ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति देव को तमाम ग्रहों का गुरु माना जाता है, जिनके तेज और प्रभाव से कई लोगों के जीवन में ज्ञान, शांति और समृद्धि आती है। बृहस्पति देव को सिर्फ मनुष्य ही नहीं, बल्कि कई देवी-देवता भी अपना गुरु मानते हैं। पौराणिक मान्यता के मुताबिक चंद्र देव ने भी बृहस्पति देव को अपना गुरु माना और उनसे शिक्षा ली थी। शिक्षा प्राप्त करने के बाद चंद्र देव को अपनी शक्ति और बल का घमंड हो गया। इसी घमंड के कारण उन्होंने अपने गुरु बृहस्पति जी को धोखा दिया, जिसके बाद बृहस्पति जी और चंद्र देव के बीच युद्ध हुआ था।
चंद्र देव और बृहस्पति देव के बीच युद्ध की कहानी श्रीमद्भागवत महापुराण में मिलती है। इस कथा के मुताबिक, चंद्र देव एक बार बृहस्पति देव की पत्नी तारा को देखकर मोहित हो गए थे। इसके बाद तारा को लेकर चंद्र देव और बृहस्पति देव के बीच युद्ध हुआ था। अब सवाल उठता है कि चंद्र देव और बृहस्पति देव के बीच यह विवाद किस कारण रुका था।
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कैसे हुई चंद्र देव की उत्पत्ति?
पौराणिक कथा के मुताबिक, चंद्र देव ब्रह्मा जी के पुत्र महर्षि अत्रि के पुत्र थे। महर्षि अत्रि ने पुत्र प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद चंद्र देव का जन्म हुआ। बचपन से ही चंद्र देव बेहद तेजस्वी और बलशाली थे। समय के साथ उन्हें अपनी शक्ति पर घमंड हो गया। इसी घमंड के कारण चंद्र देव ने अपने गुरु बृहस्पति जी की पत्नी तारा का अपहरण कर लिया। इसके बाद बृहस्पति देव चंद्र देव पर क्रोधित हो गए। बृहस्पति देव ने कई बार चंद्र देव से कहा कि वह तारा को छोड़ दें, लेकिन चंद्र देव अपने अहंकार में डूबे रहे और उन्होंने बृहस्पति देव की बात नहीं मानी।देवताओं के बीच हुआ युद्ध
चंद्र देव से अपमान मिलने के बाद बृहस्पति देव ने उनके साथ युद्ध करने का निश्चय किया, जिसके बाद देवलोक में युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में शुक्राचार्य जी ने चंद्र देव का साथ दिया, वहीं कई अन्य देवताओं ने बृहस्पति देव का समर्थन किया। जब इस युद्ध के कारण देवलोक में प्रलय जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई, तब कई देवता मिलकर ब्रह्मा जी के पास गए और युद्ध रोकने की प्रार्थना की थी।
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युद्ध रोकने के लिए ब्रह्मा जी ने चंद्र देव को समझाया, जिसके बाद उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ। चंद्र देव ने हार मान ली और तारा जी को बृहस्पति देव के पास वापस भेज दिया। जब तारा जी चंद्र देव के पास रह रही थीं, तभी वह गर्भवती हो गई थीं। बाद में तारा जी के गर्भ से बुध देव का जन्म हुआ।
नोट- यह लेख धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि नहीं करता है।