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धनतेरस पर नई चीजें खरीदने के पीछे क्या है मान्यता? धर्म ग्रंथों से समझिए

धनतेरस त्योहार पर सभी लोग कुछ नई चीजें खरीदते हैं। नई चीजें खरीदने के पीछे क्या मान्यता है? हिंदू धर्म ग्रंथों में इस खास परंपरा के बारे में लिखा है या नहीं? यहां समझिए।

Dhanteras festival

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Generated

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सनातन धर्म में धनतेरस एक ऐसा त्योहार है, जब सभी लोग नई चीजें खरीदकर खुशियां मनाते हैं। कई लोग इस दिन सोना, चांदी और बर्तन खरीदते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, नई चीजें खरीदने से लोगों के घर में सुख-संपत्ति और समृद्धि आती है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस दिन नई चीजें खरीदना सिर्फ एक लोक परंपरा है। हिंदू धर्म के किसी भी ग्रंथ में यह नहीं लिखा है कि धनतेरस के दिन नई चीजें खरीदनी चाहिए। यह परंपरा विष्णु पुराण में लिखी समुद्र मंथन की कथा से जुड़ी है। इसी वजह से सनातन धर्म के सभी लोग इस दिन नई चीजें खरीदते हैं।

 

इस साल 6 नवंबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन सभी भक्त मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि विष्णु भगवान के एक अवतार हैं, जिनके आशीर्वाद से लोगों के घर में धन-संपत्ति ठहरती है और व्यक्ति को स्वस्थ जीवन मिलता है। ऐसे में सवाल उठता है कि समुद्र मंथन में ऐसा क्या हुआ था, जिसे आधार मानकर लोग धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदते हैं।

 

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धनतेरस का समुद्र मंथन से क्या है जुड़ाव?

विष्णु पुराण में समुद्र मंथन की कहानी बताई गई है। कहानी के अनुसार, जब दैत्यों ने देवताओं को हराकर तीनों लोकों में अपना अधिकार जमा लिया था, तब दैत्यों से परेशान होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। भगवान विष्णु ने सभी देवताओं को दैत्यों से संधि करके समुद्र मंथन करने का सुझाव दिया। इसके बाद समुद्र मंथन हुआ, जिसमें मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही अमृत पीने के बाद सभी देवता अमर हो गए थे।

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि कार्तिक महीने की त्रयोदशी तिथि को ही प्रकट हुए थे। इस वजह से धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है और भगवान धन्वंतरि की पूजा-पाठ की जाती है। भगवान धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन तांबे, पीतल और चांदी के बर्तन खरीदे जाते हैं। नए बर्तनों को समृद्धि और आरोग्य का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग भगवान से अपने स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।

 

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धनतेरस पर क्यों जलाते हैं यम दीप?

धनतेरस के दिन लोग सिर्फ मां लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा नहीं करते हैं, बल्कि यमराज की भी आराधना की जाती है। धनतेरस पर शाम के समय सभी भक्त दीपक जलाते हैं। खास बात यह है कि यह दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में जलाकर रखा जाता है और यमराज से प्रार्थना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह दीपदान परिवार की रक्षा के लिए किया जाता है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।

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