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क्या भाग्य नहीं, कर्म से बदलता है भविष्य? भगवद्गीता और गरुड़ पुराण से समझिए

कई लोग मानते हैं कि व्यक्ति के भाग्य में जो लिखा है, उसे कभी टाला नहीं जा सकता। वहीं, कर्म और भाग्य को लेकर गरुड़ पुराण और भगवद्गीता में अलग दृष्टिकोण बताया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- AI Genrated

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हिन्दू धर्म ग्रंथों में साफ तौर पर लिखा है कि व्यक्ति का कर्म ही उसका धर्म है। जो व्यक्ति अपने कर्म का पालन नहीं करता, वह अपने धर्म का भी पालन नहीं कर रहा होता। इसके विपरीत कई लोगों का मानना है कि व्यक्ति के भाग्य में जो पहले से लिखा है, वही होकर रहेगा यानी व्यक्ति किसी चीज को पाने के लिए कितनी भी मेहनत क्यों न करे, उसे जीवन में वही मिलेगा जो उसके भाग्य में लिखा है। इसी वजह से मन में यह सवाल उठता है कि जीवन कर्म से या भाग्य से बदलता है।

 

हिन्दू धर्म में भगवद्गीता और गरुड़ पुराण को बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। इनमें दिए गए उपदेशों और शिक्षाओं के आधार पर व्यक्ति अपने जीवन से जुड़े कई सवालों के उत्तर जान सकता है। इसी सिलसिले में कर्म और भाग्य को लेकर इन दोनों ग्रंथों में कई बातें बताई गई हैं, जिनके जरिए आप समझ सकते हैं कि व्यक्ति का भविष्य कर्म से बदलता है या किस्मत से। आइए जानते हैं कि भगवद्गीता और गरुड़ पुराण में क्या कहा गया है।

 

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 क्या है कर्म और भाग्य?

 

अक्सर जब व्यक्ति के साथ कुछ बुरा होता है, तो वह अपने कर्मों के बजाय भाग्य को दोषी ठहराता है। वह सोचता है कि यह चीज उसके भाग्य में नहीं लिखी थी, इसलिए उसे नहीं मिल पाई। लेकिन इस सोच के विपरीत भगवद्गीता में बताया गया है कि व्यक्ति कर्म करने के लिए बाध्य है, वह कभी भी कर्म किए बिना नहीं रह सकता।

 

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने बताया है कि भाग्य कोई स्थायी नियति नहीं है। इसके बजाय व्यक्ति का भाग्य उसके पिछले जन्म के कर्मों के आधार पर बनता है। यानी इस जन्म का भाग्य, पिछले जन्म के कर्मों का फल है। इसी संदर्भ में श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि व्यक्ति को अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, न कि उसके फल की चिंता करनी चाहिए। यही बात इस श्लोक में कही गई है

 

'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।'

 

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इस श्लोक का अर्थ है कि व्यक्ति का अधिकार केवल कर्म करने पर है, फल पर नहीं। इसका गहरा अर्थ यह है कि हम वर्तमान में जो कर्म करते हैं, वही भविष्य में हमारा भाग्य बनाते हैं।

 

गरुड़ पुराण में क्या लिखा है?

 

गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है। इसमें भी बताया गया है कि व्यक्ति के इस जन्म के कर्म ही अगले जन्म का भाग्य बनते हैं। यानी इस जन्म का भाग्य, पिछले जन्म के कर्मों का परिणाम है। इन्हीं कर्मों का फल व्यक्ति को मृत्यु के बाद भी भुगतना पड़ता है। इन्हीं कर्मों के आधार पर न केवल अगले जन्म का भाग्य तय होता है, बल्कि मृत्यु के बाद व्यक्ति को स्वर्ग या नरक की प्राप्ति भी होती है। अगर व्यक्ति के कर्म बुरे हैं, तो उसे अगले जन्म में उनके परिणाम भुगतने पड़ते हैं।

 

कर्म से बदलता है भविष्य?

हिन्दू धर्म के ग्रंथ भगवद्गीता और गरुड़ पुराण के अनुसार, व्यक्ति अपने कर्मों के आधार पर अपना भविष्य बदल सकता है क्योंकि भाग्य भी कर्मों के आधार पर ही बनता है। यदि व्यक्ति अच्छे कर्म नहीं करेगा, तो उसका भाग्य भी अच्छा नहीं होगा। इसलिए इन ग्रंथों में कर्म को भाग्य से अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।


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