शारदीय नवरात्र उन त्योहारों में से एक है, जब सभी लोग मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं। इस त्योहार में सभी लोग मुख्य तौर पर अपने घरों में माता की चौकी सजाते हैं, जहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके साथ ही सभी भक्त नियमित रूप से मां दुर्गा की सुबह और शाम पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। इसके बाद विजयदशमी के दिन नवरात्र के त्योहार का समापन होता है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, शारदीय नवरात्र के दौरान भक्तों को न सिर्फ मां दुर्गा की विधिवत पूजा-पाठ करना चाहिए, बल्कि कोशिश करनी चाहिए कि वे नवरात्र के दौरान व्रत भी रखें। इस दौरान फलाहार और निर्जला व्रत भी रखा जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा-पाठ करने से लोगों को सुख-शांति मिलती है। अब सवाल उठता है कि शारदीय नवरात्र का पर्व किस दिन से शुरू होगा। साथ ही, सवाल यह भी है कि नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का सही समय क्या है?
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शारदीय नवरात्र की तारीख
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल अक्टूबर महीने में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को रात 9 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी, जो 11 अक्टूबर को रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से मानी जाएगी। इसी दिन भक्तों को माता की चौकी स्थापित करनी चाहिए और मां दुर्गा के समक्ष कलश की स्थापना करनी चाहिए।
कलश स्थापना का मुहूर्त
नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना के दो शुभ मुहूर्त हैं। इस दौरान ही भक्तों को कलश स्थापना करनी चाहिए। सनातन पंचांग के मुताबिक, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना का पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
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हर दिन किस देवी की होगी पूजा?
11 अक्टूबर को नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
12 अक्टूबर को नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी।
13 अक्टूबर को नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होगी।
14 अक्टूबर को चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाएगी।
15 अक्टूबर को पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना की जाएगी।
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16 अक्टूबर को छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी।
17 अक्टूबर को सातवें दिन मां कालरात्रि की विधिवत पूजा-पाठ होगी।
18 अक्टूबर को भी मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी।
19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी तिथि होगी। इस वजह से इस दिन पहले मां महागौरी की पूजा होगी, जिसके बाद मां सिद्धिदात्री की विधिवत पूजा की जाएगी। इसके बाद नवरात्र का पर्व समाप्त हो जाएगा।
20 अक्टूबर को विजयदशमी यानी दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और धर्म ग्रंथों में वर्णित बातों पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।