logo

मूड

ट्रेंडिंग:

टीम में गुटबाजी, अनबन... हरमनप्रीत के कप्तानी छोड़ने की वजहें क्या हैं?

हरमनप्रीत कौर ने भारत की महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी छोड़ दी है। उनकी जगह स्मृति मंधाना को कमान मिली है। पढ़िए हरमनप्रीत के कप्तानी छोड़ने की वजहें क्या हैं और उन्हें यह फैसला लेना क्यों जरूरी था।

Harmanpreet Kaur Smriti Mandhana

हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना, Photo Credit: BCCI Women/X

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement

भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लीडरशिप में बड़ा बदलाव हुआ है। हरमनप्रीत कौर ने टीम इंडिया की कमान छोड़ दी है। हरमनप्रीत ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को यह फैसला लिया। इसके कुछ ही घंटों बाद स्मृति मंधाना को टीम की बागडोर सौंप दी गई। भारतीय महिला क्रिकेट के लिए यह कोई चौंकाने वाला दिन नहीं था, बल्कि यह समय की मांग थी।

 

हरमनप्रीत की कप्तानी में टीम इंडिया ने जब पिछले साल वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीता था, तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि वह स्मृति के लिए कुर्सी छोड़ देंगी लेकिन उन्होंने कप्तानी करना जारी रखा। इस साल भारतीय टीम टी20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई थी, जिससे हरमनप्रीत पर काफी दबाव बढ़ा। 

 

उन्होंने एशिया कप और एशियन गेम्स में टीम इंडिया को खिताब जीत दिलाई लेकिन टीम की काबिलियत को देखते हुए यह उतनी बड़ी उपलब्धि नहीं थी, जिसे बहुत ज्यादा सेलिब्रेट किया जाए और उनकी कप्तानी चलती रहे। ऐसे में हरमनप्रीत ने सही समय देखकर अपना पद छोड़ दिया। हालांकि फिर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्होंने यह फैसला लेने में देरी की है? ऐसा इसलिए, क्योंकि टीम में गुटबाजी काफी आगे तक बढ़ चुकी है।

 

यह भी पढ़ें: भुवनेश्वर कुमार की टीम इंडिया में वापसी, न्यूजीलैंड दौरे के लिए मिला मौका

कप्तानी नहीं मिलने से निराश थीं स्मृति

भारतीय टीम ने पिछले साल घरेलू मैदान पर वनडे वर्ल्ड कप जीतकर ICC खिताब के सूखे को खत्म किया था। इसके बाद सेलेक्टर्स ने हरमनप्रीत को कप्तान बनाए रखा, जिससे स्मृति निराश थीं। हाल ही में स्मृति ने एक इंटरव्यू में भारत की कप्तानी करने के लिए अपनी तैयारी जाहिर की थी और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद कहा था कि भारत को इससे भी बड़े टूर्नामेंट्स जीतने का टारगेट रखना चाहिए। 

 

भारत ने वनडे वर्ल्ड कप जीता लेकिन लगातार दो टी20 वर्ल्ड कप में खराब प्रदर्शन के बाद हरमनप्रीत की कप्तानी पर सवाल उठने लगे थे लेकिन सेलेक्टर्स ने तब बदलाव नहीं किया। इधर स्मृति अपनी कप्तानी में लगातार कमाल कर रही थीं। उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ( RCB ) को महिला प्रीमियर लीग (WPL) में दो बार चैंपियन बनाया। बल्ले से भी रनों का अंबार लगा रही थीं लेकिन हरमनप्रीत पीछे हटने के लिए तैयार नहीं थीं।

 

यह भी पढ़ें: लखनऊ में गरजा श्रेयस अय्यर का बल्ला, पहला टी20I शतक ठोक टीम इंडिया को दिलाई जीत 

कप्तानी को लेकर थी अनबन

BCCI के साथ रिव्यू मीटिंग के बाद हरमनप्रीत ने कप्तानी से हटने का फैसला किया है। 37 साल की हरमनप्रीत को BCCI ने बता दिया था कि लीडरशिप में अब बदलाव जरूरी है, जिसके बाद उन्होंने खुद ही कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। मगर तब तक उनके और स्मृति के बीच अनबन जगजाहिर हो चुकी थी। 

 

हरमनप्रीत और स्मृति के बीच कप्तानी को लेकर मतभेद एक पेचीदा मुद्दा बन गया था, जबकि दोनों पहले काफी अच्छी तरह घुलती-मिलती थीं। कुछ समय से कई मामलों में दोनों की राय नहीं मिल रही थी और इससे ड्रेसिंग रूम में असहजता साफ दिखाई देने लगी थी।

 

यह भी पढ़ें: 2036 ओलंपिक मेजबानी की रेस में भारत... IOC ने बताया ये 6 देश भी ठोक रहे दावेदारी

हरमनप्रीत के लिए आगे क्या?

महिला क्रिकेट को पुरुष टीम जितनी कड़ी समीक्षा का सामना नहीं करना पड़ता लेकिन लीडरशिप को लेकर सेलेटक्टर्स की ओर से यह पहली चूक नहीं है। वर्ल्ड कप 2022 के बाद जब हरमनप्रीत ने मिताली से वनडे कप्तानी संभाली थी, तब दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच संबंध बेहद खराब दौर से गुजर रहे थे। इससे टीम में गुटबाजी पैदा हुई थी। 

 

अब हरमनप्रीत अगले दो-तीन साल खिलाड़ी के रूप में खेलना जारी रखना चाहती हैं और ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह और स्मृति टीम के हित में पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ पाती हैं या नहीं। हरमनप्रीत हालिया समय में फॉर्म में नहीं दिखी हैं। टीम में अब एक स्पेशलिस्ट बल्लेबाज के तौर पर उनसे उम्मीदें बढ़ना तय है और भारतीय टीम में अपनी जगह बनाए रखने के लिए उन्हें अपने खेल के स्तर में काफी सुधार करना होगा।


और पढ़ें