बेहद खास माना जाता है। 10 अक्टूबर को पितृ पक्ष का आखिरी दिन है। इस दिन सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी। पितृ पक्ष के दौरान यह दिन बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सभी पितर धरती लोक से विदा लेते हैं। इसके साथ ही माना जाता है कि आज के दिन सभी पितरों को तृप्ति मिलती है। धार्मिक मान्यता है कि जिन लोगों को अपने पितरों की मृत्यु की तिथि याद नहीं है, वे आज अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान कर सकते हैं, ताकि पितरों की आत्मा को शांति मिले।

 

हिंदू पंचांग के मुताबिक, सर्वपितृ अमावस्या तिथि की शुरुआत 9 अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट पर हुई थी, जो 10 अक्टूबर की रात 9 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, आज के दिन लोगों को कुछ खास मुहूर्त में पितरों का तर्पण करना चाहिए। आइए, श्राद्ध और तर्पण के शुभ मुहूर्त जानते हैं।

 

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तर्पण के शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, आज के दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने के तीन खास शुभ मुहूर्त हैं। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। इसके बाद दूसरा मुहूर्त दोपहर 12:31 बजे से लेकर दोपहर 1:18 बजे तक होगा। तीसरा शुभ समय दोपहर 1:18 बजे से लेकर दोपहर 3:37 बजे तक रहेगा। इन तीनों मुहूर्तों में व्यक्ति पिंडदान करता है, तो धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे मृत पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

कैसे करें श्राद्ध?

आज के दिन तर्पण करने के लिए लोगों को सबसे पहले स्नान करना चाहिए। उसके बाद साफ कपड़े पहनकर दक्षिण दिशा की ओर बैठ जाएं। तांबे के लोटे में जल भरें, फिर उसमें काला तिल, जौ, चावल और कुश डालें। इसके बाद हाथ में कुश लेकर पितरों को याद करें और तीन बार जल अर्पित करें।

 

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इसके बाद पके हुए चावल में घी मिलाकर पिंड बनाना चाहिए। साथ ही, ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। इसके अलावा, आज के दिन लोगों को कुत्ते, गाय, कौवे, चींटियों और देवताओं के लिए अलग-अलग भोजन निकालकर रखना चाहिए।

इस दिन करें दान

सर्वपितृ अमावस्या पर दान-पुण्य करने का बेहद खास महत्व है। श्राद्ध करने के बाद लोगों को दान करना चाहिए। अपने पितरों को मोक्ष दिलाने की धार्मिक मान्यता के तहत लोगों को जरूरतमंदों को काला तिल, घी, अनाज और कपड़ों का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान करने से न सिर्फ पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि लोगों को पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और धर्म ग्रंथों में वर्णित बातों पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

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