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मंदिर क्यों गई थी टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी? BCCI ने कीर्ति आजाद को दिया जवाब

पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आगाज ने टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर सवाल उठाया था। BCCI के सचिव देवजीत सैकिया ने कहा है कि मंदिर स्टेडियम के अंदर ही है। कोई बाहर ट्रॉफी लेकर नहीं गया था।

Kirti Azad Devajit Saikia

कीर्ति आगाद और देवजीत सैकिया, Photo Credit: Kirti Azad/X, PTI

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भारत की टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीत के बाद ट्रॉफी को मंदिर ले जाने पर विवाद हो गया था। पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और ICC चेयरमैन जय शाह की कड़ी आलोचना की थी। 1983 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया के सदस्य रहे कीर्ति आजाद ने 'X' पर लिखा था कि यह ट्रॉफी हर धर्म के 140 करोड़ भारतीयों की है। यह किसी एक धर्म की जीत का जश्न नहीं है। 

 

दरअसल, रविवार (8 मार्च) को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में मिली ऐतिहासिक जीत के कुछ ही घंटे बाद टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव, हेड कोच गौतम गंभीर और ICC चेयरमैन जय शाह ट्रॉफी लेकर हनुमान टेकरी मंदिर पहुंचे थे। उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी के साथ पूजा अर्चना की थी, जिस पर कीर्ति आजाद ने कड़ी आपत्ति जताई थी और यहां तक कह दिया था कि शर्म करो टीम इंडिया! ने सवाल किया था कि ट्रॉफी को मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारा क्यों नहीं ले जाया गया? अब इस मामले पर BCCI की ओर से जवाब आ गया है।

 

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कीर्ति आजाद ने क्या-क्या कहा था?

भारत के लिए 7 टेस्ट और 25 वनडे इंटरनेशनल मुकाबले खेलने वाले कीर्ति आजाद ने ट्रॉफी मंदिर ले जाने पर कहा था, 'शर्म करो इंडिया टीम इंडिया। जब हमने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वर्ल्ड कप जीता था तब हमारी टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई खिलाड़ी थे। हम ट्रॉफी को अपनी धार्मिक जन्मभूमि, अपनी मातृभूमि इंडिया-भारत-हिंदुस्तान लाए थे।'

 

उन्होंने अपने पोस्ट में आगे कहा, 'अभी भारतीय क्रिकेट टीम की ट्रॉफी को क्यों घसीटा जा रहा है? मस्जिद क्यों नहीं? चर्च क्यों नहीं? गुरुद्वारा क्यों नहीं? यह टीम भारत का प्रतिनिधित्व करती है, सूर्यकुमार यादव या जय शाह के परिवार का नहीं। सिराज कभी ट्रॉफी को मस्जिद में नहीं ले गए। संजू कभी इसे चर्च में नहीं ले गए। संजू ने इसमें अहम भूमिका निभाई और वह टूर्नामेंट के बेस्ट खिलाड़ी रहे। यह ट्रॉफी हर धर्म के 140 करोड़ भारतीयों की है। किसी एक धर्म की जीत का जश्न मनाने की जगह नहीं।'

 

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BCCI से क्या जवाब आया?

कीर्ति आजाद के बयान पर जब एक मीडिया आउटलेट के कार्यक्रम में BCCI के सचिव देवजीत सैकिया से सवाल पूछे गए तो उन्होंने कहा, 'वह मंदिर स्टेडियम के अंदर है। गेट के अंदर गैलरी के पास है। पवेलियन से निकलते के रास्ते में पड़ता है। 50 साल पुराना मंदिर है। सभी टिका लगाकर जाते हैं। कोई दूसरी वजह नहीं है। मुझे नहीं मालूम कीर्ति आजाद साहब ने इसे किस नजरिए से देखा है।'

 

उन्होंने साफ करते हुए कहा, 'यह खिलाड़ियों की विनम्रता है। उन्होंने भगवान के सामने प्रार्थना किया और कृतज्ञता वयक्त की। इससे कोई पॉलिटिक्स और कम्यूनल बात नहीं निकलता है। अगर वहां चर्च भी होता तो उसके प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त किया जाता। कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। स्टेडियम के अंदर है मंदिर इसलिए गए थे। कोई बाहर नहीं गया था। यह सब्जेक्टिव मैटर है। सब अपने-अपने नजरिए से इसे देख सकते हैं।'

 

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गौतम गंभीर जाहिर कर चुके हैं नाराजगी

टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने एक पॉडकास्ट में कीर्ति आजाद के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा था, 'देखिए मैं इसके बार में क्या बोलूं। इस सवाल का जवाब देना भी बेकार है। पूरे देश के लिए एक बड़ा पल है। अगर आप मुझसे पूछे, तो यह हमारे पूरे देश के लिए एक बहुत बड़ा पल है। मुझे लगता है कि यह जरूरी है कि हम वर्ल्ड कप विनर का जश्न मनाएं। इसीलिए मैंने कुछ बातें कहीं; कुछ बातों को उठाने का कोई मतलब नहीं है, क्योंकि ये बातें सिर्फ उनकी (खिलाड़ियों की) कामयाबी को कमजोर करेंगी। अगर आप उन 15 खिलाड़ियों की कामयाबी और उनकी कोशिशों को कमजोर करना चाहते हैं, तो कल कोई भी उठकर कुछ भी बयान देगा और हम उसे गंभीरता से लेना शुरू कर देंगे, जो लड़कों के लिए सही नहीं है।'

 

गंभीर ने आगे कहा था,'कल्पना कीजिए कि लड़कों ने कितना कुछ झेला होगा। साउथ अफ्रीका के खिलाफ एक मैच हारने के बाद उन पर कितना प्रेशर रहा होगा। आज, अगर आप ऐसा बयान दे रहे हैं, तो आप सचमुच अपने ही खिलाड़ियों और अपनी ही टीम को नीचा दिखा रहे हैं, जो नहीं करना चाहिए।'


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