सितंबर महीने के आखिरी हफ्ते में पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। इस दौरान हिन्दू धर्म के लाखों लोग अपने पितरों को याद करेंगे। हिन्दू धर्म के अलावा कुछ अन्य धर्मों में भी इसी तरह की परंपरा निभाई जाती है। हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष के दौरान कुछ खास परंपराएं निभाई जाती हैं, जिसमें खास तौर पर पूर्वजों को याद किया जाता है। हिन्दू धर्म की तरह कुछ अन्य धर्मों में भी पितरों को याद करने की परंपरा है। इससे साफ होता है कि अन्य धर्मों में भी पितरों को याद करने की परंपरा है।
हिन्दू धर्म में इसके साथ ही जरूरतमंदों को दान दिया जाता है, साथ ही कुछ जीवों को भोजन कराया जाता है, ताकि पूर्वजों की आत्मा को शांति मिले और व्यक्ति को पूर्वजों का आशीर्वाद मिले। इस साल हिन्दू धर्म में पितृ पक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा, जिसके बाद 10 अक्टूबर को पितृ पक्ष खत्म होगा। इन्हीं दिनों में लाखों लोग अपने पितरों को याद करेंगे। अब सवाल उठता है कि हिन्दू धर्म की तरह किन धर्मों में पितरों को याद करने की परंपरा निभाई जाती है।
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फरवरदेगान परंपरा
पारसी धर्म में फरवरदेगान परंपरा निभाई जाती है, जो काफी हद तक हिन्दू धर्म के पितृ पक्ष की तरह है। पारसी धर्म की फरवरदेगान परंपरा में पितरों को याद किया जाता है और पितरों की आत्मा की शांति के लिए कुछ काम किए जाते हैं।
जहां एक तरफ हिन्दू धर्म में 15 से 16 दिनों तक पितृ पक्ष की परंपरा निभाई जाती है, वहीं दूसरी तरफ पारसी धर्म में 10 दिनों तक पितरों को याद किया जाता है। फरवरदेगान परंपरा पारसी धर्म के कैलेंडर के हिसाब से साल के आखिरी 10 दिनों तक मनाई जाती है।
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फरवरदेगान में क्या होता है?
कई लोग मानते हैं कि फरवरदेगान के दौरान घरों में स्वर्गीय पितरों का आगमन होता है। इसी वजह से लोग अपने घरों में साफ-सफाई बनाए रखते हैं। इसके साथ ही घर में एक स्थान पर मेज रखी जाती है और उस पर पूर्वजों की फोटो रखी जाती है। फोटो के सामने सुंदर फूलदान रखा जाता है। इस फूलदान में हर दिन फूल बदले जाते हैं। इसके साथ मेज पर जलता हुआ दीपक रखा जाता है। साथ ही घर में लोबान रखा जाता है, ताकि घर में हर व्यक्ति को खुशबू आती रहे। इसके अलावा पूर्वजों के लिए प्रार्थना करने की परंपरा है। यह प्रार्थना हर दिन सभी परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर करते हैं।
पारसी फरवरदेगान के दिनों के दौरान लोग सिर्फ पूर्वजों को ही याद नहीं करते हैं, बल्कि इस दौरान लोग ईश्वर को भी याद करते हैं। इन 10 दिनों के दौरान लोग अपने ईश्वर से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। साथ ही कई लोग इस दौरान ईश्वर से अनजाने में किए गए बुरे कर्मों के लिए माफी मांगते हैं।
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किन धर्मों में किया जाता है पितरों को याद?
हिन्दू और पारसी धर्म के अलावा कई धर्मों में पूर्वजों को याद करने की परंपरा खास तरीके से मनाई जाती है। ईसाई धर्म में ऑल सोल्स डे मनाया जाता है। इस दिन ईसाई धर्म के लोग न सिर्फ अपने पूर्वजों को याद करते हैं, बल्कि कब्रिस्तान में जाकर फूल अर्पित करते हैं और मोमबत्ती जलाकर पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना की जाती है।