logo

मूड

ट्रेंडिंग:

ब्रह्मा बड़े या विष्णु? जब लड़ पड़े भगवान, शिव ने ऐसे सुलझाया झगड़ा

पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार की बात है कि विष्णु भगवान और ब्रह्मा जी के बीच विवाद छिड़ गया कि दोनों में सर्वश्रेष्ठ कौन है। इस विवाद को सुलझाने में शिव भगवान ने बेहद अहम भूमिका निभाई थी। इस विवाद से जुड़ी पौराणिक कथा पढ़िए।

Brahma and Vishnu

प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

सनातन धर्म में जहां एक तरफ ब्रह्मा जी को सृष्टि का रचयिता यानी निर्माता माना जाता है, तो वहीं दूसरी तरफ विष्णु भगवान को पालनकर्ता यानी संसार का रक्षक माना जाता है। इसी वजह से जब-जब संसार में अत्याचार और पाप का घड़ा भरता है, तब विष्णु भगवान अवतार लेते हैं। अपने विभिन्न अवतारों के जरिए उन्होंने लोगों की रक्षा की है और पाप का नाश किया है। कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि सर्वश्रेष्ठ भगवान कौन है। इसी सवाल को लेकर ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान के बीच विवाद हो गया था। इस विवाद को सुलझाने में शिव भगवान ने अहम भूमिका निभाई थी।


पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार ब्रह्मा देव को अपनी शक्तियों का घमंड हो गया था, जिस वजह से वह स्वयं को सर्वश्रेष्ठ देवता मानने लगे थे। इसी अहंकार में आकर ब्रह्मा जी ने विष्णु भगवान को पुत्र कहा था। यह सुनकर विष्णु भगवान क्रोधित हो गए थे। जिसके बाद दोनों देवताओं के बीच विवाद हो गया था। विवाद बढ़ने पर शिव भगवान ने दोनों देवताओं के बीच एक प्रतियोगिता रखी और कहा कि जो इसमें सफल होगा, वही सर्वश्रेष्ठ देव माना जाएगा।

 

यह भी पढ़ें: शिव भगवान ने लिए थे 19 अवतार, जानिए 5 अवतारों की पौराणिक कथाएं

 

 


ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान के बीच विवाद


पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी को अपनी शक्तियों पर अहंकार होने लगा, तो वह विष्णु भगवान के पास गए। उस समय विष्णु भगवान विश्राम कर रहे थे। विष्णु भगवान के शयन कक्ष में पहुंचने के बाद ब्रह्मा जी ने कहा, 'हे पुत्र, उठो और मेरी ओर देखो। मैं तुम्हारा ईश्वर और परमात्मा हूं। मेरी आराधना करो।'


ब्रह्मा जी की बातें सुनकर विष्णु भगवान क्रोधित हो गए। जिसके बाद विष्णु भगवान ने कहा, 'आपको अहंकार हो गया है। मैं पूरी सृष्टि का पालनकर्ता हूं, तो आप मेरे पिता कैसे हुए? आपको किसी ने पिता नहीं माना, लेकिन आप स्वयं को पिता समझ रहे हैं।' इसके बाद दोनों देवताओं के बीच विवाद और बढ़ गया। दोनों स्वयं को श्रेष्ठ देवता कहने लगे। इस वजह से दोनों देवता इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए शिव भगवान के पास गए।

 

यह भी पढ़ें: 5 जून का राशिफल: शुक्र और बुध के शुभ संयोग से क्या तेज होगी आपकी बुद्धि? जानिए


शिव भगवान ने करवाई प्रतियोगिता


विवाद के बाद दोनों देवता शिव जी के पास गए और उनसे इस प्रश्न का उत्तर पूछा। शिव जी ने सीधे जवाब देने के बजाय एक प्रतियोगिता रखवाई। इस प्रतियोगिता में शिव भगवान ने एक विशाल शिवलिंग प्रकट किया और दोनों देवताओं से कहा कि इस शिवलिंग का आदि और अंत खोजकर बताओ। इसके बाद दोनों देवता अलग-अलग दिशाओं में जाकर शिवलिंग का आरंभ और अंत खोजने लगे।


ब्रह्मा जी ने प्रतियोगिता में किया छल


जहां एक तरफ विष्णु भगवान ने पशु का रूप धारण किया और धरती तथा पाताल लोक में शिवलिंग का आदि और अंत खोजने लगे, लेकिन उन्हें उसका अंत नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने शिव जी के सामने अपनी हार स्वीकार कर ली।


वहीं दूसरी तरफ ब्रह्मा जी ने प्रतियोगिता जीतने के लिए झूठ का सहारा लिया। उन्होंने केतकी के फूल को झूठा चश्मदीद गवाह बना लिया और शिव जी के पास पहुंचकर कहा कि उन्होंने शिवलिंग का अंत खोज लिया है। केतकी के फूल ने भी उनके कथन का समर्थन किया।

 

यह भी पढ़ें: 4 जून का राशिफल: बृहस्पति देव की कृपा से आपको लाभ होगा या नहीं?

 

शिव भगवान किसे बताया श्रेष्ठ भगवान 


इस झूठ के कारण शिव भगवान क्रोधित हो गए। शिव जी ने इस प्रतियोगिता में विष्णु भगवान को विजयी घोषित किया और उन्हें श्रेष्ठ बताया। वहीं ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि उनकी पूजा-अर्चना संसार में बहुत सीमित होगी। साथ ही केतकी के फूल को भी शिव पूजा में स्वीकार न किए जाने का श्राप दिया गया।


इस प्रकार शिव भगवान ने ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता के विवाद का समाधान किया और यह संदेश दिया कि अहंकार का अंत सदैव पराजय में होता है, जबकि सत्य और विनम्रता की विजय होती है।

Related Topic:

और पढ़ें