सनातन धर्म में एक ऐसा त्योहार है, जब सभी भक्त भगवान राम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी मनाते हैं। इस त्योहार पर हर व्यक्ति दीये जलाकर न सिर्फ अपने घर को रोशन करता है बल्कि विधिवत तरीके से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा भी करता है, ताकि मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से लोगों के घर में धन-संपत्ति और समृद्धि आए। धार्मिक जानकारों के अनुसार, सभी भक्तों को शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।
दिवाली का त्योहार कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस हिसाब से इस साल 8 नवंबर को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे अमावस्या तिथि शुरू होगी, जो 9 नवंबर को रात 12:31 बजे समाप्त होगी। अब सवाल उठता है कि इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? आइए जानते हैं।
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दिवाली पर पूजा का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करने के चार शुभ मुहूर्त हैं, जो वृषभ काल, प्रदोष काल, निशिता काल और सिंह काल हैं। लक्ष्मी पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 31 मिनट से लेकर 7 बजकर 50 मिनट तक है। इसी दौरान लोगों को पूजा करनी चाहिए।
प्रदोष काल- शाम 5:31 बजे से 8:09 बजे तक।
वृषभ काल- शाम 5:31 बजे से 7:50 बजे तक।
निशिता काल- रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक।
सिंह काल- रात 12:25 बजे से 2:42 बजे तक।
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दिवाली पर पूजा कैसे करें?
शाम को घर के पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। उसके बाद रंगोली बनाएं। यह रंगोली आप फूलों या रंगों से बना सकते हैं। एक छोटी चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं। फिर चौकी पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं स्थापित करें।
इसके बाद देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर फूलों की माला पहनाएं। फिर देवी-देवताओं के सामने कमल के फूल, दूर्वा और लड्डू का भोग लगाएं। इसके साथ ही फल, खीर और बताशे भी चढ़ाएं। पूजा के बाद आरती करें। पूजा खत्म होने के बाद 108 बार लक्ष्मी मंत्र का जाप करें।
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लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
या देवी सर्वभूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
नोट:यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।