इस्लाम के सबसे पाक महीने रमजान में हर सेहतमंद और बालिग मुसलमान को रोजा रखना जरूरी है। रोजा रखने का असली मकसद खुद पर काबू पाना और अल्लाह की इबादत करना है लेकिन अक्सर जानकारी के अभाव में लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे उनकी इबादत अधूरी रह जाती है। जानकारों का कहना है कि रोजे के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ना भी उतना ही जरूरी है क्योंकि बिना नमाज के रोजा करना सही नहीं माना जाता।
शरीयत के अनुसार, रोजा रखने के दौरान कुछ कड़े नियम होते हैं जिनका पालन करना हर रोजेदार के लिए जरूरी है। अगर कोई जानबूझकर कुछ खा-पी लेता है तो उसका रोजा तुरंत टूट जाता है। इसके अलावा, जानबूझकर उल्टी करना, भाप लेना या शरीर में ऐसी ड्रिप लगवाना जिससे भूख-प्यास मिटती हो, रोजे को अमान्य कर देता है।
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किन वजहों से टूटता है रोजा?
- जानबूझकर पानी की एक बूंद पीना या छोटा सा निवाला खाना भी रोजा खत्म कर देता है।
- धुआं या भाप जैसे नशीली चीजें अंदर लेना वर्जित है।
- ऐसे इंजेक्शन या ड्रिप जो शरीर को ताकत और पोषण देते हैं, उनसे रोजा टूट जाता है। हालांकि, सामान्य दवाओं के इंजेक्शन पर जानकारों की अलग-अलग राय है।
- अगर कोई व्यक्ति लगभग 80 किलोमीटर से ज्यादा की लंबी यात्रा पर है, तो उसे रोजा छोड़ने की रियायत है लेकिन बाद में इसकी भरपाई करनी होगी।
गलती हो गई तो क्या करें?
अगर किसी मजबूरी या अनजाने में रोजा टूट जाए, तो उसकी 'कजा' करनी होती है, यानी रमजान के बाद उतने ही दिन का रोजा दोबारा रखना होता है लेकिन अगर किसी ने जानबूझकर रोजा तोड़ा है, तो उसे 'कफ्फारा' देना होगा।
कफ्फारा का मतलब है पछतावा या दंड। इसके लिए व्यक्ति को या तो लगातार 60 दिनों तक रोजे रखने होंगे या फिर 60 गरीबों को खाना खिलाना होगा। कफ्फारा के साथ-साथ उस एक टूटे हुए रोजे की कजा यानी एक रोजा अलग से भी रखनी पड़ती है।
किन्हें मिली है रोजे से छूट?
- अगर रोजा रखने से बीमारी बढ़ने का डर हो।
- प्रेग्नेंट महिलाओं को भी इससे राहत दी गई है।
- बहुत अधिक बूढ़े व्यक्ति जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं और छोटे बच्चों पर रोजा फर्ज नहीं है।
- मानसिक रूप से अस्वस्थ या बेहोशी की हालत वाले लोगों के लिए भी नियम में ढील है।
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रमजान में हाइड्रेटेड रहने के प्रभावी तरीके
- इफ्तार खुलते ही एक साथ 2-3 गिलास पानी न पिएं, इससे पेट फूल सकता है। इसके बजाय खजूर और एक गिलास पानी से शुरुआत करें। हर घंटे एक गिलास पानी पीने का लक्ष्य रखें। सहरी में कम से कम 2 गिलास पानी जरूर पिएं।
- अपने भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करें जिनमें पानी की मात्रा 90% से ज्यादा हो। जैसे तरबूज और खरबूजा इफ्तार के लिए बेहतरीन हैं। खीरा और टमाटर को सलाद के रूप में जरूर खाएं। सहरी में दही खाने से प्यास कम लगती है और पाचन भी सही रहता है।
- चाय और कॉफी के इस्तेमाल से शरीर से पानी जल्दी बाहर निकल जाता है और प्यास अधिक लगती है।
- नमक शरीर में पानी को सोख लेता है, जिससे डिहाइड्रेशन होता है इसलिए ज्यादा नमक और मसाले का उपयोग न करें।
- ज्यादा मीठे शरबत प्यास को और बढ़ा सकते हैं इसलिए चीनी वाले ड्रिंक्स से दूरी बना कर रखे।
- जितना हो सके सीधी धूप से बचें। अगर मुमकिन हो, तो दिन के समय घर के ठंडे हिस्से में रहें और शारीरिक मेहनत वाले काम शाम के वक्त या इफ्तार के बाद के लिए टाल दें।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।