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बस्ती में बिना जांच के ही बना दिए 998 ड्राइविंग लाइसेंस, 2 अधिकारी सस्पेंड

UP के बस्ती जिले के एआरटीओ कार्यालय में बिना जांच के 998 ड्राइविंग लाइसेंस मंजूर करने के मामले में शासन ने दो मोटर यान निरीक्षक को निलंबित कर दिया है। दोनों के लिखाफ भ्रष्टाचार निवारण संगठन को जांच के लिए पत्र भेजा है।

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प्रतीकात्मक फोटो, Photo Credit: ChatGPT

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उत्तर प्रदेश के बस्ती के उप संभागीय परिवहन कार्यालय में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़ी अनियमितता सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। निर्धारित जांच-पड़ताल के बिना 998 ड्राइविंग लाइसेंस मंजूर करने के मामले में मोटरयान निरीक्षक संजय कुमार दास और सीमा गौतम को निलंबित कर दिया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच के लिए भ्रष्टाचार निवारण संगठन को भी पत्र भेजा गया है। 

विभागीय जांच में सामने आया कि मोटरयान निरीक्षक संजय कुमार दास ने 785 और सीमा गौतम ने 213 लाइसेंस बिना जरूरी जांच-पड़ताल के मंजूर किए। इस तरह कुल 998 लाइसेंस ऐसे मिले, जिनमें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवश्यक जांच नहीं की गई थी। जांच में बस्ती कार्यालय के कम्प्यूटरीकृत रिकॉर्ड और एनआईसी लखनऊ से मिले आंकड़ों का भी परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट 31 अगस्त 2026 को प्रस्तुत की गई। 

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ऑनलाइन व्यवस्था, फिर भी लाइसेंस किए गए बैकलॉग

जांच में यह भी सामने आया कि प्रदेश में एक अप्रैल 2013 से ड्राइविंग लाइसेंस ऑनलाइन सारथी पोर्टल के जरिए जारी किए जा रहे हैं। इसके बावजूद बस्ती कार्यालय में इसके बाद जारी किए गए कुछ लाइसेंसों को बैकलॉग के रूप में दर्ज किया गया। आवेदन मंजूर करने से पहले सारथी पोर्टल पर उपलब्ध एक्सट्रैक्ट ऑफ ड्राइविंग लाइसेंस और एप्लीकेशन पर्सनल डिटेल्स का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया गया। कई मामलों में पुराने ड्राइविंग लाइसेंस की प्रति तक अपलोड नहीं की गई।

 

जांच के दौरान पता बदलने के लिए किए गए कई आवेदनों में लगाए गए पते के प्रमाणों का भी जरूरी सत्यापन नहीं कराया गया। यानी लाइसेंस में बदलाव करने से पहले संबंधित दस्तावेजों की अनिवार्य जांच प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।नियमों के विपरीत पाए गए लाइसेंसों को रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। 

कंपनी के कर्मचारियों पर भी गिरेगी गाज

मामले की जांच में सेवा प्रदाता कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। संबंधित कर्मचारियों को सेवा से हटाने और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। संबंधित फर्म को काली सूची में डालने और उसकी सिक्योरिटी यानी बैंक गारंटी जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। 

 

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मामले की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन को जांच के लिए पत्र भेजा गया है। विभागीय जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में लापरवाही, नियमों की अनदेखी या अनियमितता पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। 

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