भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने कहा है कि जब संजू सैमसन अपनी फॉर्म में होते हैं तो वह पावरप्ले में ही विपक्षी टीम से मैच छीन सकते हैं। ICC टी20 वर्ल्ड कप के नॉकआउट स्टेज में संजू का प्रदर्शन जबरदस्त रहा था। उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल में तूफानी अंदाज में अर्धशतक जड़कर भारत को रिकॉर्ड तीसरी बार खिताब दिलाया था। अभिषेक शर्मा और संजू ने फाइनल में मिलकर पावरप्ले में 92 रन बनाए और न्यूजीलैंड से मैच छीन लिया।
गंभीर ने जियो स्टार पर कहा, 'हम जानते हैं कि संजू क्या कर सकता है। उसका टैलेंट और विस्फोटक बल्लेबाजी पर कभी कोई संदेह नहीं था। अगर वह लय में आ जाए तो पहले छह ओवरों में ही मैच जिता सकता है।'
यह भी पढ़ें: कौन हैं बिहार के प्रीतम राज, जिन्हें नमन अवॉर्ड में सम्मानित करेगा BCCI?
संजू की वापसी की इनसाइड स्टोरी
संजू का वर्ल्ड कप से पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था और फिर उन्हें ICC टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में प्लेइंग-XI में जगह नहीं मिली थी। हालांकि जिम्बाब्वे के खिलाफ 'करो या मरो' वाले मैच में मौका मिलने पर सैमसन ने 15 गेंदों में 24 रन बनाकर लय हासिल की और इसके बाद अगले तीन मैच में नाबाद 97, 89 रन और 89 रन बनाए।
गंभीर ने कहा, 'मैंने उसे जिम में यह बात बताई। दरअसल हम दोनों साथ में ट्रेनिंग कर रहे थे और मैंने उसे बस इतना बताया कि तुम जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलोगे और उसने कहा कि ठीक है। हमारी बातचीत कुछ इसी तरह से अनौपचारिक होती है। यह किसी हेड कोच और खिलाड़ी के रिश्ते जैसा नहीं है। यह एक ऐसा रिश्ता है जिसमें हमारी आमने-सामने की अधिकतर बातचीत प्रैक्टिस सेशन के दौरान होती है।'
यह भी पढ़ें: बुमराह के बॉलिंग ऐक्शन पर पाकिस्तानी सेलेक्टर ने ऐसा क्या कहा कि मच गया बवाल?
संजू को टीम में लाने का कारण क्या था?
भारतीय टीम की प्लेइंग-XI में सैमसन की गैरमौजूदगी में भारत के टॉप ऑर्डर में ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा के रूप में तीन बाएं हाथ के बल्लेबाज शामिल थे। मगर गंभीर ने जोर देकर कहा कि संजू को प्लेइंग-XI में शामिल करने का फैसला बाएं हाथ के बल्लेबाजों के कॉम्बिनेशन को तोड़ने के उद्देश्य से नहीं बल्कि टीम को अधिक आक्रामक ताकत देने के लिए लिया गया था।
उन्होंने कहा, 'मुझे पता है कि बहुत से लोग इस बारे में बात करेंगे कि हम टॉप ऑर्डर पर मौजूद तीनों बाएं हाथ के बल्लेबाजों के कॉम्बिनेशन को तोड़ना चाहते थे, ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम बस और अधिक आक्रामक होना चाहते थे। पिछले डेढ़ साल से हमारी मानसिकता यही रही है कि मैदान पर उतरकर हम जितना हो सके उतना आक्रामक प्रदर्शन करें।'
गंभीर ने कहा, 'संजू को टीम में लाने का कारण दूसरे छोर से ऑफ-स्पिनर को कंट्रोल करना नहीं बल्कि इस बात पर आधारित था कि क्या हम पहले छह ओवरों में और अधिक आक्रामक हो सकते हैं।'
यह भी पढ़ें: यूट्यूब से सीखा चेस, अब बने भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर, कौन हैं मयंक चक्रवर्ती?
अभिषेक पर क्या बोले गंभीर?
अभिषेक टूर्नामेंट के पहले तीन मैच में खाता भी नहीं खोल पाए थे लेकिन उन्होंने इसके बाद दो अर्धशतक लगाए, जिनमें फाइनल में लगाया गया अर्धशतक भी शामिल है। गंभीर ने कहा, 'IPL 2014 में मेरा अनुभव उससे भी बदतर रहा था जब मैं लगातार चार मैचों में शून्य पर आउट हुआ। मैंने उससे बस इतना कहा था कि लोग आपके स्कोर देखेंगे और आपकी फॉर्म के बारे में बात करेंगे, लेकिन असल में आप खराब फॉर्म नहीं हो, बस रन नहीं बना पा रहे हैं।'
उन्होंने कहा, 'आपकी फॉर्म का सही आकलन तभी हो सकता है जब आप 20 से 30 गेंदें खेल चुके हों और उसने अभी तक 20 गेंदें भी नहीं खेली हैं। मैं बस यही चाहता था कि वह हर अगले मैच में पिछले मैच की तुलना में अधिक आक्रामक होकर खेले।' हेड कोच ने कहा, 'अभिषेक को लेकर कोई संदेह नहीं था। सच कहूं तो हम सभी को टी20 विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुने गए प्रत्येक खिलाड़ी पर पूरा भरोसा था।'