आंध्र प्रदेश के पोलावरम जिले के येतापका मंडल के गोल्लागुप्पा गांव में मलेरिया से बचाव के लिए क्लोरोक्वीन की गोली लेने के बाद 52 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। लोगों ने उल्टी, जी मिचलाने और पेट में परेशानी की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान 7 साल की बच्ची मदिवी जुमना की मौत हो गई। हालांकि, बच्ची की मौत की सही वजह अभी साफ नहीं है।
मामले की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने घटना की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। पोलावरम जिले के कलेक्टर के दिनेश कुमार ने भद्राचलम एरिया अस्पताल पहुंचकर मरीजों की इलाज की जानकारी ली। प्रशासन के मुताबिक, गांव में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और अस्पताल में भर्ती लोगों की लगातार निगरानी की जा रही है।
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23 मरीजों को PHC से अस्पताल भेजा गया
कलेक्टर के मुताबिक, प्रभावित लोगों को बेहतर इलाज मिल सके इसके लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। लक्ष्मीपुरम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती 23 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए भद्राचलम एरिया अस्पताल में भेजा गया। इसके बाद अस्पताल में कुल 52 प्रभावित लोगों का इलाज चल रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ज्यादातर मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर है। डॉक्टरों की टीम सभी मरीजों पर लगातार नजर रख रही है और उनकी जरूरत के हिसाब से इलाज किया जा रहा है।
क्लोरोक्वीन लेने के बाद हुई उल्टी
भद्राचलम एरिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ राजशेखर ने बताया, 'मंगलवार रात एक गांव से करीब 52 मरीज अस्पताल लाए गए थे। इनमें तीन से चार बच्चे भी थे, जिन्हें हल्की उल्टी और जी मिचलाने की शिकायत थी। अस्पताल पहुंचने के बाद तत्काल इलाज शुरू किया गया और मरीजों को स्थिर किया गया।'
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डॉ राजशेखर ने बताया कि इस इलाके में मलेरिया का खतरा अधिक रहता है और गोल्लागुप्पा को मलेरिया प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल अधिकारियों ने लोगों को बचाव के तौर पर क्लोरोक्वीन की एक खुराक लेने की सलाह दी थी। इसके बाद कुछ लोगों को उल्टी, जी मिचलाने और पेट में परेशानी की शिकायत हुई।
अस्पताल लाने से पहले हुई बच्ची की मौत
अस्पताल पहुंचने पर 7 साल की मदिवी जमुना को मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची को अस्पताल लाए जाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। फिलहाल यह साफ नहीं है कि उसकी मौत क्लोरोक्वीन के कारण हुई या किसी अन्य वजह से। मौत की सही वजह पता लगाने के लिए बच्ची के सैंपल फोरेंसिक लैब भेजे जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण की पुष्टि हो सकेगी। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय चिकित्सकीय निगरानी में रहने की अपील की है।