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छापा मारने गई थी बिहार पुलिस, अपनी ही तलाशी देनी पड़ी, अब दो थानेदार हुए सस्पेंड

बिहार की पुलिस छापा मारने पहुंची थी लेकिन कुख्यात अपराधियों के घर खुद की तलाशी करती नजर आई। अब इस मामले में दो थानेदारों को सस्पेंड कर दिया गया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: ChatGPT

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बिहार के पटना के मोकामा में हुई एक घटना ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। आमतौर पर अपराधियों और संदिग्धों की तलाशी लेने वाली पुलिस इस बार खुद कटघरे में दिखी। कुख्यात सोनू-मोनू गिरोह के घर छापेमारी करने पहुंची पुलिस टीम को पहले अपनी ही तलाशी देनी पड़ी। हैरानी की बात यह रही कि पूरा घटनाक्रम थानेदारों की मौजूदगी में हुआ और किसी ने विरोध तक नहीं किया। मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

 

मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पंचमहला थानाध्यक्ष कुंदन कुमार और हाथीदह थानाध्यक्ष रंजन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। दोनों अधिकारियों पर कर्तव्य में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और पुलिस की गरिमा गिराने का आरोप लगा है।

 

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गोलीबारी कांड की जांच में पहुंची थी पुलिस

पूरा मामला 23 मई 2026 की शाम का है। पंचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जो देखते ही देखते गोलीबारी में बदल गया। इस मामले में पंचमहला थाना कांड  दर्ज किया गया था। इसी केस के नामजद आरोपियों सोनू कुमार और मोनू कुमार की गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी के लिए पुलिस टीम छापेमारी करने पहुंची थी लेकिन जब पुलिस अपराधियों के घर पहुंची तो वहां मौजूद परिजन ने तलाशी का विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पुलिस की साख पर बड़ा दाग लगा दिया।

 

वायरल वीडियो में साफ दिखा कि पुलिसकर्मी घर में घुसने से पहले लाइन में खड़े होकर अपनी तलाशी दे रहे हैं। इतना ही नहीं, एक महिला ने फोन पर कुख्यात मोनू कुमार से थानेदार की बात भी कराई। पुलिसकर्मी पूरे समय चुपचाप खड़े रहे और दबंगों की शर्तों के आगे झुकते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर अपराधियों के सामने पुलिस इतनी बेबस क्यों दिखी? क्या कानून का डर अब सिर्फ आम लोगों के लिए बचा है?

SSP की रिपोर्ट में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर टिप्पणी

बाढ़ के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि किसी कुख्यात अपराधी के घर छापेमारी के दौरान पुलिसकर्मियों का सार्वजनिक रूप से अपनी तलाशी देना बेहद गंभीर और शर्मनाक स्थिति है। इससे जनता के बीच पुलिस की छवि धूमिल हुई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पुलिस कार्रवाई से अपराधियों में भय और आम लोगों में विश्वास पैदा होना चाहिए लेकिन इस घटना ने बिल्कुल उल्टा संदेश दिया। इसी आधार पर दोनों थानेदारों को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय नवीन पुलिस केंद्र, पटना निर्धारित किया गया है। साथ ही दोनों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

 

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मोकामा में फिर चर्चा में आया दबंग नेटवर्क

यह घटना एक बार फिर मोकामा में सक्रिय अपराधी नेटवर्क और उनके प्रभाव को लेकर चर्चाओं को तेज कर गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तरह पुलिस टीम अपराधियों के घर पर असहाय नजर आई, उससे साफ है कि इलाके में दबंगों का खौफ अब भी कायम है। फिलहाल, वायरल वीडियो और पुलिस कार्रवाई के बाद मामला पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है।


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