ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला बॉक्सरों ने शानदार खेल दिखाते हुए देश का मान बढ़ाया है। शनिवार को प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने अपने-अपने फाइनल मुकाबले जीतकर भारत की झोली में दो गोल्ड मेडल डाल दिए। दोनों की इस शानदार जीत से न सिर्फ भारत का पदक अभियान और मजबूत हुआ, बल्कि दुनिया को यह भी दिखा दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाजी अब लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।
24 वर्षीय प्रीति पवार ने महिलाओं के 54 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में कनाडा की स्कारलेट सवाना डेलगोडो को 5-0 से हराकर भारत को बॉक्सिंग का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। इसके कुछ ही मिनट बाद जैस्मिन लंबोरिया ने महिलाओं के 57 किलोग्राम कैटेगरी के फाइनल में नॉर्दर्न आयरलैंड की अनुभवी मुक्केबाज माइकेला वॉल्श कोो भी 5-0 से मात देकर दूसरा गोल्ड अपने नाम कर लिया।
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तीनों राउंड में हावी रही प्रीति पवार
प्रीति पवार ने मुकाबले की शुरुआत काफी संयम के साथ की। शुरुआती पलों में कनाडा की डेलगाडो ने कुछ अच्छे पंच जरूर लगाए लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं दिखाई। पहले राउंड में प्रीति के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए सभी पांचों जजों ने उन्हें 5-0 से विजेता करार दिया।
दूसरे राउंड में प्रीति का आत्मविश्वास और भी बढ़ा हुआ नजर आया। उन्होंने लगातार साफ और सटीक पंच लगाए। इस राउंड में भी पांचों जजों ने 5-0 से प्रीति के पक्ष में फैसला सुनाया। आखिरी राउंड में भी प्रीति पूरी तरह हावी रहीं। उन्होंने मुकाबले की रफ्तार अपने हिसाब से रखी और डेलगाडो को लगातार बैकफुट पर धकेले रखा। फाइनल बेल बजने के बाद जजों ने सर्वसम्मति से प्रीति पवार को विजेता घोषित किया।
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जैस्मिन ने अनुभवी वॉल्श को नहीं दिया मौका
पहले तीन मिनट में दोनों मुक्केबाजों ने काफी संभलकर शुरुआत की। दोनों एक-दूसरे की गलती का इंतजार कर रही थीं और ज्यादातर काउंटर पंच लगाने की कोशिश कर रही थीं। पहले मिनट में मुकाबला इतना धीमा रहा कि रेफरी को दो बार बीच में आकर दोनों बॉक्सरों को ज्यादा एक्टिव होने के लिए कहना पड़ा। हालांकि मुकाबले में लगातार अटैक देखने को नहीं मिला लेकिन जैस्मिन लंबोरिया ने ज्यादा सटीक और साफ पंच लगाए। इसी वजह से स्प्लिट डिसीजन (3-2) से पहला राउंड उनके नाम रहा।
दूसरे राउंड में मुकाबले की रफ्तार थोड़ी बढ़ी। वॉल्श ने लंबोरिया को आगे आने के लिए उकसाने की कोशिश की लेकिन भारतीय मुक्केबाज ने धैर्य नहीं खोया और सही मौके पर सटीक पंच लगाती रहीं। लांबोरिया की बेहतरीन टाइमिंग और क्लीन पंचों से जज काफी प्रभावित हुए। नतीजा यह रहा कि दूसरा राउंड उन्हें एकतरफा 5-0 के फैसले से मिला और उन्होंने फाइनल राउंड से पहले मजबूत बढ़त बना ली।
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आखिरी तीन मिनट में भी भारतीय बॉक्सर ने अपना संयम बनाए रखा। उन्होंने लगातार सटीक पंच लगाए, जबकि वॉल्श वापसी के लिए जरूरी आक्रामकता नहीं दिखा सकीं। फाइनल बेल बजते ही जैस्मिन लंबोरिया को सर्वसम्मति से विजेता घोषित किया गया और उन्होंने भारत के लिए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।