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पडिक्कल की ताकत क्या है, जो उन्हें नंबर-3 की रेस में सुदर्शन से आगे रखती है?

बाएं हाथ के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक जड़ भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है। अब उन्हें नंबर-3 पर 'लॉन्ग रन' मिलने वाला है।

Devdutt Padikkal Batting IND vs SL 2nd Test

श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में शॉट खेलते देवदत्त पडिक्कल, Photo Credit: BCCI/X

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श्रीलंका दौरे पर गई भारतीय टीम धमाल मचा रही है। शुभमन गिल की कप्ताना वाली टीम ने गॉल में 165 रन से जीत दर्ज करने के बाद कोलंबो में भी जीत के बेहद करीब पहुंच गई है। टीम इंडिया की इस सफलता में टॉप ऑर्डर के बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल की अहम भूमिका रही है। पडिक्कल ने दोनों टेस्ट मैचों में शतक लगाए हैं।

 

उन्होंने गॉल में पहली पारी में 167 रन जड़े थे। इसके बाद दूसरी पारी में बैटिंग के लिए मुश्किल हो चुकी पिच पर भी उनके बल्ले से 44 रन निकले। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कोलंबो में भी अपनी फॉर्म को बरकार रखा और पहली पारी में 117 रन ठोक दिए। पडिक्कल ने श्रीलंका में जिस अंदाज में बैटिंग की है, उससे टेस्ट टीम में उनकी जगह पक्की मानी जा रही है। साथ ही उन्हें नंबर-3 पर लगातार मौके मिलने वाले हैं।

 

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सुदर्शन की वापसी मुश्किल

पडिक्कल ने 2024 की शुरुआत में धर्मशाला में अपना टेस्ट डेब्यू किया था और 65 रन की पारी खेली थी। उन्हें नंबर-4 पर उतारा गया था। पडिक्कल को टेस्ट क्रिकेट में अगला मौका नवंबर 2024 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर मिला था। पर्थ में खेले गए बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के शुरुआती टेस्ट से चोटिल शुभमन गिल के बाहर होने के चलते उन्हें नंबर-3 पर भेजा गया। पडिक्कल पहली पारी में खाता नहीं खोल सके, जबकि दूसरी पारी में उन्होंने जुझारूपन दिखाते हुए 71 गेंद में 25 रन बनाए। हालांकि शुभमन गिल की वापसी के साथ ही उन्हें बाहर होना पड़ा।

 

इसके बाद पडिक्कल ने अपनी बारी का लंबा इतजार किया। श्रीलंका दौरे से पहले साई सुदर्शन के चोटिल होने से उनकी किस्मत चमकी। पडिक्कल ने सुदर्शन की जगह नंबर-3 पर बैटिंग करते हुए दो शतक ठोक इस पोजिशन को अपना बना लिया है। सुदर्शन टेस्ट में वापसी भी करते हैं, तब भी तीसरे नंबर पर पडिक्कल को ही खिलाए जाने की संभावना है।

 

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सुदर्शन से बेहतर हैं पडिक्कल के आंकड़े

बाएं हाथ के बल्लेबाज सुदर्शन ने अब तक 7 टेस्ट मैच खेले हैं। सभी मैचों में उन्होंने नंबर-3 पर बैटिंग की है और 12 पारियों में 31.91 के साधारण औसत से 383 रन बनाए हैं। उन्होंने 3 अर्धशतक जड़े हैं लेकिन उनके बल्ले से कोई शतक नहीं आया है। दूसरी तरफ पडिक्कल ने तीसरे नंबर पर अब तक 5 पारियां खेली हैं, जिसमें उन्होंने 59.62 की औसत से 353 रन बटोर लिए हैं। उनके नाम दो शतक हैं।

 

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में भी पडिक्कल के आंकड़े सुदर्शन से बेहतर हैं। पडिक्कल ने 57 फर्स्ट क्लास मैचों में 44.56 की औसत से 4011 रन बनाए हैं। वहीं सुदर्शन 42 फर्स्ट क्लास मैचों में 42.91 की औसत से 3004 रन ही बना पाए हैं। पडिक्कल के नाम 11 फर्स्ट क्लास शतक दर्ज हैं, तो सुदर्शन ने रेड बॉल क्रिकेट में 10 शतक लगाए हैं।

 

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पडिक्कल की यह है सबसे बड़ी ताकत

श्रीलंका के खिलाफ मौजूदा सीरीज में पडिक्कल ने स्पिनर्स को बैकफुट से जिस अंदाज में खेला है, वह उन्हें नंबर-3 की रेस में सुदर्शन से आगे रखता है। पडिक्कल ने अच्छी गेंदों को भी बाउंड्री में तब्दील करने की गजब की काबिलियत दिखाई है। उनके पास बैकफुट से पावर जेनेरेट की क्षमता है। वह गुड लेंथ गेदों पर बैकफुट से लेट कट, स्क्वेयर के सामने कट और पुल लगाते हैं। इतना ही नहीं वह पंच पर भी बाउंड्री बटोरते नजर आए हैं। बैकफुट पर खेलते हुए पडिक्कल का स्ट्राइक रेट 61 का है, जबकि सुदर्शन सिर्फ 36 के ही स्ट्राइक रेट से रन बना पाते हैं। 


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