सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान की खास मान्यता है, जिससे भक्तों के सभी कष्ट और पाप दूर हो जाते हैं। सोमवती अमावस्या पर भगवान शिव और मां पार्वती की विधिवत पूजा की जाती है। साथ ही पितरों की शांति के लिए भी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके अलावा कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
इस साल सोमवती अमावस्या की तिथि को लेकर कई भक्तों के मन में असमंजस है कि इसे 14 जून को या 15 जून को मनाया जाए। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या की सही तारीख क्या है।साथ ही जानिए इस दिन भक्तों को क्या करना चाहिए, जिससे भगवान शिव का आशीर्वाद उन पर बना रहे। इसके अलावा यह भी जान लें कि इस दिन किन कार्यों से बचना चाहिए।
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कब है सोमवती अमावस्या?
सनातन पंचांग के मुताबिक, अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी। इसके बाद 15 जून को सुबह 8 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। हिंदू धर्म में अधिकांश पर्व उदया तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, इसलिए 15 जून को सोमवती अमावस्या मनाना शुभ माना जाएगा।
इस दिन का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 23 मिनट से सुबह 8 बजे तक रहेगा। इस समय भगवान शिव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
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सोमवती अमावस्या पर क्या करें?
15 जून को सुबह उठकर किसी नदी में स्नान करें। यदि नदी में स्नान करना संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें।पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें। साथ ही मीठे फल और मिठाई का भोग लगाएं तथा मंत्रों का जाप करें।
इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या पर दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन दाल, आटा, चावल और फलों का दान करना शुभ माना जाता है।
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क्या न करें?
1. इस दिन भोजन में मांस और मदिरा का सेवन करने से बचें।
2. किसी को परेशान न करें और कड़वे वचन बोलने से बचें।
3. दूसरो का अपमान न करें।
नोट- इस खबर में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।