सनातन धर्म में लाखों महिलाएं ऐसे त्योहार मनाती हैं, जिसमें संतान की सुख-शांति और लंबी आयु की कामना की जाती है। संतान की लंबी आयु के लिए रखे जाने वाले व्रत निर्जला होते हैं। इसी तरह बिहार में जितिया का त्योहार मनाया जाता है, जिसमें सभी महिलाएं अपने बेटे की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। सबसे रोचक बात यह है कि जितिया एक लौता त्योहार नहीं है, जिसके जरिए संतान की लंबी उम्र की कामना की जाती है। बल्कि कुछ और ऐसे त्योहार हैं, जिसमें मां अपने बेटे के लिए व्रत रखती हैं।
इस साल जितिया का पर्व अक्टूबर महीने की 3 तारीख को मनाया जाएगा। जिस दिन बिहार की लाखों महिलाएं अपने बेटे के लिए 24 घंटों तक निर्जला व्रत रखेंगी। इस पर्व को जीवित्पुत्रिका के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में सभी महिलाएं भगवान विष्णु और जीमूतवाहन भगवान की पूजा करती हैं। अब सवाल उठता है कि जितिया के अलावा और कौन-कौन से त्योहार हैं, जिसमें महिलाएं संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।
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इन पर्वों में बेटे के लिए रखा जाता है व्रत
अहोई अष्टमी व्रत
हिन्दू धर्म में अहोई अष्टमी पर्व बेहद खास माना जाता है। इस दिन सभी महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व में रखा गया व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। इस व्रत में सभी महिलाएं अहोई माता की पूजा-अर्चना करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अहोई मां पार्वती जी का एक रूप हैं। इस पर्व में अहोई माता को कढ़ी-चावल का भोग लगाया जाता है, साथ ही जरूरतमंद लोगों को कढ़ी-चावल का दान और भोजन कराया जाता है।
संकट चौथ
इस पर्व में सभी महिलाएं गणेश भगवान की पूजा-अर्चना करती हैं, साथ ही पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं, ताकि उनकी संतान को गणेश भगवान का आशीर्वाद मिल सके। इस पर्व में सभी भक्त भगवान के सामने तिल के लड्डू अर्पित करती हैं।
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बछ बारस
सनातन धर्म में बछ बारस बेहद अहम पर्व माना जाता है। कई धार्मिक जानकारों का मानना है कि इस व्रत के प्रभाव से महिलाओं को पुत्र प्राप्ति होती है। इस पर्व को राजस्थान की महिलाएं खास तौर पर मनाती हैं। यह पर्व राजस्थान के कठिन पर्वों में से एक है, क्योंकि इसमें महिलाओं को निर्जला व्रत रखना पड़ता है।