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18 या 19, कब से शुरू हो रही है नवरात्रि? सही तारीख जान लीजिए

चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तारीख और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त जारी हो गया है। जानिए इस बार मां दुर्गा किस खास सवारी पर सवार होकर आ रही हैं।

Chaitra Navratri, Photo Credit: Social Media

चैत्र नवरात्रि, Photo Credit: Social Media

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अगर आप चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तारीख को लेकर परेशान हैं तो अब सारा भ्रम दूर कर लीजिए। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होने जा रही है। खास बात यह है कि इसी दिन से हिंदू कैलेंडर का नया साल (विक्रम संवत 2083) भी शुरू होगा। होली बीतते ही लोग अब माता रानी के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने का सबसे बड़ा महत्व है और माना जाता है कि अगर शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए, तो माता रानी की विशेष कृपा मिलती है।

 

नवरात्रि का पहले दिन कलश स्थापना, सबसे अहम है। इसे आसान भाषा में मां दुर्गा को अपने घर बुलाने का तरीका माना जाता है। इस बार 19 मार्च को कलश रखने के लिए दो अच्छे समय हैं। सुबह का मुहूर्त 6:11 बजे से 8:35 बजे तक है। अगर आप सुबह जल्दी पूजा नहीं कर पाते है, तो दोपहर में 'अभिजीत मुहूर्त' सबसे बढ़िया है। इसका समय 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। नवरात्रि की पहली तिथि 18 मार्च की रात 9:34 बजे से शुरू होगी और 19 मार्च की रात 10:15 बजे खत्म होगी।

 

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कलश स्थापना क्यों की जाती है?

कलश स्थापना नवरात्रि का सबसे जरूरी हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को पूरे ब्रह्मांड का रुप माना जाता है और इसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसे स्थापित करने का अर्थ है मां दुर्गा का अपने घर में आदर के साथ स्वागत करना और उन्हें नौ दिनों तक विराजमान होने की प्रार्थना करना। कलश को सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रखना चाहिए।

पालकी पर बैठकर आएंगी मां दुर्गा

हर बार की तरह इस बार भी लोग जानना चाहते हैं कि माता रानी किस सवारी पर आएंगी। क्योंकि इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा 'पालकी'(डोली) पर बैठकर आ रही हैं। ज्योतिष के अनुसार, पालकी पर आना खुशहाली तो लगता ही है, साथ ही यह शांति और सावधानी से काम लेने का इशारा भी है। वहीं जब नवरात्रि खत्म होगी, तो मां 'हाथी' पर सवार होकर विदा होंगी। हाथी पर विदाई को अच्छी बारिश और सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।

 

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पूजा के वक्त इन बातों का रखें ध्यान 

शास्त्रों की मानें तो कलश हमेशा शुभ समय देखकर ही बैठना चाहिए। पूजा करते समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग जैसे समय का ध्यान रखें और इनसे बचें। कलश को पूरे संसार का रुप माना जाता है जिसमें सारे देवी-देवता बसते है। इसलिए इसे पूरी सफाई और नियम के साथ स्थापित करें। चैत्र महीने की ये नवरात्रि न सिर्फ भक्ति का पर्व है, बल्कि यह नए साल की नई शुरुआत का भी संदेश देती है।

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