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9 या 10 नवंबर कब है गोवर्धन पूजा? तारीख से लेकर पूजा के शुभ मुहूर्त तक, जानिए

दिवाली त्योहार के बाद गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। हर साल की तरह इस साल भी कई लोगों को गोवर्धन पूजा की सही तारीख को लेकर कन्फ्यूजन है। जानिए सही तारीख क्या है।

 Govardhan Puja

प्रतीकात्मकत तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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हिंदू धर्म में हर साल दिवाली त्योहार मनाने के बाद गोवर्धन पूजा का त्योहार मनाया जाता है। इस पर्व में भगवान कृष्ण की आराधना की जाती है। जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था, उसी लीला से जुड़ा यह त्योहार है। इस दिन सभी भक्त गोबर से गोवर्धन पर्वत जैसी एक आकृति बनाते हैं, जिसे फूलों से सजाया जाता है। इसके अलावा, इस दिन भगवान को अन्नकूट के रूप में 56 भोग लगाया जाता है। धार्मिक जानकारों का मानना है कि भगवान कृष्ण को छप्पन भोग लगाने से भक्तों के घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती है।

 

हिंदू धर्म में दिवाली के बाद भी त्योहारों का सिलसिला जारी रहता है। जहां दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे पर्व मनाए जाते हैं। गोवर्धन पूजा पर्व की तारीख को लेकर कई लोग असमंजस में हैं। कई लोगों का मानना है कि 9 नवंबर को गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी, तो दूसरी तरफ कुछ जानकारों का मानना है कि 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाना चाहिए।

 

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गोवर्धन पूजा की तारीख

 

हिंदू पंचांग के मुताबिक, गोवर्धन पूजा कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। उस हिसाब से इस साल 9 नवंबर को प्रतिपदा तिथि है। हालांकि, इस दिन प्रतिपदा तिथि की शुरुआत दोपहर 12:31 बजे से होगी और यह 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक रहेगी। पर्व की उदया तिथि 10 नवंबर है। इस वजह से 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाना चाहिए।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पूजा का मुहूर्त- सुबह 6:40 बजे से लेकर 8:50 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11:43 बजे से लेकर दोपहर 12:26 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 5:30 बजे से लेकर 5:56 बजे तक।

 

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गोवर्धन पूजा का महत्व

यह त्योहार भगवान कृष्ण की एक लीला की वजह से मनाया जाता है। धार्मिक कथाओं के मुताबिक, ब्रज में रहने वाले लोग इंद्र देव की आराधना करते थे, ताकि अच्छी बारिश हो सके। इसी बीच भगवान कृष्ण ने लोगों को समझाया कि प्रकृति के साथ पर्वत और गौ माता का भी लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान है। इसी वजह से लोगों को पर्वत और गौ माता की भी पूजा करनी चाहिए।

 

इस बात से इंद्र देव नाराज हो गए थे। तब उन्होंने पूरे नगर में मूसलाधार बारिश करवा दी, जिससे लोगों और जानवरों की जान जोखिम में आ गई थी। इसी दौरान भगवान कृष्ण ने इंद्र देव के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। पर्वत के नीचे ही सभी लोग ठहर गए थे।

 

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गोवर्धन पूजा कैसे करें?

सुबह उठकर सबसे पहले पूरे घर को साफ करें। इसके बाद घर के दरवाजे के बाहर गाय के गोबर से एक प्रतिमा बनाएं। यहां गाय और बैल की आकृति भी बना लें। यह पर्वत बनाने के बाद एक थाली तैयार करें, जिसमें रोली, चावल, बताशे, जल, खीर और दूध रख लें। फिर विधिवत तरीके से पूजा करें। इसके बाद शाम को गोवर्धन पर्वत के सामने एक दीपक जलाएं।


नोट:यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

 

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