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नरक चतुर्दशी पर कैसे करें पूजा? पर्व से जुड़ी मान्यता से महत्व तक, सब समझिए

7 नवंबर को नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। जानिए पूजा की विधि से लेकर पर्व का महत्व क्या है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Genearted

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नरक चतुर्दशी सनातन धर्म के बेहद खास त्योहारों में से एक है। इस त्योहार को छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। इसी वजह से छोटी दिवाली पर भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। इनके साथ-साथ इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। धार्मिक जानकारों के अनुसार, इन देवी-देवताओं की पूजा-पाठ के साथ यम दीप भी जलाना चाहिए। इसमें दीपक जलाकर यमराज से प्रार्थना की जाती है।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भक्तों को पूरे शरीर पर तेल लगाकर स्नान करना चाहिए। यह रस्म केवल शारीरिक शुद्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि इस प्रक्रिया से लोगों को मानसिक शांति भी मिलती है। आइए जानते हैं कि इस पर्व का महत्व क्या है और इस दिन भक्तों को पूजा कैसे करनी चाहिए।

 

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चतुर्दशी का महत्व

धार्मिक कथाओं के मुताबिक, नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बना लिया था, जिन्हें वह हर दिन परेशान करता था। इसके साथ ही नरकासुर ने देवताओं को भी परेशान करना शुरू कर दिया था। इससे परेशान होकर सभी देवता भगवान कृष्ण के पास गए। तब भगवान कृष्ण ने नरकासुर से युद्ध करके उसका वध किया।

 

नरकासुर के वध की खुशी में नरक चतुर्दशी का त्योहार मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन देवी-देवताओं की पूजा-पाठ की जाती है। इसके अलावा, शाम को यमराज की आराधना कर दीपदान किया जाता है। इसमें सभी भक्त अपने घर के बाहर दीपक जलाते हैं। माना जाता है कि इस परंपरा से व्यक्ति अकाल मृत्यु से बचता है।

 

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नरक चतुर्दशी पर कैसे करें पूजा?

नरक चतुर्दशी के दिन सुबह-सुबह स्नान करें, जिसके बाद साफ कपड़े पहनें। इस त्योहार में शाम के समय विधिवत पूजा की जाती है। शाम को अपने घर के पूजा स्थान को साफ करें और वहां चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। फिर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान कृष्ण की प्रतिमाएं रखें। इनके सामने फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं।

 

देवी-देवताओं को हल्दी, कुमकुम, रोली और चंदन लगाकर पूजा करें। इसके बाद 14 दीपक जलाकर रखें। पूजा के बाद आरती करें। देवी-देवताओं की पूजा करने के बाद घर के बाहर एक दीपक जलाएं और उसे दक्षिण दिशा की ओर रखें। इस दीपक को रखने के बाद यमराज जी से परिवार के सदस्यों के जीवन की रक्षा के लिए प्रार्थना करें।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

 

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