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शिवजी की गले की मुंडमाला कैसे बयां करती है शिव और पार्वती की अमर प्रेम कहानी? 

पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव अपने गले में मुंडमाला धारण करते हैं। यह माला शिव और पार्वती जी की अमर प्रेम कहानी को बयां करती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit- Gemini

हिंदू ग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं और गले में 108 सिरों वाली मुंडमाला पहनते हैं। इस माला से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, जिसे सुनकर सिर्फ आप ही नहीं बल्कि माता पार्वती भी हैरान हो गई थीं। पौराणिक कथा के मुताबिक, एक बार देवर्षि नारद ने माता पार्वती से पूछा कि भगवान शिव यह मुंडमाला क्यों पहनते हैं और इसका रहस्य क्या है। इस सवाल का जवाब माता पार्वती को भी नहीं पता था। इसलिए उन्होंने भगवान शिव से यही प्रश्न किया। तब शिवजी ने बताया कि यह मुंडमाला माता पार्वती और भगवान शिव के अमर प्रेम का प्रतीक है।

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव अमर हैं, जबकि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कई जन्म लिए थे। हर जन्म में उन्होंने अलग-अलग रूप धारण कर शिवजी को प्राप्त किया था। मान्यता है कि माता सती यानी पार्वती ने 108 बार जन्म लिया था। शिवजी के कंठ पर विराजमान मुंडमाला इसी बात का प्रतीक है। इस माला का प्रत्येक सिर माता सती के एक-एक जन्म का प्रतिनिधित्व करता है।

 

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क्या है मुंडमाला का प्रतीक?

 

पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता पार्वती ने मुंडमाला के बारे में कई बार पूछा, तब शिवजी ने इसका रहस्य बताया। उन्होंने कहा कि मुंडमाला में मौजूद 108 सिर माता पार्वती के 108 जन्मों के प्रतीक हैं। इसी वजह से धार्मिक जानकारों का मानना है कि मुंडमाला माता पार्वती और भगवान शिव की अमर प्रेम कहानी का प्रतीक है।

 

इस सवाल का जवाब मिलने के बाद माता पार्वती ने एक और प्रश्न पूछा। उन्होंने कहा कि मुझे बार-बार जन्म लेना पड़ता है और हर जन्म में शरीर का त्याग करना पड़ता है, जबकि आप अमर हैं। आपके अमर होने का रहस्य क्या है? इस सवाल का जवाब देते हुए शिवजी ने एक कथा सुनाई थी।

 

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क्या है शिवजी की अमर कथा?

 

पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव ने अमर कथा सुनाने के लिए एक एकांत स्थान चुना था, जिसे आज अमरनाथ गुफा के नाम से जाना जाता है। कथा सुनाने से पहले उन्होंने गुफा के चारों ओर अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी थी, ताकि कोई भी वहां प्रवेश न कर सके और अमर कथा न सुन पाए।

 

इसके बाद भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुनाने लगे। कथा सुनते-सुनते माता पार्वती को नींद आ गई, लेकिन शिवजी को लगा कि वह कथा सुन रही हैं। कुछ समय बाद भगवान शिव ने देखा कि माता पार्वती सो रही हैं। वहीं गुफा में मौजूद दो कबूतरों ने पूरी कथा सुन ली थी। यह देखकर शिवजी क्रोधित हो गए। तब दोनों कबूतरों ने उनसे क्षमा मांगी। एक कबूतर ने कहा कि यदि आप हमें मार देंगे, तो यह अमर कथा असत्य हो जाएगी। कबूतरों की बात सुनकर शिवजी शांत हो गए और उन्होंने कहा कि आज से इन दोनों कबूतरों को शक्ति और अमरता का प्रतीक माना जाएगा।

 

नोट: यह कथा धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसकी ऐतिहासिक या वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की जा सकती।

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