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'बहुत बड़ी जीत नहीं है', मैगनस कार्लसन को हराकर ऐसा क्यों बोले आर प्रज्ञानंद?

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंद ने नॉर्वे शतरंज 2026 में मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में हरा दिया है। इसे टूर्नामेंट में एक बड़े उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है।

Praggnanandhaa defeats Magnus Carlsen

आर प्रज्ञानंद ने मैगनस कार्लसन को हराया, Photo Credit: Social Media

भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंद ने नॉर्वे शतरंज 2026 में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल मुकाबले में हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। ओस्लो में खेले गए इस मुकाबले में प्रज्ञानानंद ने अपनी शानदार रणनीति, धैर्य और कंट्रोल का प्रदर्शन करते हुए कार्लसन को मात दी। यह जीत भारतीय शतरंज के लिए बेहद खास मानी जा रही है क्योंकि प्रज्ञानानंद ने पहली बार क्लासिकल फॉर्मेट में कार्लसन को हराया है। 

 

नॉर्वे शतरंज 2026 टूर्नामेंट इस बार ओस्लो में आयोजित किया जा रहा है और इसमें दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं। प्रतियोगिता 25 मई से 5 जून तक चलेगी। भारत की तरफ से आर प्रज्ञानानंद, डी गुकेश, कोनेरू हम्पी और दिव्या देशमुख जैसे खिलाड़ी खेल रहे हैं। अभी इस टूर्नामेंट में कई बड़े मुकाबले होने हैं जिन पर पूरी दुनिया की नजर है। 

 

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एंडगेम में किया खेल

मैग्नस कार्लसन अपने घरेलू टूर्नामेंट में हमेशा मजबूत खिलाड़ी माने जाते हैं लेकिन इस मुकाबले में प्रज्ञानानंद ने शुरुआत से ही आक्रामक रणनीति अपनाई। मुकाबला काफी लंबे समय तक संतुलित रहा लेकिन मिडिल गेम के बाद प्रज्ञानंद ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। एंडगेम में कार्लसन ने कुछ गलतियां कीं, जिसका फायदा उठाकर प्रज्ञानानंद ने जीत अपने नाम कर ली। 

 

शतरंज के जानकारों का मानना है कि यह जीत सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी की ताकत का बड़ा संकेत है। पिछले कुछ सालों में भारत के युवा खिलाड़ियों ने लगातार इंटरनेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन किया है और अब प्रज्ञानानंद ने दुनिया के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल कार्लसन को हराकर अपनी क्षमता साबित कर दी है। 

जीत के बाद क्या बोले प्रज्ञानानंद?

आर प्रज्ञानानंद की यह जीत बेहद अहम मानी जा रही है। उन्होंने जीत के बाद कहा कि वह इस मुकाबले को बहुत बड़ी जीत की तरह नहीं देख रहे हैं क्योंकि टूर्नामेंट अभी लंबा है और आगे कई अहम मुकाबले बाकी हैं। उन्होंने कहा कि मुकाबले के दौरान वह सिर्फ अच्छी चालें खेलने पर ध्यान दे रहे थे और एंडगेम में उन्हें मौका मिला जिसका उन्होंने फायदा उठाया। उन्हों ने यह भी माना कि मैग्नस कार्लसन के खिलाफ खेलना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन इस बार वह शांत रहकर खेलते रहे। प्रज्ञानानंद ने कहा कि जीत से उन्हें खुशी जरूर है लेकिन उनका पूरा फोकस अब अगले राउंड पर है।

कार्लसन को दूसरा झटका

मैग्नस कार्लसन को टूर्नामेंट में लगातार दूसरी बड़ी हार का सामना करना पड़ा। इससे पहले पहले राउंड में फ्रांस के अलीरेजा फिरोजा ने भी कार्लसन को हराया था। ऐसे में नॉर्वे शतरंज 2026 की शुरुआत कार्लसन के लिए बेहद निराशाजनक रही है। कार्लसन कई सालों से इंटरनेशनल शतरंज पर राज कर रहे हैं और उन्हें मौजूदा समय का सबसे महान खिलाड़ी माना जाता है लेकिन हाल के समय में भारतीय खिलाड़ियों के खिलाफ उनका रिकॉर्ड दबाव में नजर आ रहा है। इससे पहले डी गुकेश भी उन्हें क्लासिकल मुकाबले में हरा चुके हैं। 

दिव्या देशमुख का शानदार प्रदर्शन

भारतीय महिला खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने भी टूर्नामेंट में लगातार तीसरी आर्मागेडन जीत दर्ज की। दिव्या ने अपने डेब्यू टूर्नामेंट में शानदार खेल दिखाया है और महिला वर्ग में लगातार मजबूत खिलाड़ियों को चुनौती दे रही हैं। इससे पहले दिव्या देशमुख ने महिला विश्व चैंपियन जू वेनजुन को भी आर्मागेडन मुकाबले में हराकर सबको चौंका दिया था। उनके प्रदर्शन को भारतीय महिला शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। 

 

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नॉर्वे शतरंज क्यों है खास

नॉर्वे शतरंज दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शतरंज टूर्नामेंटों में गिना जाता है। इस टूर्नामेंट में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। खास बात यह है कि यहां क्लासिकल मुकाबला ड्रॉ होने पर आर्मागेडन गेम खेला जाता है, जिससे दर्शकों को हर मुकाबले में निर्णायक नतीजा देखने को मिलता है। इस बार का टूर्नामेंट इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इसमें भारत के युवा खिलाड़ियों ने शुरुआती दौर से ही विश्व के दिग्गज खिलाड़ियों पर दबाव बना दिया है। प्रज्ञानानंद की कार्लसन पर जीत को अब तक के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक माना जा रहा है। 


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