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एयरपोर्ट पर थे आकिब, अचानक आई बुमराह की रिप्लेसमेंट वाली कॉल और बदल गई जिंदगी

श्रीलंका के खिलाफ शनिवार से शुरू हो रही टेस्ट सीरीज में बुमराह की जगह आकिब नबी को टीम में चुना गया है। एयरपोर्ट पर मिले अचानक कॉल ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

Saransh Jain And  Auqib Nabi

सारांश जैन और आकिब नबी, Photo Credit: Social Media

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जम्मू और कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने की अपनी उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। भले ही उन्हें अपने पहले बुलावा के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ा पर वह लगातार अच्छा खेल दिखाते रहे। उन्हें पूरा भरोसा था कि अगर वह अच्छा खेलते रहेंगे तो उन्हें मौका जरूर मिलेगा।

 

यह मौका तब आया जब आकिब को श्रीलंका में शनिवार से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुन लिया गया। उन्हें चोटिल तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की जगह टीम में शामिल किया गया है। आकिब ने पिछले सीजन में अपनी टीम जम्मू और कश्मीर को पहली बार रणजी ट्रॉफी जिताने में बहुत बड़ी मदद की थी।

 

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आकिब नबी का बयान

बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (BCCI) द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो में दूसरे अनकैप्ड खिलाड़ी सारांश जैन से बात करते हुए आकिब ने अपनी सोच के बारे में खुलकर बात की। आकिब ने कहा, 'हां, मेरी उम्मीदें थीं लेकिन एक क्रिकेट खिलाड़ी की सोच यह होनी चाहिए कि वह अपना काम करे और बाकी लोग देख रहे हैं।'

 

उन्होंने आगे कहा, 'मुझे पता था कि आज या कल मुझे बुलावा मिल जाएगा क्योंकि जब आप इतने सालों तक अच्छा खेलते हैं, तो आपकी मेहनत का फल आपको जरूर मिलता है।' आकिब ने यह भी कहा, 'इसलिए मैं इस सोच के साथ गेंदबाजी करता था कि मेरा काम विकेट लेना और अपना खेल दिखाना है और बाकी सब ऊपर वाले पर है। जब मेरा नाम आया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। मेरा परिवार बहुत खुश है और मुझे नहीं लगता कि इससे बढ़कर कुछ और हो सकता है।'

सारांश जैन का लंबा सफर

सारांश उस मध्य प्रदेश की टीम का हिस्सा थे जिसने साल 2021-22 में रणजी ट्रॉफी जीती थी और फाइनल में मुंबई को हराया था। 33 साल के सारांश ने बताया कि टेस्ट क्रिकेट तक पहुंचने के लिए बहुत सब्र रखना पड़ता है। सारांश ने कहा, 'आपको टेस्ट क्रिकेट में सब्र रखना होगा और अगर आप भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं, तो आपको उसमें भी सब्र रखना होगा।'

 

उन्होंने आगे बताया, 'मैंने 2014-15 में रणजी ट्रॉफी में अपना पहला मैच खेला था। यह एक बहुत लंबा सफर था। इसमें बहुत मेहनत और त्याग था लेकिन मुझे पूरा विश्वास था कि एक दिन मैं भारत के लिए जरूर खेलूंगा और इस बात में मेरे परिवार का बहुत बड़ा हाथ है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मेरे पिताजी, जो खुद एक रणजी खिलाड़ी हैं, उन्होंने मुझे यही बात कही थी। आपको बस सब्र रखना है, चीजें अपने आप आपके पास आ जाती हैं।'

एयरपोर्ट पर मिला हैरान करने वाला कॉल

दोनों खिलाड़ियों ने यह भी बताया कि उन्हें अपनी टीम में चुने जाने की खबर कैसे मिली। आकिब ने बताया, 'मैं एयरपोर्ट पर था। हमें सीओई में एक कैंप में जाना था और मैं बेंगलुरु जाने के लिए फ्लाइट में बैठने वाला था।' आकिब ने आगे कहा, 'मुझे एक फोन आया जिसमें पूछा गया कि मैं कहां हूं। मैंने उन्हें बताया कि मैं बेंगलुरु जा रहा हूं और एयरपोर्ट पर हूं। उन्होंने मुझे बताया कि मुझे वहां नहीं जाना है, मुझे श्रीलंका आना है और मेरा सिलेक्शन हो गया है।' आकिब ने यह भी कहा, 'पहले तो मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। यह बहुत अचानक हुआ क्योंकि टीम पहले ही आ चुकी थी।

 

यह भी पढ़ें: वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे में रचा इतिहास, किसका रिकॉर्ड तोड़ दिया?

 

मैं कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार था। मैं कैंप में जा रहा था।' वहीं सारांश ने अपने बारे में बताया, 'जब मुझे फोन आया, तब मैं गाड़ी चलाकर मंदिर जा रहा था। मैंने रास्ते में फोन पर कॉल और मैसेज देखे। तभी मुझे पता चला कि मेरा सिलेक्शन हो गया है।' श्रीलंका के खिलाफ यह दो टेस्ट मैचों की सीरीज श्रीलंका में ही शनिवार से शुरू हो रही है। 

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