सनातन धर्म में ऐसे कई पर्व-त्योहार हैं, जब महिलाएं अपने पति के सुख, शांति और लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसी सिलसिले में करवा चौथ पर्व है, जिसे लगभग पूरे उत्तर भारत में मनाया जाता है। यह पर्व सभी सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है, लेकिन इन सबके बीच रोचक बात यह है कि हिंदू धर्म में ऐसा कोई पर्व-त्योहार नहीं है, जिसमें पति अपनी पत्नी की लंबी और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखें। इसको लेकर हिंदू धर्म ग्रंथ मनुस्मृति में बेहद खास बात बताई गई है।
हिंदू धर्म में करवा चौथ एक लौता व्रत नहीं है, जिसमें महिला अपने पति के सुखद जीवन के लिए व्रत रखती हो। इसके अलावा वट सावित्री व्रत, हरतालिका तीज, मंगला गौरी व्रत और कजरी तीज है। इन पर्वों में भी महिलाएं व्रत रखकर खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। इसके साथ ही सवाल उठता है कि पत्नियों की लंबी उम्र के लिए पति व्रत ऐसी कोई व्रत-त्योहार क्यों नहीं है।
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पत्नी के लिए एक भी नहीं
हिंदू धर्म का मनुस्मृति एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें विवाह और वैवाहिक जीवन से जुड़ी कई बातें बताई गई हैं। इसी सिलसिले में मनुस्मृति में पति और पत्नी के कर्तव्य के बारे में कई अहम बातें बताई गई हैं। मनुस्मृति में पत्नियों का पतिव्रता रहना ही सबसे बड़ा कर्तव्य माना जाता है। इसका मतलब जो स्त्री हर परिस्थिति में अपने पति का साथ देती है, वह पतिव्रता धर्म निभा रही है। इसी विचार की वजह से पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने की परंपरा की शुरुआत हुई है। मनुस्मृति में कहा है कि पत्नियों के लिए पति से अलग कोई उपवास नहीं है। जो पति का हमेशा साथ देती है, इसका मतलब वह धर्म की राह पर चल रही है।
'नास्ति स्त्रीणां पृथग्यज्ञो न व्रतं नाप्युपोषणम्।
पतिं शुश्रूषते येन तेन स्वर्गे महीयते॥'
इस श्लोक का अर्थ है कि जो पत्नी अपने पति का सम्मान और आदर करती है, वह महिला धर्म के मार्ग पर चलती है। उन महिलाओं को व्रत रखने की भी जरूरत नहीं है। सिर्फ आदर और सम्मान देकर वह पुण्य कमा सकती है।
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पति का क्या है कर्तव्य?
जिस तरह राम जी ने अपने पूरे जीवन एक पत्नी व्रत अपनाया था, इसी को आदर्श माना जाता है। इसके साथ ही मनुस्मृति में बताया गया है कि एक पति अपनी पत्नी को हमेशा सम्मान दें, रक्षा करें और खुश रखें। विवाह के दौरान एक पति ने जो वचन दिए थे, वह वचन पूरे जीवन निभाने चाहिए। तो इसका मतलब साफ है कि भले ही पुरुष अपनी पत्नियों के लिए व्रत नहीं रखते हैं, मगर उन्हें अपने वैवाहिक जीवन को सुखद रखने के लिए अपनी पत्नियों का सम्मान और आदर करना चाहिए।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।