सनातन धर्म में संतान की प्राप्ति और बेटे के सुख-समृद्धि के लिए कई व्रत रखे जाते हैं। उन्हीं में से जितिया पर्व बेहद खास है। इस पर्व में सभी माताएं अपने बेटे के सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। यह पर्व एक दिन का नहीं बल्कि 3 दिनों तक मनाया जाता है, जो नहाय-खाय से शुरू होता है और पारण के साथ खत्म होता है। जहां नहाय-खाय के दिन माताएं अच्छे पकवान बनाकर अपने बच्चे को खिलाती हैं। उसके अगले दिन निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिन माताओं ने एक बार जितिया पर्व रखना शुरू किया, उन्हें पूरे जीवन यह व्रत रखना चाहिए।
जितिया पर्व उत्तर भारत के कई इलाकों में मनाया जाता है, खासतौर पर बिहार और झारखंड की माताएं यह पर्व मनाती हैं। धार्मिक जानकारों के अनुसार, जिन महिलाओं की संतान नहीं है, अगर वे महिलाएं भी यह व्रत रखें तो उन्हें पुत्र की प्राप्ति हो सकती है। जानकारी के लिए बता दें, इस पर्व में विष्णु भगवान की पूजा की जाती है। अब सवाल उठता है कि इस पर्व के पहले और दूसरे दिन व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
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जितिया पर्व की सही तारीख
हिन्दू पंचांग के अनुसार 3 अक्टूबर को सुबह 7:59 से जितिया पर्व शुरू होगा, जो 4 अक्टूबर को सुबह 5:51 बजे खत्म होगा। हालांकि पर्व की शुरुआत 2 अक्टूबर से हो चुकी है, जहां आज सभी माताएं नहाय-खाय की परंपरा निभाएंगी।
2 अक्टूबर यानी आज सभी माताएं सुबह-सुबह स्नान करके खास प्रकार के पकवान बना रही हैं। जिसमें रागी की रोटी, झिंगनी की सब्जी, नोनी का साग, कांदे का चोखा और कद्दू की सब्जी बनाने का रिवाज है। इसके बाद 3 अक्टूबर को सभी महिलाएं सूर्योदय से भी पहले उठकर बेटे के लिए ठेकुआ बनाएंगी। उसके बाद सुबह होते ही संकल्प लेकर व्रत रखेंगी। फिर 4 अक्टूबर को व्रत का पारण करेंगी। धार्मिक जानकारों के अनुसार, व्रत के पारण का सही समय 7 बजकर 28 मिनट के बाद से शुरू होगा।
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व्रत से जुड़ी कुछ खास बातें
जितिया पर्व में सभी माताओं को साफ कपड़े और लाल या पीले धागे में पिरोया हुआ सोने का लॉकेट पहनना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह लॉकेट बेटे का प्रतीक है, जो बच्चे को हर चुनौती से बचाता है। ऐसा माना जाता है कि जो मां यह लॉकेट पहनती है, उनका बेटा न सिर्फ बुरी नजर से बचता है बल्कि भविष्य में होने वाली अनहोनी से भी बचता है। इसके अलावा सभी महिलाओं को 3 अक्टूबर को व्रत कथा सुननी चाहिए, वरना यह व्रत अधूरा माना जाएगा।
भूलकर भी न करें ये गलती
1.पारण करते वक्त तामसिक खाना यानी लहसुन, प्याज और मांस-मछली न खाएं। इसके बजाय सात्विक खाना खाएं। पारण के दौरान नोनी का साग खाना शुभ माना जाता है।
2.जितिया पर्व में सिर्फ मां ही नहीं बल्कि पूरे परिवार को तामसिक खाने से परहेज करना चाहिए।
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3.अगर तबीयत ठीक नहीं है तो यह व्रत रखने की गलती न करें।
4.अगर पूजा के दौरान गलती हो जाए तो उस वक्त भगवान से माफी मांगें और व्रत जारी रखें।
नोट:यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।